पुराने चालान से हैं परेशान, कब लगेगी लोक अदालत? ये तारीख है आखिरी मौका...

Published on 13 अक्टू॰ 2026

Lok Adalat: अगर आपके नाम पर ट्रैफिक चालान, बिजली बिल या किसी और विवाद का पुराना मामला अटका है तो लोक अदालत उसे निपटाने का सबसे सस्ता और आसान रास्ता मानी जाती है. अभी हाल ही में 10 अक्टूबर को दिल्ली और राजस्थान में लोक अदालत लगी थी. जिसके बाद लोग जानना चाह रहे हैं कि अब अगली बार मौका कब मिलेगा और इसमें शामिल होने के लिए 'कूपन' कैसे लिया जाए.

अब लोक अदालत कब लगेगी?

दिल्ली में 25 अक्टूबर 2026 को लोक अदालत लगने जा रही है. बता दें साल 2026 के राष्ट्रीय लोक अदालत कैलेंडर के मुताबिक साल की आखिरी नेशनल लोक अदालत 12 दिसंबर को प्रस्तावित है. 

That Unpaid Traffic Challan? Don’t Ignore October 25!

Delhi’s National Lok Adalat is scheduled for 25 October 2026.

Eligible traffic challans, cheque-bounce cases and money recovery disputes may be settled.

Check eligibility before applying.

Source: DSLSA pic.twitter.com/yaZWu9v0Uy

— CA Anjali Singhal (@anjalisinghalca) October 11, 2026

'कूपन' असल में क्या होता है?

आम बोलचाल में लोग इसे कूपन कहते हैं, लेकिन आधिकारिक भाषा में इसे 'टोकन' या 'अपॉइंटमेंट स्लिप' कहा जाता है. खासतौर पर दिल्ली में ट्रैफिक चालान निपटाने के लिए पहले से ऑनलाइन टोकन बनवाना जरूरी होता है. बिना टोकन के अदालत परिसर में सीधे पहुंचकर सुनवाई कराना आमतौर पर संभव नहीं है.

ट्रैफिक चालान के लिए टोकन कहां और कैसे बनता है?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर लोक अदालत का अलग लिंक होता है. वहां अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर डालना होता है, जिसके बाद उस वाहन के निपटाने योग्य चालान दिख जाते हैं. आप जिन चालानों का निपटारा कराना चाहते हैं, उन्हें चुनें, फिर अपनी सुविधा से कोर्ट परिसर और समय का स्लॉट तय करें. सबमिट करने के बाद आपका टोकन बन जाता है, जिसे डाउनलोड करके प्रिंट निकालना होता है. बता दें 25 अक्टूबर को लगने वाली लोक अदालत के लिए 19 अक्टूबर को कूपन बनवाने होंगे. 

कौन-से चालान लोक अदालत में निपट सकते हैं?

सिर्फ छोटे ट्रैफिक उल्लंघनों वाले चालान, जैसे हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, ओवरस्पीडिंग या सिग्नल तोड़ने के लंबित चालान लोक अदालतों में निपट सकते हैं. वहीं, शराब पीकर गाड़ी चलाने या हिट एंड रन जैसे गंभीर मामलों का निपटारा इन अदालतों में नहीं होता है. केवल उन चालानों का निपटारा किया जाएगा, जो 30 जून 2026 या उससे पहले कटे हैं.

लोक अदालत में अदालत परिसर कौन-से होते हैं और समय क्या रहता है?

दिल्ली में आम तौर पर कड़कड़डूमा, साकेत, पटियाला हाउस, राउज एवेन्यू, द्वारका, रोहिणी और तीस हजारी कोर्ट परिसरों में यह आयोजन होता है. सुनवाई सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलती है. आप इनमें से अपनी सुविधा के हिसाब से किसी भी परिसर का चुनाव कर सकते हैं. निर्धारित तिथि को हर जिला अदालत में ये लगाई जाती है.  

अदालत में जाकर क्या करना होगा?

अपने साथ चालान की प्रिंट कॉपी और टोकन नंबर वाला अपॉइंटमेंट लेटर जरूर ले जाएं. सुनवाई जज के सामने होती है. मामले के हिसाब से जुर्माना कम किया जा सकता है या कुछ मामलों में माफ भी हो सकता है. अगर जुर्माना तय होता है तो उसे मौके पर ही भरना होता है जिसके बाद आपका चालान सिस्टम से हट जाता है.

🚨 25 October ko National Lok Adalat lagne wali hai! ⚖️
Aapka traffic challan pending hai ya koi bank loan, cheque bounce ya civil dispute chal raha hai? Toh Lok Adalat mein settlement ka option check kar sakte hain! ✅
Lok Adalat mein eligible cases ko mutual consent se settle… pic.twitter.com/QmIl5o6aBl

— Mohini Maheshwari (@mohinimaheshwa) October 13, 2026

सिर्फ चालान ही नहीं और कौन-से मामले लोक अदालत में निपटते हैं?

लोक अदालत में नौकरी और पेंशन से जुड़े विवाद, बैंक लोन, बिजली बिल, यातायात चालान और वैवाहिक विवाद जैसे कई तरह के मामलों का आपसी सहमति से निपटारा हो सकता है. इन मामलों में किसी 'कूपन' की जरूरत नहीं होती. इसके लिए संबंधित अदालत या अपने जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करके मामला लोक अदालत में लगवाया जा सकता है.

लोक अदालत में फैसला किन शर्तों पर होता है?

लोक अदालत में मामले का समाधान तभी हो सकता है जब दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हों. यह वैधानिक व्यवस्था है और लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987 के तहत आयोजित की जाती है.

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