Sawan Putrada Ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी पर क्यों रखा जाता है संतान के लिए व्रत? पद्म पुराण में छिपा है सच - Haribhoomi

Published on 19 अग॰ 2026

Sawan Putrada Ekadashi 2026: सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त को मनाई जाएगी। जानें पद्म पुराण में वर्णित राजा महाजीत की कथा और संतान सुख से जुड़े इस व्रत का महत्व।

Sawan Putrada Ekadashi 2026

सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त को मनाई जाएगी।

  • Published: 19 Aug 2026, 11:02 AM IST
  • Last Updated: 19 Aug 2026, 11:02 AM IST

Sawan Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना से जोड़कर देखा जाता है। सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का भी विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। साल 2026 में यह व्रत 23 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। संतान सुख की कामना रखने वाले दंपति भी श्रद्धा के साथ यह व्रत करते हैं। इस एकादशी से जुड़ी राजा महाजीत की कथा पद्म पुराण में मिलती है।

पुत्रदा एकादशी का क्या है महत्व?
पुत्रदा एकादशी के नाम में ही इसके धार्मिक महत्व का संकेत मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में ‘पुत्रदा’ का अर्थ संतान प्रदान करने वाली एकादशी से जोड़ा जाता है। हालांकि, इसे केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित नहीं माना जाता। श्रद्धालु इस व्रत को संतान की खुशहाली, परिवार की सुख-शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने की कामना से भी करते हैं।

इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत का पालन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नियम और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करने से मन को शांति मिलती है और परिवार के लिए शुभ फल की कामना की जाती है।

पद्म पुराण में क्या है पुत्रदा एकादशी की कथा?
पुत्रदा एकादशी से जुड़ी प्रमुख कथा पद्म पुराण में बताई गई है। कथा के अनुसार, द्वापर युग में महिष्मति नगरी के राजा महाजीत बहुत धार्मिक और दयालु शासक थे। उनके राज्य में प्रजा खुशहाल थी और राजा के जीवन में किसी तरह की भौतिक कमी नहीं थी। इसके बावजूद राजा और रानी संतान न होने के कारण काफी चिंतित रहते थे।

राजा की परेशानी धीरे-धीरे उनकी प्रजा के लिए भी चिंता का विषय बन गई। इसके बाद मंत्रियों और प्रजा ने ऋषियों से इसका समाधान जानने का निर्णय लिया।

लोमेश ऋषि ने बताया संतानहीनता का कारण
राजा की समस्या का समाधान जानने के लिए मंत्री और प्रजा लोमेश ऋषि के पास पहुंचे। कथा के अनुसार, ऋषि ने राजा के पूर्व जन्म से जुड़े कर्मों का उल्लेख किया और बताया कि उन्हीं कर्मों के प्रभाव के कारण इस जन्म में उन्हें संतान सुख नहीं मिल पा रहा है।

इसके बाद लोमेश ऋषि ने राजा महाजीत को पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि ने बताया कि श्रद्धा और विधि-विधान के साथ इस व्रत का पालन करने से उनकी मनोकामना पूरी हो सकती है।

व्रत के बाद राजा-रानी को हुई पुत्र प्राप्ति
ऋषि की सलाह मानकर राजा महाजीत और उनकी रानी ने पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा। दोनों ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और पूरी श्रद्धा के साथ एकादशी का पालन किया।

धार्मिक कथा के अनुसार, व्रत के प्रभाव से राजा और रानी को एक प्रतापी एवं संस्कारी पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी कथा के कारण पुत्रदा एकादशी को संतान सुख की कामना से जोड़कर देखा जाता है।

संतान की खुशहाली के लिए क्यों खास मानी जाती है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना करने से परिवार में सुख-शांति और संतान के कल्याण की कामना की जाती है। संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपति इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करते हैं।

हालांकि, पुत्रदा एकादशी से जुड़े ये लाभ धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक या चिकित्सकीय दावे के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।