हाथी पर आगमन, किस वाहन पर मां की विदाई? शारदीय नवरात्रि के वाहनों का शुभ-अशुभ संकेत
Published: Friday, October 9, 2026, 18:35 [IST]
Shardiya Navratri 2026 Maa Durga Vahan: शारदीय नवरात्रि शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। घरों से लेकर मंदिरों तक मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भक्त नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा करेंगे और व्रत रखकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करेंगे। नवरात्रि में पूजा की तारीखों के साथ एक और बात को लेकर लोगों में खास उत्सुकता रहती है। वह है माता के आने और विदा होने का वाहन।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा हर साल एक ही वाहन पर नहीं आतीं और न ही उनकी विदाई हमेशा एक जैसी होती है। इसके लिए सप्ताह के दिनों के आधार पर अलग-अलग नियम बताए गए हैं। इस बार माता के आगमन और विदाई के वाहन अलग होंगे। आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता।
कब से शुरू होंगे शारदीय नवरात्रि?
इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। इसी दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ दिनों की पूजा शुरू होगी। भक्त मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे। नवरात्रि के दौरान घरों और मंदिरों में पूजा-पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन और व्रत रखने की परंपरा है। इसके बाद 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।
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किस वाहन पर आएंगी मां दुर्गा?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत जिस दिन होती है, उसी के आधार पर माता के आगमन का वाहन तय किया जाता है। इस बार नवरात्रि रविवार से शुरू हो रही है। मान्यता है कि रविवार या सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होता है। इसलिए इस साल देवी का आगमन हाथी पर माना जा रहा है।
हाथी को शक्ति, सुख-समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में माता का हाथी पर आना शुभ संकेत है। इसे अच्छी बारिश, खेती के लिए अनुकूल मौसम और खुशहाली से भी जोड़कर देखा जाता है।
मुर्गे पर क्यों होगी माता की विदाई?
इस साल विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगलवार या शनिवार को विजयादशमी पड़ने पर देवी का प्रस्थान चरणायुध यानी मुर्गे पर माना जाता है। इसी आधार पर इस बार मां दुर्गा की विदाई मुर्गे पर होने की मान्यता है।
कुछ धार्मिक परंपराओं में मुर्गे पर माता के प्रस्थान को बहुत शुभ नहीं माना गया है। इसे आने वाले समय में परेशानियों, चिंता और सामाजिक अशांति की आशंका से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं, भविष्य में ऐसी घटनाएं होना निश्चित नहीं है।
किस दिन किस वाहन पर आती हैं माता?
देवी भागवत महापुराण से जुड़े पारंपरिक श्लोक के अनुसार, नवरात्रि की प्रतिपदा जिस वार को पड़ती है, उसी के आधार पर माता के आगमन का वाहन माना जाता है।
श्लोक:
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥
इस श्लोक के अनुसार, सोमवार और रविवार को हाथी, मंगलवार और शनिवार को घोड़ा, बुधवार को नाव और गुरुवार व शुक्रवार को पालकी पर माता का आगमन माना जाता है।
मां दुर्गा के आगमन का वाहन, दिन के हिसाब से
| नवरात्रि शुरू होने का दिन | माता के आगमन का वाहन |
|---|---|
| रविवार | हाथी |
| सोमवार | हाथी |
| मंगलवार | घोड़ा |
| बुधवार | नाव |
| गुरुवार | पालकी (डोली) |
| शुक्रवार | पालकी (डोली) |
| शनिवार | घोड़ा |
किस दिन किस वाहन पर होती है विदाई?
माता के आगमन की तरह उनकी विदाई का वाहन भी विजयादशमी के दिन के आधार पर तय माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसके लिए अलग श्लोक बताया गया है।
श्लोक:
शशिसूर्यदिने यदि सा विजया महिषागमने रुजशोककरा।
शनिभौमदिने यदि सा विजया चरणायुधयानकरी विकला॥
बुधशुक्रदिने यदि सा विजया गजवाहनगा शुभवृष्टिकरा।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहनगा शुभसौख्यकरा॥
इस मान्यता के अनुसार, रविवार और सोमवार को देवी की विदाई भैंसे पर, मंगलवार और शनिवार को मुर्गे पर, बुधवार और शुक्रवार को हाथी पर तथा गुरुवार को मनुष्य पर मानी जाती है।
मां दुर्गा की विदाई का वाहन, दिन के हिसाब से
| विजयादशमी का दिन | माता की विदाई का वाहन |
|---|---|
| रविवार | भैंसा |
| सोमवार | भैंसा |
| मंगलवार | मुर्गा (चरणायुध) |
| बुधवार | हाथी |
| गुरुवार | मनुष्य |
| शुक्रवार | हाथी |
| शनिवार | मुर्गा (चरणायुध) |
हाथी, घोड़ा, नाव और डोली के क्या हैं संकेत?
नवरात्रि में माता के अलग-अलग वाहनों को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। हर वाहन का अपना प्रतीकात्मक महत्व बताया जाता है।
हाथी: इसे खुशहाली, अच्छी बारिश, शक्ति और समृद्धि से जोड़ा जाता है। हाथी पर माता का आगमन शुभ माना जाता है।
घोड़ा: कुछ धार्मिक मान्यताओं में घोड़े को तेज बदलाव, परेशानी और अशांति का संकेत माना गया है।
नाव: माता का नाव पर आना शुभ माना जाता है। इसे सुख, अच्छी फसल और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।पालकी या डोली: कुछ परंपराओं में डोली पर माता का आगमन चिंता, बीमारी और मुश्किल परिस्थितियों का संकेत माना जाता है।
मां दुर्गा का असली वाहन कौन सा है?
मां दुर्गा का पारंपरिक और स्थायी वाहन सिंह है। देवी की प्रतिमाओं और तस्वीरों में उन्हें आमतौर पर सिंह पर सवार दिखाया जाता है। नवरात्रि के समय हाथी, घोड़ा, नाव, डोली या अन्य वाहनों पर उनके आने-जाने की बात अलग धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इन वाहनों का निर्धारण नवरात्रि की शुरुआत और विजयादशमी के वार के आधार पर किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इन मान्यताओं और इनके अर्थ में थोड़ा अंतर भी देखने को मिल सकता है।
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