भोपाल, 22 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 21 जुलाई 2026 को पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स और उसके कारण पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगे पेट्रोल-डीजल का मुद्दा सदन में गूँजा। विधायक हेमंत सत्यदेव कटारे द्वारा पूछे गए प्रश्न क्रमांक 486 के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में ईंधन की कीमतों पर टैक्स कटौती की उसकी कोई योजना नहीं है।
पेट्रोल-डीजल पर वर्तमान टैक्स का गणित
वाणिज्यिक कर विभाग के मंत्री एवं मध्य प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने सदन में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले करों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया:
- वर्तमान में पेट्रोल पर 29% वैट (VAT), 2.50 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर और 1% उपकर (Cess) वसूला जा रहा है।
- डीजल पर 19% वैट, 1.50 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर और 1% उपकर प्रभावी है।
तीन महीने में 3600 करोड़ से अधिक की कमाई
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026) के दौरान ही राज्य सरकार को पेट्रोल-डीजल पर टैक्स और सेस के माध्यम से 3604.45 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि यद्यपि ईंधन की दरों में वृद्धि हुई है, लेकिन राज्य सरकार ने अपनी ओर से कर की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
पड़ोसी राज्यों से मुकाबले और राहत पर सरकार का जवाब
विधायक हेमंत कटारे ने सवाल उठाया था कि उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों में टैक्स कम होने के कारण सीमावर्ती जिलों के वाहन वहां से ईंधन खरीद रहे हैं, जिससे मध्य प्रदेश को वित्तीय नुकसान हो रहा है। उन्होंने जनता को राहत देने के लिए टैक्स कम करने की मांग की थी। इसके जवाब में उप मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि डीजल-पेट्रोल विक्रेता संगठनों की ओर से कर की दरें कम करने के लिए पत्र प्राप्त हुए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि "मध्य प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स कम करने के संबंध में कोई कार्यवाही प्रक्रियाधीन नहीं है" और कर की दरों में बदलाव करना एक नीतिगत निर्णय है।
निष्कर्ष
विधानसभा में विभागीय मंत्री के इस बयान से स्पष्ट हो गया कि, वह पेट्रोल एवं डीजल पर राज्य सरकार का टैक्स कम करने के मूड में नहीं है। इसका मतलब हुआ कि दूसरे राज्यों के बॉर्डर पर स्थित मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों की बिक्री अभी भी टैक्स के कारण प्रभावित होती रहेगी।
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