Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती

Published on 17 अक्टू॰ 2026

Updated: Saturday, October 17, 2026, 11:19 [IST]

Shardiya Navratri 2026 Day 7: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। माता का यह रूप देखने में भले ही उग्र हो, लेकिन भक्तों के लिए बहुत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को डर, नकारात्मक शक्तियों और जीवन की परेशानियों से लड़ने की हिम्मत देती हैं। शुभ फल प्रदान करने के कारण उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां कालरात्रि की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है और मुश्किल समय का सामना करने की शक्ति मिलती है। आइए, जानते हैं नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र, और आरती -

Shardiya Navratri Day 7
फोटो क्रेडिट: ChatGPT

मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का स्वरूप बहुत प्रभावशाली और शक्तिशाली है। उनका रंग काला है, जिसे अंधकार और अज्ञान को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। उनके बाल लंबे और खुले हुए हैं। माता की चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। उनके तीनों नेत्र भूतकाल, वर्तमान और भविष्य का प्रतीक माने जाते हैं। मां कालरात्रि का वाहन गधा है। उनके एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में लोहे का अस्त्र होता है। उनके बाकी दो हाथ अभय और वर मुद्रा में रहते हैं। इन मुद्राओं के जरिए माता भक्तों को निर्भय रहने और आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश देती हैं। मान्यता है कि उनकी आंखों से निकलने वाला अग्नि जैसा तेज बुरी शक्तियों का नाश करता है।

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

मां कालरात्रि को मां दुर्गा का सबसे शक्तिशाली और उग्र स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा करने से भक्तों के मन से डर दूर होता है। माता को अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। माना जाता है कि उनकी कृपा से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है। मां कालरात्रि को महायोगिनी और महायोगेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

इसके बाद पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से साफ करें।

फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां कालरात्रि की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

अब माता के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें रोली, अक्षत और गुड़हल के फूल चढ़ाएं।

इसके बाद मां को गुड़ का भोग लगाएं और श्रद्धापूर्वक उनके जयकारे लगाएं।

इसके बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। साथ ही, मां के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

पूजा के अंत में कपूर जलाकर परिवार के साथ मां कालरात्रि की आरती करें और

मां कालरात्रि का प्रिय भोग

नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, माता को मालपुआ भी अर्पित किया जा सकता है।

मां कालरात्रि के मंत्र

ॐ कालरात्र्यै नमः।

मां कालरात्रि का ध्यान मंत्र

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

मां कालरात्रि की स्तुति

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तुते॥

मां कालरात्रि से प्रार्थना का मंत्र

ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥

नमो ऐं ॐ।

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली,
काल के मुंह से बचाने वाली।

दुष्ट संहारक नाम तुम्हारा,
महाचंडी तेरा अवतार।

पृथ्वी और आकाश पे सारा,
महाकाली है तेरा पसारा।

खड्ग खप्पर रखने वाली,
दुष्टों का लहू चखने वाली।

कलकत्ता स्थान तुम्हारा,
सब जगह देखूं तेरा नजारा।

सभी देवता सब नर-नारी,
गाएं स्तुति सभी तुम्हारी।

रक्तदंता और अन्नपूर्णा,
कृपा करे तो कोई भी दुख ना।

ना कोई चिंता रहे बीमारी,
ना कोई गम ना संकट भारी।

उस पर कभी कष्ट ना आवें,
महाकाली मां जिसे बचावें।

तू भी भक्त प्रेम से कह,
कालरात्रि मां तेरी जय।