Ghazipur News: विदाई सिर्फ एक औपचारिक रस्म नहीं होती, बल्कि रिश्तों की सबसे भावुक अभिव्यक्ति होती है. गाजीपुर की मोहम्मदाबाद तहसील में ऐसा ही एक भावुक माहौल देखने को मिला, जब SDM हर्षिता तिवारी के स्थानांतरण पर आयोजित विदाई समारोह ने सभी को भावुक कर दिया. नोएडा प्राधिकरण में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्हें जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ विदा किया गया, उसने यह साबित कर दिया कि ईमानदार कार्यशैली और संवेदनशील व्यवहार लोगों के दिलों में स्थायी जगह बना लेते हैं.
सम्मान समारोह में भावुक हुईं एसडीएम
मोहम्मदाबाद तहसील परिसर में आयोजित विदाई समारोह में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, तहसील के कर्मचारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे. सभी ने एसडीएम हर्षिता तिवारी के कार्यकाल की सराहना करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट किए. इस दौरान मंच पर सम्मान ग्रहण करते समय कई बार उनकी आंखें नम हो गईं. समारोह में मौजूद लोगों ने भी तालियों के बीच उनके कार्यों को याद किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
बेटी की विदाई जैसा दिखा नजारा
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद तहसील परिसर से उनकी विदाई का दृश्य बेहद भावुक रहा. फूलों से सजी गाड़ी, ढोल-नगाड़ों की गूंज और शुभकामनाओं के बीच उन्हें नए कार्यस्थल के लिए रवाना किया गया. अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी नम आंखों से उन्हें विदाई दी. माहौल कुछ ऐसा था मानो किसी बेटी को उसके मायके से विदा किया जा रहा हो. उपस्थित लोगों ने उनके साथ बिताए कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ किया.
कार्यशैली ने छोड़ी अमिट छाप
लोगों का कहना था कि हर्षिता तिवारी ने अपने कार्यकाल में जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए. यही कारण रहा कि उनके स्थानांतरण की खबर से क्षेत्र के लोगों में भावुकता देखने को मिली. विदाई समारोह केवल एक प्रशासनिक अधिकारी के स्थानांतरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विश्वास, सम्मान और अपनत्व का प्रतीक बन गया.
यह भावुक विदाई इस बात का संदेश भी देती है कि सरकारी पद केवल प्रशासनिक दायित्व निभाने का माध्यम नहीं होते, बल्कि जनता के साथ विश्वास और संवेदनशीलता का रिश्ता बनाने का अवसर भी होते हैं. पद बदल सकते हैं, लेकिन अच्छे कार्यों और व्यवहार से बने रिश्ते हमेशा लोगों की यादों में जीवित रहते हैं.

अनिल कुमार
मैं अनिल कुमार वर्ष 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. मैंने अपने करियर की शुरुआत S1 से की थी. दिसंबर 2007 में मैं Zee News से जुड़ा और गाजीपुर की खबरों पर पैनी नजर रखते हुए कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कीं. इसके बाद India TV और News18 India (पूर्व IBN7) के लिए भी काम किया और जिले में मजबूत पहचान बनाई. मेरी गेहूं सड़ने की खबर पर उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था, जो मेरी प्रभावशाली रिपोर्टिंग का उदाहरण है. TV9 पर प्रसारित मेरी दिव्यांग बच्चों से जुड़ी रिपोर्ट के बाद शासन-प्रशासन सक्रिय हुआ और राज्यपाल ने गाजीपुर पहुंचकर प्रभावित बच्चों से मुलाकात की.
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