UPI Charge Rule: दुकान पर लगे QR से मिला ₹100000 का पेमेंट, तो मर्चेंट को देना होगा MDR? जान लें नियम

Published on 16 सित॰ 2026

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Modi Govt) ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (PSS) एक्ट-2007 में संशोधन किया है. सोमवार 14 सितंबर 2026 को इस फ्रेमवर्क के तहत एक नोटिफिकेशन जारी किया गया और मंगलवार को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने इसे लेकर फुल सर्कुलर जारी कर दिया है. इसमें पूरी तस्वीर साफ की गई है कि किन पेमेंट्स पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होगा और किन्हें इससे छूट मिलेगी. 

15 अक्टूबर से लागू होगा UPI MDR
इस सरकार सर्कुलर में साफ किया गया है कि 2,000 रुपये तक के सभी पेमेंट जो यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के जरिए किए जाएंगे, उनपर किसी भी तरह का कोई MDR लागू नहीं होगा. वहीं इससे अधिक के पेमेंट पर 0.40% एमडीआर लागू होगा, जो P2M यानी पर्सन टू मर्चेंट लागू होगा. 

यहां ये समझ लें कि पर्सन टू मर्चेंट चार्ज का मतलब है कि ग्राहक जिस दुकान के क्यूआर पर यूपीआई पेमेंट करेगा, उस व्यापारी पर ये चार्ज लागू होगा, न कि ग्राहक पर. साफ शब्दों में कहें, तो इस संशोधन का सीधा असर उन व्यापारियों पर पड़ेगा, जो 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन एक्सेप्ट करते हैं. अब उन्हें ऐसे हर लेनदेन पर ये एमडीआर चार्ज देना होगा.

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गौरतलब है कि सरकार ने पहले ही एक लिमिट से ज्यादा के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर मामूली एमडीआर (MDR) के संकेत दिए थे. हालांकि, ये आश्वासन भी दिया था कि आम आदमी और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी पर्सन-टू-पर्सन यूपीआई लेनदेन पर इसका कोई असर नहीं होगा. अब इसे लागू करने के लिए अगले महीने की 15 तारीख (UPI MDR From 15 October) तय की गई है.

₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत  
जहां सरकार अब साफ बता दिया है कि अक्टूबर महीने से 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर कितना और किनपर एमडीआर लगेगा. तो वहीं नए संशोधन में कुछ खास सेक्टर्स के साथ ही छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत दी गई है.

खासतौर पर उन दुकानदारों के लिए जो अपनी दुकान पर लगे क्यूआर कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक ले पाते हैं. ऐसे व्यापारियों के लिए भी मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है. यानी उनसे कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा और वो मंथली इस लिमिट तक यूपीआई पेमेंट ले सकते हैं. 

सरकार का मानना है कि छोटे व्यापारियों को दी गई ये MDR छूट, अनौपचारिक स्ट्रीट वेंडर सेटअप को औपचारिक मर्चेंट एक्वायरिंग अकाउंट से जोड़ता है, जिससे असंगठित क्षेत्र में भी डिजिटल पेमेंट अपनाने को बढ़ावा मिलता है.

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