कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन ने ह्यूमनॉइड रोबोट के विकास में उल्लेखनीय बढ़त बनाई है। चीन की कंपनियां दुनिया में सबसे अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार कर रही हैं और सरकार इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। हालांकि, इन रोबोटों का तेजी से बढ़ता किराया कारोबार यह भी दिखा रहा है कि मौजूदा तकनीक अभी इतनी परिपक्व नहीं हुई है कि कारखानों, दफ्तरों या घरों में बड़े पैमाने पर इन्सानों की जगह ले सके।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार चीन में पिछले एक वर्ष के दौरान ह्यूमनॉइड रोबोट किराये पर उपलब्ध कराने का कारोबार तेजी से बढ़ा है। प्रदर्शनी, व्यावसायिक आयोजनों, प्रचार अभियानों और विवाह प्रस्ताव जैसे विशेष कार्यक्रमों में लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए इन रोबोटों की मांग बढ़ी है। एक रोबोट का दैनिक किराया लगभग 3,000 से 3,500 युआन तक है और कई मामलों में इसके साथ प्रशिक्षित ऑपरेटर भी उपलब्ध कराया जाता है। सरकारी मीडिया के अनुसार चीन में 1.53 लाख से अधिक रोबोट किराया कारोबार पंजीकृत हो चुके हैं।
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सरकार का बड़ा दांव
इन चुनौतियों के बावजूद चीन सरकार ह्यूमनॉइड रोबोट को भविष्य की रणनीतिक तकनीक मान रही है। इस वर्ष सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत वर्ष के अंत तक 100 से अधिक उच्च-मूल्य वाले व्यावहारिक क्षेत्रों में ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।बीजिंग का मानना है कि घटती कार्यशील आबादी और धीमी आर्थिक वृद्धि के बीच रोबोट भविष्य में उत्पादकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं। साथ ही चीन इस क्षेत्र में अमेरिका, जापान और यूरोप पर तकनीकी बढ़त हासिल करना चाहता है।
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चीन का वैश्विक दबदबा
बाजार अनुसंधान संस्थानों के अनुसार दुनिया में ह्यूमनॉइड रोबोट निर्माण में चीन सबसे आगे निकल चुका है। देश में 140 से अधिक कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग और मजबूत विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला का लाभ मिलने से चीनी कंपनियां उत्पादन लागत तेजी से कम करने में सफल रही हैं। निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया में लगभग एक अरब ह्यूमनॉइड रोबोट उपयोग में हो सकते हैं और इस उद्योग का आकार 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है। हालांकि व्यापक व्यावसायिक उपयोग अगले एक दशक बाद ही संभव होने की संभावना जताई गई है।
उद्योग अभी संक्रमण के दौर में
चीन की अग्रणी कंपनियां भी स्वीकार कर रही हैं कि उनके अधिकांश रोबोट फिलहाल अनुसंधान संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों को ही बेचे जा रहे हैं। औद्योगिक उत्पादन लाइनों में इनकी हिस्सेदारी अभी 10 प्रतिशत से भी कम है।