शनि के प्रकोप से बचने का अचूक मार्ग: साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति के लिए ऐसे करें संकटमोचन हनुमान जी की उपासना A surefire way to ward off the wrath of Saturn: Worship Lord Hanuman—the reliever of distress—in this manner to find relief from the effects of *Sade Sati* and *Dhaiya*.

Published on 25 जुल॰ 2026

शनि के प्रकोप से बचने का अचूक मार्ग: साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति के लिए ऐसे करें संकटमोचन हनुमान जी की उपासना

शनि के प्रकोप से बचने का अचूक मार्ग: साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति के लिए ऐसे करें संकटमोचन हनुमान जी की उपासना

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव (Shani Dev) को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना गया है। जब किसी जातक की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती (Shani Sadesati) या ढैय्या का प्रभाव शुरू होता है, तो जीवन में कई प्रकार की मानसिक, शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जगत के पालनहार भगवान श्री राम के परम भक्त संकटमोचन हनुमान जी की शरण में जाने मात्र से शनि का कुप्रभाव स्वतः शांत हो जाता है। हनुमान जी की पूजा करने वालों पर शनिदेव कभी भी कष्टकारी प्रभाव नहीं डालते, बल्कि उन्हें हर संकट से उबार लेते हैं। आइए जानते हैं कि शनि की साढ़ेसाती के दौरान हनुमान जी की पूजा किस विधि से करनी चाहिए और किन उपायों से जीवन के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं।

किन राशियों पर रहता है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव?

प्रत्येक समय चक्र में शनि की साढ़ेसाती एक साथ तीन अलग-अलग राशियों पर प्रभाव डालती है। किसी भी राशि के लिए यह चक्र लगभग साढ़े सात वर्षों का होता है, जिसमें जन्म राशि से ठीक पहले, उस राशि पर और उसके बाद की राशि पर शनि का गोचर होता है। इसके अलावा जिन राशियों पर शनि की ढैय्या चल रही होती है, उन्हें भी जीवन के विभिन्न मोर्चों पर संघर्षों का सामना करना पड़ता है। यदि आपकी राशि पर भी शनि का ऐसा कोई प्रभाव चल रहा है, तो आपको नियमित रूप से हनुमान जी की आराधना को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लेना चाहिए, जिससे ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

हनुमान जी की उपासना की विशेष विधि और अचूक मंत्र

शनि के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और हनुमान जी के मंदिर या घर के पूजा घर में चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। उन्हें सिंदूर, चोला और चमेली के तेल का अर्पण करना बेहद फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान हनुमान जी के चमत्कारी मंत्रों का सच्चे मन से जाप करना चाहिए। 'ॐ हं हनुमते नमः' या 'राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे सहस्रनाम त तुल्यं राम नाम वरानने' मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और शनि का भय समाप्त हो जाता है।

हनुमान चालीसा का पाठ और अन्य अचूक उपाय

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) में तुलसीदास जी ने लिखा है "बाल समय रवि भयो लहि यो ताहीं, मधुर फल जानि हनुमान जी ने भोजन किया था" और "संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा"। रोजाना सुबह और शाम के समय कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं। इसके अलावा शनिवार के दिन गरीबों को दान देना, सुंदरकांड का पाठ करना और हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाना भी अत्यंत लाभकारी उपाय माना गया है। इन छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी उपायों से न सिर्फ शनिदेव प्रसन्न होते हैं, बल्कि जीवन में आ रही सभी बाधाएं भी हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।