Pregnancy Diabetes: क्या प्रेगनेंसी से डायबिटीज होती है? ऐसा क्यों होता है? एक्सपर्ट से जानें

Published on 5 अग॰ 2026

Pregnancy Diabetes: क्या प्रेगनेंसी से डायबिटीज होती है? ऐसा क्यों होता है? एक्सपर्ट से जानें

प्रेगनेंसी में क्यों हो जाती है डायबिटीज?

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था में डायबिटीज हो सकती है. इसे जेस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं. जेस्टेशनल डायबिटीज गर्भवती महिलाओं में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने की स्थिति है. यह उन महिलाओं को भी हो सकता है जिन्हें पहले कभी डायबिटीज नहीं थी. यह तब होता है जब प्लेसेंटा से बनने वाले हार्मोन के कारण शरीर का इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता. इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं, जिससे शरीर को ज्यादा इंसुलिन की ज़रूरत पड़ती है.

गर्भवती महिलाओं को दिन में लगभग तीन से चार बार इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है. अगर इंसुलिन की यह जरूरत पूरी नहीं होती है, तो मां के शरीर में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है, जिससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है.

आइए, जेस्टेशनल डायबिटीज से जुड़े ब्लड शुगर के सही लेवल, खान-पान से जुड़ी जरूरी बातों और सावधानियों के बारे में जानें.

प्रेग्नेंसी में ब्लड शुगर लेवल कितना होना चाहिए?

फास्टिंग (खाली पेट): 6090 mg/dL खाना खाने से पहले: 60105 mg/dL खाना खाने के 1 घंटे बाद: 130140 mg/dL खाना खाने के 2 घंटे बाद: 120 mg/dL से कम सुबह 2:00 बजे से 6:00 बजे के बीच: 6090 mg/dL

जेस्टेशनल डायबिटीज के लक्षण और पहचान

जेस्टेशनल डायबिटीज में अक्सर कोई खास लक्षण या चेतावनी वाले संकेत नहीं दिखते. इसीलिए स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना बहुत ज़रूरी है. कभी-कभी, बहुत ज़्यादा प्यास लगना या बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षण इस स्थिति का संकेत हो सकते हैं. जेस्टेशनल डायबिटीज की पहचान ब्लड टेस्ट से की जाती है.

ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन, या हीमोग्लोबिन ए1सी (Glycosylated hemoglobin or hemoglobin A1c) भी एक तरह का टेस्ट है. इस टेस्ट का इस्तेमाल डायबिटीज के मरीजों में लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल की निगरानी के लिए किया जाता है. हीमोग्लोबिन A1c लेवल पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को मापता है.

जेस्टेशनल डायबिटीज के कारणों में शामिल हैं:

ज्यादा वजन या मोटापा होना.

फिजिकली एक्टिव न होना

प्री-डायबिटीक होना.

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जैसी हार्मोन से जुड़ी समस्या होना.

माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीड होना.

9 पाउंड (4.1 किलोग्राम) से ज्यादा वजन वाले बच्चे को जन्म देना.

खानपान में बदलाव

आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा कहती हैं कि ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें/फलियां खाएं. इसके अलावा रिफाइंड चीनी, प्रोसेस किए हुए खाद्य पदार्थ और भारी, तैलीय और मीठे खाद्य पदार्थों से बचिए. कड़वे, कसैले और तीखे स्वाद वाले खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें.

लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

नियमित व्यायाम, जैसे कि टहलना, योग और हल्की स्ट्रेचिंग.

योग, ध्यान और गहरी सांस लेने के व्यायाम नर्वस सिस्टम को बैलेंस करते हैं.

पर्याप्त आराम और नींद जरूरी लें.

डिटॉक्सिफिकेशन थेरेपी- आयुर्वेद कई तरह की डिटॉक्सिफिकेशन थेरेपी देता है, जिन्हें सामूहिक रूप से पंचकर्म कहा जाता है. ये थेरेपी किसी योग्य प्रैक्टिशनर की देखरेख में जेस्टेशनल डायबिटीज़ को मैनेज करने में फायदेमंद हो सकती हैं. ये थेरेपी शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालने, पाचन और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने और दोषों में संतुलन बहाल करने में मदद करती हैं.

मनीष रायसवाल

मनीष रायसवाल

मनीष रायसवाल वर्तमान में टीवी9 डिजिटल में लाइफस्टाइल बीट पर बतौर टीम लीड काम कर रहे हैं. मनीष के करियर की शुरुआत साल 2015 से इंडिया न्यूज के डिजिटल प्लेटफार्म Inkhabar के साथ बतौर सब एडिटर हुई थी. अलग-अलग पड़ावों को पार करते हुए इन्होंने इंडिया न्यूज, अमर उजाला और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. 2009 से 2012 के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया से बीए ऑनर्स मास मीडिया में ग्रेजुएशन और 2012-13 के बीच देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (दिल्ली) से डिप्लोमा करने के बाद मनीष पत्रकारिता से जुड़े हैं. मनीष लाइफस्टाइल के अलावा, हेल्थ, सोशल, वुमेन और बाल विकास और ट्रैवलिंग जैसे विषयों पर लिखना पसंद करते हैं. लाइफस्टाइल से जुड़े ज्यादातर टॉपिक्स पर इन्हें नई चीजें सीखने का शौक है.

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