Published: Sunday, August 9, 2026, 14:05 [IST]
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और सियासी पारा धीरे-धीरे चढ़ रहा है। इसी बीच आरक्षण का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। बीजेपी, सपा और बसपा अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी हैं। इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण को लेकर दिए एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर सवाल उठाया।
मायावती ने रविवार (09 अगस्त) को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर आरक्षण को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी। उन्होंने SC, ST और OBC के आरक्षण में क्रीमी लेयर की चर्चा का विरोध किया है। उनका कहना है कि आरक्षण को लेकर ऐसी सोच सामाजिक बराबरी के मकसद से मेल नहीं खाती। उन्होंने इसे संकीर्ण राजनीतिक हितों से जोड़ते हुए संविधान की मूल भावना का भी हवाला दिया।
मायावती ने क्रीमी लेयर पर क्यों उठाया सवाल?
मायावती का तर्क है कि SC, ST और OBC समुदायों ने लंबे समय तक जाति आधारित भेदभाव झेला है। उनके मुताबिक, यह भेदभाव सिर्फ इतिहास की बात नहीं है। आज भी समाज में इसके असर दिखाई देते हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि ऐसे हालात में आरक्षण के भीतर क्रीमी लेयर की शर्त जोड़ने की चर्चा ही गलत दिशा में ले जाती है। उन्होंने इसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामाजिक न्याय के लक्ष्य के खिलाफ बताया। मायावती ने कहा कि किसी वर्ग या व्यक्ति को नजरअंदाज करने के बजाय सभी को बराबरी और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
मोहन भागवत ने आरक्षण पर क्या कहा था?
मायावती की नाराजगी की वजह RSS प्रमुख मोहन भागवत का हालिया बयान है। भागवत ने आरक्षण को राजनीति से दूर रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि आरक्षण का आधार सामाजिक भेदभाव है और जब तक यह भेदभाव मौजूद रहेगा, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी।
भागवत ने यह भी कहा था कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उन्हें अपनी इच्छा से आगे चलकर इसका लाभ छोड़ने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा था, "आरक्षण को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। इसका आधार सामाजिक भेदभाव है। जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है, आरक्षण जारी रहना चाहिए। जिन लोगों को इसका फायदा मिला है, उन्हें आगे आकर अपनी तरफ से उदारता दिखाने के बारे में सोचना चाहिए।" यही बात अब मायावती के निशाने पर है।
मायावती बोलीं- जातिवाद अभी खत्म नहीं हुआ
बसपा प्रमुख का कहना है कि देश में जातिवाद अभी भी जमीनी स्तर पर मौजूद है। उनके मुताबिक, RSS भी इस हकीकत से अनजान नहीं है। मायावती ने कहा कि केंद्र में रही अलग-अलग सरकारों ने भी समय-समय पर इस सामाजिक सच्चाई को स्वीकार किया है।
मायावती ने SC और ST को क्रीमी लेयर से बाहर रखने को लेकर केंद्र सरकार की कानूनी भूमिका पर भी बात की। उनका कहना है कि अगर सरकार मजबूत तर्कों के साथ अदालत में अपना पक्ष रखती है, तो यह संविधान की भावना के अनुरूप होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मौकों पर सरकारों की कमजोर कानूनी पैरवी के चलते सामाजिक बदलाव से जुड़े मामलों में अदालतों के सामने पूरा पक्ष नहीं पहुंच पाता।
मायावती की RSS से सीधी अपील, आरक्षण पर राजनीति छोड़ें
मायावती ने RSS से आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति से दूर रहने की अपील की है। उनका कहना है कि आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव की मांग करने के बजाय समाज में बराबरी कैसे मजबूत हो, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
अब इस बयान का राजनीतिक असर भी देखा जाएगा। खासकर ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP, समाजवादी पार्टी और BSP तीनों ही अपनी-अपनी चुनावी रणनीति मजबूत करने में जुटी हैं।
आरक्षण का मुद्दा यूपी की राजनीति में पहले भी बड़ा चुनावी सवाल रहा है। ऐसे में मायावती का यह हमला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं माना जा रहा। उन्होंने एक बार फिर सामाजिक न्याय और आरक्षण को अपनी राजनीति के केंद्र में रखने का संकेत दिया है।