Power Generation Boost: यूपी में कम हुआ बिजली संकट तीन दिन में 3300 मेगावाट बढ़ा उत्पादन; रात का बिजली संकट लगभग खत्म - Haribhoomi

Published on 19 सित॰ 2026

उत्तर प्रदेश में पिछले 15 दिनों से जारी रात के बिजली संकट से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। राज्य की कई तापीय विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन बहाल होने से महज तीन दिनों के भीतर 3300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हुई है।

yogi govt power distribution

प्रदेश में कुल बिजली आपूर्ति अब 27,163 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे राज्य के सभी हिस्सों में पावर रोस्टर के अनुसार निर्बाध बिजली सप्लाई की राह आसान हो गई है।

  • Published: 19 Sep 2026, 01:51 PM IST
  • Last Updated: 19 Sep 2026, 01:51 PM IST

उत्तर प्रदेश में कोयले की कमी, थर्मल पावर स्टेशनों में तकनीकी खराबी और नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के चलते पिछले दो हफ्तों से रात के समय बिजली का गंभीर संकट बना हुआ था। हालांकि, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के त्वरित प्रबंधन और बंद पड़ी तापीय इकाइयों के पुनः चालू होने से स्थिति में तेजी से सुधार आया है।

प्रदेश में कुल बिजली आपूर्ति अब 27,163 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे राज्य के सभी हिस्सों में पावर रोस्टर के अनुसार निर्बाध बिजली सप्लाई की राह आसान हो गई है।

घाटमपुर और ओबरा इकाइयों से शुरू हुआ उत्पादन
बिजली संकट से उबरने में शुक्रवार को चालू हुई दो प्रमुख तापीय परियोजनाओं ने बड़ी भूमिका निभाई है। कानपुर स्थित 660 मेगावाट क्षमता की घाटमपुर परियोजना और 200 मेगावाट क्षमता की ओबरा थर्मल पावर प्लांट की इकाइयों से फिर से उत्पादन शुरू हो गया है।

इन दोनों यूनिट्स से अकेले 860 मेगावाट बिजली ग्रिड को मिलने लगी है। इसके अतिरिक्त, अन्य बंद पड़ी इकाइयों के धीरे-धीरे एक्टिव होने से पिछले 72 घंटों में ग्रिड को कुल 3300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिली है।

बैंकिंग प्रणाली से मिली 2400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली
स्थानीय उत्पादन में वृद्धि के अलावा पावर कॉरपोरेशन ने अन्य राज्यों के साथ बिजली का आदान-प्रदान करके भी बिजली आपूर्ति को स्थिर किया है। अंतर-राज्यीय बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से उत्तर प्रदेश को रोजाना लगभग 2400 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है।

यद्यपि रात के समय नेशनल पावर एक्सचेंज में केवल 200 से 400 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है, फिर भी बैंकिंग और घरेलू उत्पादन के सही तालमेल ने प्रदेश में ब्लैकआउट की आशंका को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

दिन में शून्य कटौती, रात में सिर्फ आधे घंटे की लोड शेडिंग
अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) और पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल के अनुसार, आपूर्ति व्यवस्था में सुधार आने के बाद पूरे प्रदेश में दिन के समय कटौती पूरी तरह खत्म कर दी गई है।

ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में, जहां पहले रात में घंटों कटौती होती थी, अब औसतन केवल 28 से 30 मिनट की ही लोड शेडिंग की जा रही है। उन्होंने फील्ड अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि कहीं से भी बिजली की व्यवस्था करके शासन द्वारा तय रोस्टर के अनुसार ही निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

सितंबर अंत तक 2000 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य
आने वाले दिनों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था और अधिक मजबूत होने वाली है। 300 मेगावाट की रोजा पावर प्लांट की यूनिट अगले एक से दो दिनों में उत्पादन शुरू कर देगी।

इसके साथ ही, इस महीने के अंत तक ओबरा, हरदुआगंज और मेजा तापीय परियोजनाओं की नई और मरम्मत की गई इकाइयों से लगभग 2000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगेगी। मौसम में बदलाव और तापमान में गिरावट के साथ ही अगले सप्ताह तक प्रदेश भर में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।