सरकारी मुआवजे से गोल्ड खरीदा, PWD इंजीनियर को सजा: मोहाली कोर्ट का फैसला, 50 हजार जुर्माना भी ठोका, 2013 में दर्ज हुआ था केस - Mohali News

Published on 12 अग॰ 2026

मोहाली की स्पेशल कोर्ट ने सरकारी रकम के गबन के मामले में PWD (B&R), मानसा के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जोगिंदर सिंह को दोषी करार देते हुए 3 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है।

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जुर्माना नहीं भरने पर उसे 30 दिन की अतिरिक्त कठोर कैद भुगतनी होगी। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी ने सरकारी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के बाद निजी खाते में पहुंचाया और उसका इस्तेमाल निजी खर्च तथा सोना खरीदने में किया।

जोगिंदर सिंह के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा में FIR दर्ज हुई थी। मामले में उस पर IPC की धारा 409, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी। हालांकि सुनवाई के बाद कोर्ट ने धारा 409 IPC में दोषी माना, जबकि धारा 420 IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(d) सहपठित 13(2) के आरोप से बरी कर दिया। जमीन अधिग्रहण का मुआवजा सरकारी खाते में जमा होना था

मामला मानसा के गांव पेरू में PWD की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है। यह जमीन तलवंडी साबो थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थी। जमीन के मुआवजे के तौर पर 56.79 लाख रुपए का चेक लैंड एक्विजिशन कलेक्टर-कम-एडीसी, मानसा के खाते से जारी हुआ था। यह रकम PWD (B&R) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के सरकारी खाते में जमा हुई। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक यह पैसा सरकारी ट्रेजरी में जमा किया जाना था।

आरोप था कि जोगिंदर सिंह ने रकम सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय दिसंबर 2008 में करीब 56 लाख रुपए की FDR बनवा दी। बाद में दो डिमांड ड्राफ्ट रद्द होने से 2.07 लाख रुपए और खाते में आए। इन रकमों की कैश बुक में एंट्री नहीं की गई। ब्याज जुड़ने के बाद जून 2009 तक रकम बढ़कर 61.13 लाख रुपए हो गई।

एक सरकारी खाते से दूसरे खाते और फिर निजी खाते में पहुंचाई रकम

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार 15 जुलाई 2009 को 61.13 लाख रुपए दूसरे बैंक के एक सरकारी खाते में ट्रांसफर किए गए। अगले दिन इस रकम की भी FDR बना दी गई। इसे पहले 240 दिन के लिए रखा गया और बाद में इसकी अवधि बढ़ाई गई। अगस्त 2011 में FDR को समय से पहले भुनाया गया। उस समय ब्याज समेत रकम करीब 69.49 लाख रुपए हो चुकी थी।

इसके बाद 4.50 लाख रुपए नकद निकाले गए। करीब 64.90 लाख रुपए का चेक जोगिंदर सिंह और उसकी पत्नी कमलजीत कौर के नाम से चल रहे निजी HDFC बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए लेयरिंग करते हुए अंत में निजी खाते में पहुंचाया गया।

निजी खाते से 9.50-9.50 लाख रुपए की 3 बार निकासी

निजी खाते में रकम आने के बाद अक्टूबर 2011 में 3 बार 9.50-9.50 लाख रुपए निकाले गए। इसके बाद इसी खाते से सोना खरीदा गया। रिकॉर्ड के मुताबिक 20 अक्टूबर को 400 ग्राम और 850 ग्राम सोना खरीदा गया। अगले दिन भी अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए गोल्ड बिस्किट खरीदे गए।

कोर्ट में बैंक रिकॉर्ड के जरिए यह भी सामने आया कि 21 अक्टूबर, 2011 को 500 ग्राम, 250 ग्राम, 400 ग्राम और 600 ग्राम सोने की खरीद के भुगतान इसी निजी खाते से किए गए थे। इन खरीद से संबंधित बैंक रिकॉर्ड, इनवॉयस और फॉर्म कोर्ट के सामने पेश किए गए।