RLD चीफ संग वायरल तस्वीर: जयंत चौधरी से शमी की मुलाकात के बाद सियासी पारा हाई, अमरोहा सदर सीट पर चर्चा
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने राष्ट्रीय लोक दल RLD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाकात की है, जिसके बाद उनके गृह जनपद अमरोहा से सियासी पारी शुरू करने की अटकलें तेज हो गई हैं।
जयंत चौधरी से मिले क्रिकेटर मोहम्मद शमी (फाइल फोटो)
- Published: 21 Sep 2026, 12:16 PM IST
- Last Updated: 21 Sep 2026, 12:56 PM IST
अमरोहा: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में नए-नए समीकरण बनने लगे हैं। इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय लोक दल आरएलडी के अध्यक्ष जयंत चौधरी से हुई मुलाकात ने सियासी पारे को गरमा दिया है।
जयंत चौधरी द्वारा सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा किए जाने के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शमी जल्द ही चुनावी पिच पर अपनी नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक शमी या आरएलडी की ओर से किसी भी आधिकारिक उम्मीदवारी या पार्टी में शामिल होने की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अमरोहा सदर सीट से चुनाव लड़ने के कयास
मोहम्मद शमी मूल रूप से अमरोहा जनपद के सहसपुर अलीनगर के रहने वाले हैं। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि शमी अपने गृह जिले की अमरोहा सदर विधानसभा सीट से आरएलडी के टिकट पर चुनावी समर में उतर सकते हैं। इसके अलावा राजनीतिक गलियारों में शमी के बड़े भाई हसीब के नाम की भी चर्चा चल रही है, जिन्हें पहले भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय करने की सुगबुगाहट रही है।
सपा के मजबूत गढ़ में नया समीकरण
अमरोहा विधानसभा सीट को समाजवादी पार्टी का मजबूत किला माना जाता है, जहां से पूर्व मंत्री महबूब अली लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इस सीट पर कब्जा जमाया था। ऐसे में यदि मोहम्मद शमी जैसे लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय चेहरे की राजनीति में एंट्री होती है, तो यह सीट एक बेहद दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तब्दील हो सकती है।
क्रिकेट के मैदान से सियासत के गलियारों तक
मोहम्मद शमी पिछले कुछ समय से भारतीय टीम में वापसी के प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय दिखे हैं। खेल जगत से राजनीति में आने का चलन पुराना रहा है, ऐसे में जयंत चौधरी के साथ उनकी यह गर्मजोशी भरी मुलाकात पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।
फिलहाल दोनों पक्षों की तरफ से इसे केवल एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन पश्चिमी यूपी में इस मुलाकात के गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।