Published: Sunday, August 30, 2026, 19:04 [IST]
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्पेशल FCNR(B) विंडो का आज यानी सोमवार, 31 अगस्त 2026 को आखिरी दिन है। जबर्दस्त रिस्पॉन्स और भारी इनफ्लो को देखते हुए इसकी डेडलाइन पहले ही बढ़ा दी गई थी। ऐसे में सभी बैंक आज अपने तय कट-ऑफ टाइम पर बुकिंग बंद कर देंगे। कट-ऑफ टाइम से पहले बुक किए गए नए FCNR(B) डिपॉजिट ही डॉलर-रुपया स्वैप बेनिफिट के हकदार होंगे। अगर आप इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं, तो प्रोसेसिंग में होने वाली देरी से बचने के लिए जल्द से जल्द पैसे रेमिट कर दें।
ध्यान रखें कि यह विंडो सिर्फ नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए ही है। FEMA नियमों के मुताबिक, FCNR(B) और नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (NRE) खाते केवल एनआरआई ही खुलवा सकते हैं, भारत के निवासी नहीं। जब तक आपका एनआरआई स्टेटस बरकरार रहता है, तब तक FCNR(B) और NRE डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर भारत में कोई टैक्स नहीं लगता। जहां NRE टर्म डिपॉजिट के लिए कम से कम एक साल की अवधि जरूरी है, वहीं FCNR(B) में भी एक साल का लॉक-इन पीरियड लागू होता है।

FCNR बनाम NRE बनाम इंडिया एफडी बनाम डेट फंड: जानें किसमें कितना ब्याज और जोखिम
देश के दिग्गज बैंक फिलहाल इन स्कीमों पर काफी आकर्षक ब्याज दे रहे हैं। HDFC बैंक और ICICI बैंक 3 से 5 साल के USD FCNR(B) डिपॉजिट पर 6.25 फीसदी की दर से ब्याज की पेशकश कर रहे हैं। वहीं, फेडरल बैंक की 48 महीने वाली NRE एफडी पर 6.70 फीसदी का रेट मिल रहा है। आम भारतीय निवासियों के लिए HDFC बैंक की 2 से 3 साल वाली एफडी पर 6.45 फीसदी ब्याज है, जबकि अल्ट्रा-शॉर्ट डेट फंड्स की YTM (यिल्ड टू मैच्योरिटी) कैटगरी करीब 7.0 से 7.5 फीसदी के आसपास चल रही है।
| प्रोडक्ट | अनुमानित रिटर्न | NRIs के लिए भारत में टैक्स | लिक्विडिटी / जोखिम |
|---|---|---|---|
| USD FCNR(B) 3–5 साल | HDFC/ICICI में 6.25% | NRI स्टेटस रहने तक ब्याज टैक्स-फ्री | USD एसेट; 1 साल का लॉक-इन; समय से पहले निकासी पर पेनाल्टी |
| NRE FD 48 महीने | फेडरल बैंक में 6.70% | NRI स्टेटस रहने तक ब्याज टैक्स-फ्री | रुपये का करेंसी रिस्क; प्री-मैच्योर विड्रॉल पर अमूमन 1% पेनाल्टी |
| रेजिडेंट एफडी 2–3 साल | HDFC बैंक में 6.45% | पूरी तरह टैक्स योग्य (Taxable) | समय से पहले बंद करने पर पेनाल्टी लागू |
| अल्ट्रा-शॉर्ट डेट फंड्स | YTM ~7.0–7.5% | नई खरीद पर स्लैब के मुताबिक टैक्स | T+1 लिक्विडिटी; NAV में उतार-चढ़ाव संभव |
अगर आप रुपये के उतार-चढ़ाव के जोखिम और भारतीय टैक्स से बचकर डॉलर में कमाई करना चाहते हैं, तो FCNR(B) आपके लिए सही विकल्प है। वहीं, अगर आपको लगता है कि रुपया मजबूत होगा और आप बिना टैक्स के सिंपल रिटर्न चाहते हैं, तो NRE चुन सकते हैं। भारत में रहने वाले परिवार की नकदी जरूरतों के लिए रेजिडेंट एफडी सही है, लेकिन इस पर टैक्स देना होता है। रही बात अल्ट्रा-शॉर्ट डेट फंड्स की, तो इसमें आपको T+1 यानी अगले ही दिन पैसे निकालने की सुविधा तो मिलती है, मगर इसके रिटर्न फिक्स नहीं होते और NAV रोज बदलती है।
31 अगस्त के बाद नई FCNR(B) बुकिंग्स पर स्वैप बेनिफिट मिलना बंद हो जाएगा। इसके बाद बैंक FCNR पर मिलने वाले ब्याज की दरों को रिवाइज या नॉर्मलाइज कर सकते हैं, इसलिए इस हफ्ते बैंकों की रेट लिस्ट पर नजर बनाए रखें। हालांकि, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) और ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग से जुड़ी छूट 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी। आने वाले दिनों में डिपॉजिट का पूरा गणित भारतीय रुपये की चाल और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के रुख पर निर्भर करेगा।
Story first published: Sunday, August 30, 2026, 19:04 [IST]
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