नासिक वासियों ने ली राहत की सांस: शनिवार दोपहर कम हुआ गोदावरी का जलस्तर, अब सफाई और नुकसान के आकलन की चुनौती
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Written By:
अंकिता पटेल
Updated On: Jul 26, 2026 | 10:28 AM IST
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सार
Nashik Flood Damage: नासिक में गोदावरी नदी का जलस्तर घटने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। बाढ़ का पानी उतरते ही व्यापारी और स्थानीय नागरिक दुकानों से गाद, कीचड़ और कचरा साफ करने में जुट गए।

नासिक बाढ़, गोदावरी नदी,(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Nashik Godavari Flood Water Level Recedes: नासिक पिछले चार-पांच दिनों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण गोदावरी नदी में आई भीषण बाढ़ का कहर शनिवार, 25 जुलाई को सुबह 11 से 12 बजे के बीच आखिरकार कम हो गया।
नदी का जलस्तर घटने से नासिक के नागरिकों ने भले ही राहत की सांस ली हो, लेकिन यह बाढ़ अपने पीछे तबाही का ऐसा मंजर छोड़ गई है, जिसने व्यापारियों और तटीय इलाकों के निवासियों की कमर तोड़ दी है।
पानी उतरते ही कारोबारी और स्थानीय नागरिक अपनी दुकानों में पहुंचे और वहां जमा हुई मोटी गाद, कीचड़ तथा कचरे को साफ करने के साथ-साथ अपने बचे-खुचे सामान का जायजा लेने में जुट गए हैं।
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गोदाघाट पर घटा जलस्तर, लोगों ने ली राहत की सांस
नदी का जलस्तर तेजी से नीचे आने के कारण गोदाघाट क्षेत्र के निवासियों और दुकानदारों ने काफी हद तक सुकून महसूस किया है-कपालेश्वर मंदिरः शुक्रवार को जहां बाढ़ का पानी सीधे मंदिर की सीढ़ियों तक जा पहुंचा था, वहीं शनिवार को पानी घटकर केवल कपालेश्वर मंदिर पुलिस चौकी के आसपास तक ही सीमित रह गया।
दुतोंड्या मारुति प्रतिमा
शुक्रवार तक जिस पानी ने दुतोंड्या मारुति की ठुड्डी और कई जगहों पर सीधे सिर तक डुबो दिया था, उसका स्तर शनिवार को घटकर केवल कोहनी तक ही आ गया। प्रशासन एक्टिव मोड में, युद्धस्तर पर शुरू हुआ पंचनामा बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में आते ही प्रशासनिक अमला पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करने और उसका पंचनामा करने के लिए राजस्व विभाग की विशेष टीमों को सुबह 11 बजे से ही मैदान में उतार दिया गया है। मौके पर पहुंचकर नुकसान का ब्योरा दर्ज करने वाली प्रशासनिक टीम में मखमलाबाद के तलाठी राहुल देशमुख, नासिक 1 के तलाठी सागर शिर्के और नासिक 4 के तलाठी सागर शेलार सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं, जो घर-घर और दुकान-दुकान जाकर नुकसान का जायजा ले रहे हैं।
250 से अधिक दुकानें और मकान प्रभावित
बाढ़ का पानी उतरने के बाद सामने आई तबाही की तस्वीरों ने प्रभावितों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नारोशंकर मंदिर के पास स्थित विभिन्न दुकानों में अचानक बाढ़ का पानी घुस जाने से व्यापारियों का लाखों रुपये का कीमती सामान गीला होकर पूरी तरह खराब हो गया।
इसके अलावा, सांडव्यावरच्या देवी मंदिर के ठीक सामने स्थित ‘नायेकर शूज कॉर्नर’ नामक दुकान में पानी भरने से वहां रखे जूते-चप्पल और अन्य व्यावसायिक सामान समेत करीब 3 लाख रुपये का स्टॉक पानी में बह गया या पूरी तरह बर्बाद हो गया।
एक शुरुआती और प्राथमिक अनुमान के मुताबिक, शहर के तटीय इलाकों में स्थित 200 से 250 दुकाने और कई रिहायशी मकान बाढ़ की चपेट में आने से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे कुल आर्थिक नुकसान का आंकड़ा लगभग 3 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
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पानी इतनी तेजी से और अचानक दुकान में घुसेगा, इसका हमें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। दुकान में रखे बूट, चप्पल और अन्य करीब 3 से 3.5 लाख रुपये का पूरा माल बाढ़ के पानी में बह गया और खराब हो गया।
हालांकि दुकान से कीचड़ हटाना और सफाई का काम जारी है, लेकिन हमारा जो भारी नुकसान हुआ है, वह आसानी से पूरा होने वाला नहीं है। हमारी शासन-प्रशासन से यही उम्मीद है कि वे जल्द से जल्द पंचनामा पूरा कर हमें उचित वित्तीय सहायता प्रदान करें।
-व्यवसायी, नाथेकर शूज कॉर्नर, प्रमोद नाथेकर
सुबह 11 बजे से ही हमारी प्रशासनिक टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में पंचनामे के लिए पूरी तरह मुस्तैद होकर काम कर रही है। दुकानदारों और स्थानीय निवासियों का जो भी नुकसान हुआ है, उसका बहुत ही निष्पक्षता के साथ आकलन किया जा रहा है।
यह विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि कोई भी वास्तविक प्रभावित व्यक्ति पंचनामा प्रक्रिया से वंचित न रह जाए, नुकसान की यह रिपोर्ट जल्द ही तैयार करके वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
-नासिक,मंडल अधिकारी, नीलकंठ उगले
