न मुनीर, न पीएम, न राष्ट्रपति... पाकिस्तान में सबसे ज्यादा सैलरी पाता है ये सरकारी अफसर

Published on 17 जुल॰ 2026

न मुनीर, न पीएम, न राष्ट्रपति... पाकिस्तान में सबसे ज्यादा सैलरी पाता है ये सरकारी अफसर

इस अधिकार है सबसे ज्यादा वेतन

पाकिस्तान आर्थिक संकट, IMF के कर्ज और सरकारी खर्चों में कटौती की वजह से लगातार चर्चा में रहता है. ऐसे माहौल में देश के शीर्ष संवैधानिक और सरकारी पदों पर मिलने वाले वेतन को लेकर सामने आए नए रिकॉर्ड ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है. रिकॉर्ड के मुताबिक, पाकिस्तान के वर्तमान महालेखा परीक्षक मकबूल अहमद गोंडल का वार्षिक वेतन 97,68,240 पाकिस्तानी रुपये है. यानी उन्हें हर महीने 8.14 लाख रुपये (मूल वेतन 7.72 लाख रुपये, अन्य भत्ते अलग) मिलते हैं. यह वेतन पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के वेतन से काफी अधिक है. हालांकि, पाकिस्तान के राष्ट्रपति का निर्धारित वेतन इससे ज्यादा है, लेकिन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अपना वेतन नहीं लेने का फैसला किया है. ऐसे में नियमित रूप से सबसे अधिक वेतन पाने वाले सरकारी अधिकारियों में महालेखा परीक्षक सबसे ऊपर नजर आते हैं.

सामने आए आधिकारिक वेतन रिकॉर्ड के अनुसार, पाकिस्तान के महालेखा परीक्षक का मासिक मूल वेतन 7,72,780 पाकिस्तानी रुपये है. विभिन्न भत्तों को जोड़ने पर यह राशि करीब 8,14,020 रुपये प्रति माह पहुंच जाती है. सालाना आधार पर यह वेतन 97,68,240 रुपये है. वर्तमान में इस पद पर मकबूल अहमद गोंडल कार्यरत हैं. महालेखा परीक्षक पाकिस्तान के सरकारी खर्चों का ऑडिट करने और संसद के सामने वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला संवैधानिक पद है. इसलिए इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक कार्यालयों में गिना जाता है.

Pm Se Bhi Jyada Hai Salary

महालेखा परीक्षक का काम क्या होता है?

महालेखा परीक्षक का काम सिर्फ सरकारी खातों की जांच करना नहीं है. यह कार्यालय केंद्र सरकार, मंत्रालयों, सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक संस्थानों के खर्चों का ऑडिट करता है. इसके अलावा टैक्स से जुटाए गए पैसे का उपयोग नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं, इसकी भी जांच करता है. ऑडिट रिपोर्ट संसद में पेश की जाती है, जिसके आधार पर सरकारी विभागों से जवाब मांगा जाता है.

राष्ट्रपति क्यों नहीं लेते वेतन?

मार्च 2024 में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने घोषणा की थी कि वह अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति का वेतन नहीं लेंगे. राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा था कि देश की आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला किया है. उनका कहना था कि यह कदम वित्तीय अनुशासन और मितव्ययिता का संदेश देने के लिए उठाया गया है.

आर्थिक संकट के बीच बढ़ी चर्चा

पाकिस्तान लंबे समय से महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और IMF कार्यक्रम जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे समय में सरकारी अधिकारियों के वेतन को लेकर अक्सर सार्वजनिक बहस होती रहती है. राष्ट्रपति द्वारा वेतन छोड़ने और दूसरी ओर महालेखा परीक्षक के उच्च वेतन के आंकड़े सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि महालेखा परीक्षक का वेतन संवैधानिक व्यवस्था और सेवा नियमों के तहत तय होता है तथा उसका उद्देश्य इस स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता बनाए रखना है.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

Read More

google button