Pankaj Tripathi on Nana Patekar: गुरुवार तड़के गोवा स्थित अपने आवास पर दिल का दौरा पड़ने से दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया. लेकिन नाना की कहानी सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं थी. उनके साथ काम करने वाले कलाकारों के दिल में उनकी डांट, उनकी सीख और उनका प्यार भी हमेशा जिंदा रहेगा. एक्टर पंकज त्रिपाठी के पास भी नाना से जुड़ी ऐसी ही एक याद है, जिसे सुनकर समझ आता है कि वह सिर्फ बड़े कलाकार नहीं, बल्कि कलाकारों को तराशने वाले गुरु भी थे.
पंकज त्रिपाठी के लिए गुरु जैसे थे नाना
पंकज त्रिपाठी ने नाना को याद करते हुए बताया कि उनके जीवन में कुछ ऐसे कलाकार रहे हैं, जिनके प्रति प्रेम और सम्मान के कारण उन्होंने छोटी भूमिकाएं भी स्वीकार कीं. इरफान खान के लिए ‘अंग्रेजी मीडियम’ में टनटन का किरदार और नाना पाटेकर के साथ ‘काला’ में काम करना उनके लिए ऐसे ही अनुभव थे.

पंकज के लिए नाना सिर्फ सह-कलाकार नहीं थे. वह उनसे अभिनय की बारीकियां सीखते थे और जिंदगी को समझने की कोशिश करते थे. नाना की डांट में भी एक सीख थी, जो पंकज के साथ रह गई. यही वजह है कि उनके जाने की खबर ने पंकज को इमोशनल कर दिया.
जब छोटे से रोल पर भड़क गए थे नाना पाटेकर
कहानी साल 2018 की है. फिल्म थी ‘काला’, जिसमें रजनीकांत और नाना पाटेकर जैसे दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आए थे. इसी फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने भी पुलिस अफसर पंकज पाटिल का किरदार निभाया था. पंकज के लिए यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं थी, बल्कि अपने पसंदीदा कलाकारों के साथ काम करने का मौका भी थी. वह नाना के आसपास रहना पसंद करते थे और उनसे बहुत कुछ सीखना चाहते थे.
लेकिन शूटिंग के दौरान एक दिन कुछ ऐसा हुआ, जिसे पंकज शायद ही कभी भूल पाएं. नाना ने जब उन्हें एक छोटे से किरदार में देखा, तो वह नाराज हो गए. उन्होंने पंकज को डांटते हुए कहा कि तुम पहले से ही बड़े एक्टर हो, हमारे साथ काम करने से बड़े नहीं बनोगे. अगर अब कभी ऐसा छोटा रोल किया, तो मारूंगा.
नाना की यह डांट सुनने में भले ही सख्त लगे, लेकिन इसके पीछे एक गुरु की चिंता छिपी थी. वह नहीं चाहते थे कि पंकज अपनी प्रतिभा से कमतर किरदार स्वीकार करें. वह चाहते थे कि पंकज अपनी काबिलियत पहचानें और ऐसे काम करें, जो उनकी अभिनय क्षमता के साथ न्याय कर सके.
शहर की भीड़ नहीं, गांव की शांति पसंद थी नाना को
पंकज त्रिपाठी ने बताया नाना पाटेकर की शख्सियत का एक दूसरा पहलू भी था. पर्दे पर अपने दमदार और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना को असल जिंदगी में शहरों की भागदौड़ पसंद नहीं थी. उन्हें गांव की शांति, प्रकृति और सादगी से बेहद लगाव था. वह अपने आसपास हरियाली देखना, सब्जियां उगाना और सुबह पक्षियों की चहचहाहट सुनना पसंद करते थे.

वह अक्सर बताते थे कि गांव में रहकर उन्हें सुकून मिलता है. शायद यही सादगी उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी. वह अभिनय में जितने प्रभावशाली थे, निजी जिंदगी में उतने ही जमीन से जुड़े हुए थे.
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एक कलाकार, जिसकी डांट भी याद रहेगी
नाना पाटेकर का जाना हिंदी और मराठी सिनेमा के लिए बड़ी क्षति है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिनेता पंकज त्रिपाठी समेत कई लोगों ने उन्हें याद किया. पंकज के लिए नाना की याद सिर्फ एक महान अभिनेता की नहीं, बल्कि उस गुरु की भी है, जिसने उन्हें उनकी काबिलियत का एहसास कराया.
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