Pregnancy Tips : सिर्फ उम्र नहीं, ब्लड ग्रुप भी डाल सकता है आपकी फर्टिलिटी पर सीधा असर

Published on 1 अक्टू॰ 2026

मेडिकल रिसर्च बताती है कि ब्लड ग्रुप का असर महिलाओं के एग रिजर्व और फर्टिलिटी हार्मोन पर पड़ सकता है। खासकर 'O' ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं को फैमिली प्लानिंग के दौरान अपनी सेहत और समय का सही ध्यान रखना चाहिए।

Pregnancy Tips : फैमिली प्लानिंग की शुरुआत करते समय अक्सर महिलाएं अपनी डाइट, वजन और पीरियड्स की नियमितता पर ध्यान देती हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महिला का ब्लड ग्रुप भी कंसीव करने के सफर में एक भूमिका निभा सकता है।

हाल के कुछ मेडिकल अध्ययनों में सामने आया है कि ब्लड ग्रुप का सीधा संबंध महिलाओं के एग रिजर्व यानी शरीर में मौजूद अंडों की संख्या और क्वालिटी से हो सकता है।

क्या कहती है मेडिकल रिसर्च?

फर्टिलिटी और ब्लड ग्रुप के कनेक्शन को समझने के लिए लगभग 560 महिलाओं पर एक अध्ययन किया गया, जिनकी औसत उम्र 32 से 35 वर्ष के बीच थी। इस शोध के दौरान सभी महिलाओं के हार्मोनल लेवल और ओवेरियन रिजर्व की जांच की गई।

जांच में सामने आया कि ‘O’ ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं में FSH (फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन) का स्तर अन्य ब्लड ग्रुप की तुलना में थोड़ा ज्यादा देखा गया। मेडिकल साइंस में हाई FSH लेवल इस बात का संकेत माना जाता है कि शरीर में अंडों की संख्या (ओवेरियन रिजर्व) सामान्य से कम हो सकती है।

क्या ‘O’ ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं को डरने की जरूरत है?

इसका सीधा जवाब है—बिल्कुल नहीं। रिसर्च यह जरूर बताती है कि ‘O’ ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं में एग रिजर्व तेजी से कम हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे प्राकृतिक रूप से मां नहीं बन सकतीं।

ब्लड ग्रुप केवल एक संकेत हो सकता है, यह बांझपन (इनफर्टिलिटी) का कोई तय पैमाना नहीं है। लाखों महिलाएं जिनका ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव या O नेगेटिव है, वे बिना किसी परेशानी के स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं।

प्रेग्नेंसी प्लानिंग के लिए जरूरी सावधानियां

अगर आपका ब्लड ग्रुप ‘O’ है और आप आने वाले समय में परिवार बढ़ाने की सोच रही हैं, तो इन बातों को ध्यान में रखना फायदेमंद रहेगा:

सही उम्र में प्लानिंग: बढ़ती उम्र के साथ हर महिला के एग्स की संख्या कम होती है। O ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं के लिए बेहतर है कि वे 30 से 35 की उम्र के बाद फैमिली प्लानिंग को ज्यादा लंबा न टालें।

हार्मोनल चेकअप: अगर 6 से 8 महीने तक कोशिश करने के बाद भी कंसीव करने में दिक्कत आ रही है, तो डॉक्टर से मिलकर AMH (एंटी-म्युलेरियन हार्मोन) और FSH टेस्ट करवाएं। इससे आपके एग रिजर्व की सही स्थिति पता चल जाती है।

हेल्दी लाइफस्टाइल: अंडों की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने के लिए हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी लें। स्मोकिंग, स्ट्रेस और अनियमित दिनचर्या से दूरी बनाएं।

कंसीव करने में सिर्फ ब्लड ग्रुप ही नहीं, बल्कि पार्टनर का स्पर्म काउंट, फैलोपियन ट्यूब की स्थिति और गर्भाशय का स्वास्थ्य भी उतना ही मायने रखता है। इसलिए किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले हमेशा फर्टिलिटी एक्सपर्ट या गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें।