'हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए इजरायल की मदद ले रियाद', ट्रंप ने सऊदी अरब को दी सलाह

Published on 17 अक्टू॰ 2026

'हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए इजरायल की मदद ले रियाद', ट्रंप ने सऊदी अरब को दी सलाह

Middle East Tension: मध्य पूर्व के देशों में अभी भी भारी तनाव बना हुआ है. हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को सलाह दी है कि वह हूतियों से निपटने के लिए इजरायल की मदद ले सकता है.

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Middle East Tension: मध्य पूर्व के देशों में अभी भी भारी तनाव बना हुआ है. हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को सलाह दी है कि वह हूतियों से निपटने के लिए इजरायल की मदद ले सकता है.

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हूतियों से निपटने के लिए ट्रंप की सऊदी अरब को सलाह Photograph: (X@WhitheHouse/Wikipedia)

Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए सऊदी अरब को सलाह दी है कि वह इसके लिए इजरायल की मदद ले. ट्रंप ने इजरायल के समर्थन को सऊदी अरब के लिए फायदेमंद बताते हुए उम्मीद जताई कि रियाद भविष्य में अब्राहम समझौते का हिस्सा बन सकता है. ट्रंप के इस बयान को इजरायल और सऊदी अरब के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

सऊदी अरब के लिए मददगार साबित हो सकता है इजरायल- ट्रंप

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या सऊदी अरब को हूतियों के खिलाफ इजरायल की ओर से दिए गए सहयोग के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए. इस पर उन्होंने सहमति जताते हुए कहा कि इजरायल सऊदी अरब के लिए काफी मददगार साबित हुआ है. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि सऊदी अरब के अब्राहम समझौते में शामिल होने की संभावना पहले के मुकाबले बढ़ सकती है. साल 2020 में शुरू हुए इन समझौतों का उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना था.

सऊदी अरब और इजरायल के रिश्तों पर क्या बोले ट्रंप?

सऊदी अरब के साथ अब्राहम समझौते को लेकर बातचीत दोबारा शुरू होने के सवाल पर ट्रंप ने सकारात्मक जवाब दिया. उन्होंने कहा कि समझौते में सऊदी अरब की भागीदारी की संभावना शायद पहले से कहीं अधिक है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में से एक बताया. हालांकि, सऊदी अरब ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के लिए लंबे समय से एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है.

रियाद का कहना है कि फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन की दिशा में स्पष्ट और विश्वसनीय रास्ता तय किए बिना इजरायल के साथ सामान्य संबंधों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती. बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से पहले दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी. लेकिन इसके बाद गाजा में युद्ध और फिलिस्तीनी मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय हालात बदल गए.

नेतन्याहू का दावा, कई देश मांग रहे इजरायल से मदद

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी क्षेत्र में अपने देश की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. मंगलवार को इजरायली मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या सऊदी अरब ने इजरायल से सहायता मांगी है. 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने जवाब दिया कि मध्य पूर्व में शायद ही कोई ऐसा देश होगा, जो इजरायल से मदद नहीं मांग रहा हो. हालांकि, उनके बयान से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सऊदी अरब ने औपचारिक रूप से किसी खास सैन्य सहायता का अनुरोध किया है या नहीं.

हूती हमलों में भूमिका से ईरान का इनकार

इस बीच, ईरान ने सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों में अपनी भूमिका होने के आरोपों को खारिज कर दिया. ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक, तेहरान ने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने में मदद करने की इच्छा भी जताई है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि सभी पक्षों की ओर से अनुरोध किए जाने पर ईरान तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है.

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बघाई ने कहा कि पिछले 12 सालों के अनुभव से स्पष्ट है कि विदेशी हस्तक्षेप और नाकेबंदी से यमन की समस्या का समाधान नहीं निकल सकता. उनके मुताबिक, यमन के लोगों ने ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से लागू की गई नाकेबंदी का लंबे समय तक सामना किया. उन्होंने क्षेत्रीय देशों से मौजूदा हालात को समाप्त करने के लिए प्रयास करने की अपील की.

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