फेस्टिव सीजन में महंगाई की मार! RBI गवर्नर ने दी सबसे बड़ी चेतावनी, आखिर क्यों डरा रहे हैं आंकड़े

Published on 7 अक्टू॰ 2026

फेस्टिव सीजन में महंगाई की मार! RBI गवर्नर ने दी सबसे बड़ी चेतावनी, आखिर क्यों डरा रहे हैं आंकड़े

महंगाई को लेकर आरबीआई ने अपनी चिंता जाहिर की है और अनुमान भी बढ़ाया है.Image Credit source: Diptendu Dutta/NurPhoto via Getty Images)

सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट महंगाई का है. यही चिंता आरबीआई गवर्नर ने पॉलिसी रेट ऐलान के दौरान सामने रखी. आरबीआई के महंगाई अनुमान को देखें तो वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में देश की महंगाई 6 फीसदी रह सकती है. यही वो समय है, जब देश में फेस्टिव माहौल होता है. आरबीआई का मानना है कि इस फेस्टिव सीजन में आम लोगों को महंगाई से जंग लड़नी पड़ सकती है. जिसका असर दिसंबर के महीने में होने वाली बैठक में भी देखने को मिल सकता है और एक और रेट हाइक देखने को मिल सकती है. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतें और अलनीनो है. मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में आम लोगों की थाली में दन दोनों का असर और गहरा होता दिखाई दे सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर महंगाई को लेकर आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा है?

आरबीआई ने महंगाई के अनुमान को बढ़ाया

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है. जिसका सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की की कीमतों बढ़ोतरी, खाने-पीने की चीजों की कॉस्ट और रुपए की कमजोरी है. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) का यह नया आकलन ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई RBI के 4 फीसदी के टारगेट से ऊपर चली गई है, और साथ ही वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से फ्यूल और इंपोर्टेड महंगाई का नया जोखिम पैदा हो गया है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को MPC के फैसले की घोषणा की, जिसमें महंगाई का अनुमान पॉलिसी रिव्यू के सबसे अहम हिस्सों में से एक रहा. सेंट्रल बैंक ने दूसरी तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 4.9 फीसदी, दिसंबर तिमाही के लिए 6 फीसदी, चौथी तिमाही (Q4) के लिए 5.7 फीसदी और वित्त वर्ष 2028 की जून तिमाही के लिए 5.6 फीसदी लगाया है.

मल्होत्रा ​​ने कहा कि RBI के डिफ्यूजन इंडेक्स में कीमतों के दबाव का दायरा बढ़ता हुआ दिख रहा है. अगस्त में, 4% से ज्यादा महंगाई वाली चीजों का वेटेड शेयर बढ़कर लगभग 37 फीसदी हो गया. उन्होंने कहा कि महंगाई को लेकर निकट भविष्य का अनुमान बताता है कि कई वजहों से सप्लाई-साइड का दबाव बना रहेगा. इनमें मानसून की कमी, अल-नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव शामिल हैं. RBI ने अगस्त के अनुमान में वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था, जबकि पिछली समीक्षा में यह अनुमान 4.6 फीसदी था. केंद्रीय बैंक ने पहली तिमाही में महंगाई दर 4.2 फीसदी, दूसरी में 5.1 फीसदी, तीसरी में 5.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था.

RBI ने महंगाई को लेकर अपना अनुमान क्यों बदला?

जब से RBI ने 2025 में दरों में कटौती शुरू की, तब से महंगाई को लेकर अनुमान में तेजी से बदलाव आया है. अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82% हो गई, जो लगातार तीसरे महीने केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही. खाने-पीने की चीजो और ऊर्जा की कीमतें दबाव की मुख्य वजह बनकर उभरी हैं, जबकि अर्थशास्त्रियों ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने से व्यापक महंगाई पर असर पड़ने की संभावना भी जताई है.

कच्चा तेल सबसे बड़ा नया जोखिम बन गया है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. भारत के लिए, जो अपनी ज्यादातर कच्चे तेल की जरूरतें आयात करता है, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्टेशन, फ्यूल और प्रोडक्शन की कॉस्ट बढ़ सकती है और आखिरकार इसका असर ग्राहकों के लिए कीमतों पर पड़ सकता है. इस साल रुपया भी करीब 6 फीसदी कमजोर हुआ है. कमजोर करेंसी से कच्चे तेल समेत आयातित सामान रुपए के हिसाब से महंगे हो जाते हैं और इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.

अल नीनो भी RBI के लिए महंगाई बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है. इसका मानसून पर असर पड़ रहा है. भारत में अल नीनो का संबंध आमतौर पर कम या असमान बारिश से होता है, जिससे फसल उत्पादन और खाने-पीने की चीजों की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. फसल खराब होने से सब्जियों, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे खाने-पीने की चीजों की महंगाई और उसके बाद हेडलाइन CPI महंगाई बढ़ सकती है.

अर्थशास्त्रियों को क्या उम्मीद थी

उम्मीद थी कि अक्टूबर की पॉलिसी में महंगाई को लेकर RBI के नजरिए में बदलाव आएगा. 21 अर्थशास्त्रियों और बैंक अधिकारियों को उम्मीद थी कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 फीसदी कर दिया जाएगा. जबकि बेहद कम लोगों को उम्मीद थी कि RBI रेट को 5.25 फीसदी पर ही बनाए रखेगा. ये उम्मीदें अगस्त की पॉलिसी से काफी अलग थीं, जब MPC ने सर्वसम्मति से यथास्थिति बनाए रखने और अपना न्यूट्रल रुख बरकरार रखने का फैसला किया था.

रेट बढ़ाने की मांग कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, बढ़ती रिटेल महंगाई, खेती से कम पैदावार और अमेरिका के साथ ब्याज दरों के अंतर के कम होने जैसे कारणों से उठी थी. ब्रेंट क्रूड की कीमत RBI के पहले के वित्त वर्ष 2027 के 85 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी ऊपर चली गई थी, जबकि अगस्त में रिटेल महंगाई जुलाई के 4.45 फीसदी से बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई थी. अर्थशास्त्रियों को यह भी उम्मीद थी कि दिसंबर तिमाही में महंगाई RBI की 6 फीसदी की ऊपरी टॉलरेंस लिमिट से ऊपर चली जाएगी. उदाहरण के लिए, IDFC फर्स्ट बैंक को दिसंबर तिमाही में महंगाई 6.1 फीसदी रहने की उम्मीद थी, जबकि बंधन AMC को इसके 6 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान था.

SBI रिसर्च ने अधिक सतर्क रुख अपनाया था और अनुमान लगाया था कि CPI महंगाई सितंबर में करीब 5.65 फीसदी और अक्टूबर व नवंबर में 6.5 फीसदी से ऊपर रहेगी, और फिर 2027 की शुरुआत में 6 फीसदी से नीचे आ जाएगी. उसे यह भी उम्मीद थी कि RBI अक्टूबर की समीक्षा में अपने वित्त वर्ष 2027 के महंगाई अनुमान को 20 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा देगा.

दुनिया भर के सेंट्रल बैंक क्या कर रहे हैं?

RBI का यह कदम ऐसे समय में आया है जब विकसित बाजारों के बड़े सेंट्रल बैंकों ने महंगाई के नए जोखिमों को देखते हुए अपनी पॉलिसी को सख्त करना शुरू कर दिया है. US फेडरल रिजर्व ने सितंबर में अपनी पॉलिसी रेट को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 3.75 फीसदी-4 फीसदी कर दिया. उसने कहा कि महंगाई अभी भी ज्यादा है और इस कदम से उसे अपने 2 फीसदी के लक्ष्य तक वापस पहुंचने में मदद मिलेगी.

यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) ने भी सितंबर में अपनी तीन मुख्य दरों को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाया. उसने मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव की वजह से महंगाई के दबाव का हवाला दिया. उसने 2026 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 3 फीसदी कर दिया और कहा कि ऊर्जा की ज्यादा कीमतों के कारण 2027 की पहली छमाही तक महंगाई लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है. ECB को उम्मीद है कि महंगाई 2027 के आखिर तक ही अपने 2% के लक्ष्य के करीब वापस आएगी.

जापान ने भी इसी तरह का रुख अपनाया है. बैंक ऑफ जापान ने सितंबर में अपनी पॉलिसी रेट को 31 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया. गवर्नर काजुओ उएदा ने तब से इस बात पर ज़ोर दिया है कि अंडरलाइंग महंगाई (कोर महंगाई) को 2% के लक्ष्य के आसपास बनाए रखना ज़रूरी है. BOJ कच्चे माल की ज़्यादा लागत, कमज़ोर येन और जियोपॉलिटिकल तनाव के असर का भी आकलन कर रहा है, जबकि बाज़ार को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में और सख्ती की जाएगी.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

2008 से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता, दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

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