31 जुलाई तक राजस्थान में सामान्य से 11% कम बारिश, बड़े बांधों में घटा जलस्तर; मौसम विभाग ने अगस्त में भी सामान्य से कम बारिश के संकेत दिए।
Rajasthan Weather News
- Published: 01 Aug 2026, 08:50 AM IST
- Last Updated: 01 Aug 2026, 08:50 AM IST
राजस्थान में इस बार मानसून उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। जून और जुलाई का आधा से ज्यादा बारिश का सीजन बीत चुका है, लेकिन राज्य में अब तक सामान्य से 11 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका असर जलाशयों और खेती दोनों पर दिखाई देने लगा है।
23 जिलों में सामान्य से कम बारिश
31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 23 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। लगातार कम वर्षा के कारण कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। इसका असर पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
बड़े बांधों का जलस्तर बढ़ने की बजाय घटा
राज्य के प्रमुख जलाशयों बीसलपुर और जवाई बांध में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है। बारिश कम होने के कारण इन बांधों का जलस्तर बढ़ने के बजाय लगातार घट रहा है, जिससे आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ सकती है।
अगस्त में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार अगस्त में भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के संकेत हैं। खासकर अगस्त के दूसरे सप्ताह से जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जैसे पश्चिमी जिलों में मौसम अधिकतर साफ रहने की संभावना है।
कमजोर मानसून के पीछे क्या हैं वजहें?
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक हिमांशु शर्मा के अनुसार इस बार मानसून कई वैश्विक मौसमीय कारणों से प्रभावित हुआ है।
- प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) जैसी स्थिति का असर।
- इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) का न्यूट्रल रहना।
- बंगाल की खाड़ी में कम और कमजोर लो-प्रेशर सिस्टम बनना।
- पश्चिमी हवाओं का अधिक प्रभाव, जिससे पूर्वी नमी वाली हवाएं कमजोर पड़ गईं।
इन कारणों से दक्षिण-पश्चिम मानसून अपेक्षित मजबूती नहीं दिखा सका।
जून सामान्य रहा, जुलाई ने बिगाड़ा संतुलन
इस वर्ष जून में प्री-मानसून गतिविधियां अच्छी रहीं। जून में जहां औसतन 55 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार 55.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। हालांकि जुलाई में स्थिति बदल गई। सामान्यतः जुलाई में 161.4 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार केवल 137.3 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई, जिससे कुल मानसूनी आंकड़े प्रभावित हो गए।
किसानों और जल प्रबंधन पर बढ़ी चिंता
बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुवाई, सिंचाई और जल भंडारण पर साफ दिखाई देने लगा है। यदि अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रहती है, तो कई जिलों में कृषि और पेयजल की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल सभी की नजरें अगस्त में बनने वाले नए मौसम सिस्टम और संभावित बारिश पर टिकी हैं।