Shradh Ke Niyam: श्राद्ध के दिन मांस-मदिरा से लेकर झगड़े तक, नहीं करना चाहिए ये 10 काम

Published on 28 सित॰ 2026

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ध्यान रखें श्राद्ध पक्ष से जुड़े ये नियम

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ध्यान रखें श्राद्ध पक्ष से जुड़े ये नियम

Pitru Paksha Do And Donts: पितृ पक्ष में श्राद्ध के दिन पूर्वजों को याद कर उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान और भोजन कराने की परंपरा है। इस दौरान घर के माहौल को शांत और सात्विक रखने की बात कही जाती है। कुछ काम ऐसे भी बताए गए हैं, जिन्हें श्राद्ध के दिन करने से बचना चाहिए। आइए 11 तस्वीरों के जरिए जानते हैं कि श्राद्ध के दिन घर में किन कामों की मनाही है।

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घर में कलह करने से बचें

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घर में कलह करने से बचें

श्राद्ध के दिन घर में लड़ाई-झगड़ा और बेवजह विवाद करने से बचना चाहिए। इस दिन शांत मन से पितरों का स्मरण करने और घर का वातावरण शांत रखना चाहिए।

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मांस-मदिरा से दूरी

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मांस-मदिरा से दूरी

श्राद्ध के दिन मांस, मछली और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।। इस दिन सात्विक भोजन करने और पितरों के लिए बनाए गए भोजन को शुद्ध रखा जाता है।

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बाल और नाखून काटने से बचें

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बाल और नाखून काटने से बचें

श्राद्ध के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। इस दिन को पितरों को समर्पित मानकर सामान्य सजने-संवरने वाले कामों से दूरी रखने की परंपरा है।

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नया सामान खरीदने से बचें

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नया सामान खरीदने से बचें

श्राद्ध के दिन नए कपड़े, गहने या दूसरी नई चीजें खरीदने से बचने की मान्यता है। इस दिन को उत्सव या व्यक्तिगत खरीदारी के बजाय पितरों को याद करने का दिन माना जाता है।

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शुभ मांगलिक काम न करें

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शुभ मांगलिक काम न करें

पितृ पक्ष में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे बड़े मांगलिक कामों को करने से बचा जाता है। श्राद्ध का दिन विशेष रूप से पूर्वजों के स्मरण और उनके निमित्त कर्म के लिए माना जाता है।

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तामसिक भोजन से बचें

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तामसिक भोजन से बचें

श्राद्ध के दिन प्याज-लहसुन सहित कई तामसिक माने जाने वाले खाद्य पदार्थों से बचने की परंपरा है। इस दिन सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।

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पेड़-पौधों और जीवों को नुकसान न पहुंचाएं

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पेड़-पौधों और जीवों को नुकसान न पहुंचाएं

पितृ पक्ष में जीव-जंतुओं और प्रकृति के प्रति दया रखना चाहिए। खासकर श्राद्ध के भोजन में गाय, कौए और अन्य जीवों के लिए अन्न निकालने की परंपरा है।

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जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं

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जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं

श्राद्ध के दिन ब्राह्मण, अतिथि या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने या उसे खाली हाथ लौटाने से बचने की मान्यता है। पितरों के निमित्त दान और भोजन कराने की परंपरा इस दिन विशेष मानी जाती है।

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पितरों के भोजन को पहले न खाएं

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पितरों के भोजन को पहले न खाएं

श्राद्ध के लिए बनाया गया भोजन पहले पितरों के निमित्त अर्पित करने की परंपरा है। श्राद्ध का भोजन तैयार होने के बाद उसे पहले से खाना उचित नहीं माना जाता।

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श्राद्ध कर्म को अधूरा न छोड़ें

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श्राद्ध कर्म को अधूरा न छोड़ें

श्राद्ध के दिन तर्पण, पिंडदान या परिवार में चली आ रही श्राद्ध की परंपरा को श्रद्धा के साथ पूरा करने की मान्यता है। इस दिन पितरों का स्मरण और उनके निमित्त किए जाने वाले कर्म को विशेष महत्व दिया जाता है।

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श्राद्ध के दिन इन कामों से बचने की मान्यता है..

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श्राद्ध के दिन इन कामों से बचने की मान्यता है..

- लड़ाई-झगड़ा और विवाद
- मांस-मदिरा का सेवन
- बाल और नाखून काटना
- अनावश्यक खरीदारी
- बड़े मांगलिक आयोजन
- पितरों को अर्पित भोजन पहले खाना
- तामसिक भोजन
- अतिथि या जरूरतमंद का अपमान
- जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाना
- श्राद्ध कर्म को श्रद्धा के बिना या अधूरा छोड़ना

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