फर्जी पते पर रिवॉल्वर लाइसेंस बनवाने वाले शाहिद की तलाश: बांदा के इबराक के बाद दूसरा आरोपी भी रडार पर; अयाज बेग की भूमिका की जांच - Azamgarh News

Published on 6 अक्टू॰ 2026

आजमगढ़ में फर्जी पते पर रिवॉल्वर का लाइसेंस बनवाने के आरोपी शाहिद की तलाश में पुलिस टीम छापेमारी कर रही है। एक दिन पहले बांदा के रहने वाले और वर्तमान में मुंबई के अंधेरी में रह रहे मोहम्मद इबराक को गिरफ्तार किया गया था।

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पुलिस के मुताबिक, इबराक काफी समय तक पुलिस को गुमराह करता रहा। जांच में उसके बांदा का रहने वाला होने और वर्तमान में मुंबई के अंधेरी में रहने की पुष्टि हुई।

मलेशिया की नागरिकता हासिल करने वाले मोहम्मद कुड्डूस ने SIR प्रक्रिया में की थी सहभागिता।

मलेशिया की नागरिकता हासिल करने वाले मोहम्मद कुड्डूस ने SIR प्रक्रिया में की थी सहभागिता।

2010 में बने थे दोनों के लाइसेंस

जांच में सामने आया है कि मोहम्मद इबराक और मोहम्मद शाहिद के रिवॉल्वर लाइसेंस वर्ष 2010 में बने थे। इबराक के लाइसेंस का नंबर 315/2010, जबकि शाहिद के लाइसेंस का नंबर 314/2010 है।

पुलिस अभी यह पता नहीं लगा सकी है कि मोहम्मद शाहिद मूल रूप से किस जिले का रहने वाला है।

अयाज बेग ने उपलब्ध कराया था पता

पुलिस की जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों के लिए मिर्जापुर ब्लॉक के रहने वाले अयाज बेग ने कथित तौर पर फर्जी पते का इंतजाम कराया था। अयाज बेग फिलहाल फरार है।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि अयाज बेग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आजमगढ़ में दूसरे जिलों के कितने लोगों के लाइसेंस बनवाए हैं।

आजमगढ़ में करीब 17 हजार लाइसेंसी हथियार बताए जाते हैं। ऐसे में पुलिस इस मामले की जांच लाइसेंसी हथियारों और उनके दस्तावेजों के सत्यापन के एंगल से भी कर रही है।

आजमगढ़ में मुंबई के रहने वाले लोगों को भी SIR में किया जा रहा है शामिल।

आजमगढ़ में मुंबई के रहने वाले लोगों को भी SIR में किया जा रहा है शामिल।

SIR में भी बाहरी व्यक्ति का नाम जुड़ने का मामला

आजमगढ़ में SIR प्रक्रिया में फर्जी तरीके से नाम जुड़ने का यह पहला मामला नहीं है। मार्च 2026 में मलेशिया की नागरिकता हासिल कर चुके मोहम्मद कुड्डूस का नाम भी आजमगढ़ की SIR प्रक्रिया में सामने आया था।

कुड्डूस पर मलेशिया की नागरिकता हासिल करने के बावजूद भारत की सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और डबल पासपोर्ट से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई थी। उसे जेल भेजा गया था। बाद में उसे जमानत मिल गई और वह मलेशिया चला गया।

गांव के लोगों ने दोनों को पहचानने से इनकार किया

फर्जी पते के मामले में मिर्जापुर के मकान नंबर 308 का भी जिक्र सामने आया है। इसी पते पर बांदा निवासी और मुंबई में रह रहे मोहम्मद इबराक के साथ मोहम्मद शाहिद का नाम भी दर्ज है।

पुलिस ने जब गांव के लोगों से जानकारी की तो उन्होंने इबराक और शाहिद नाम के किसी व्यक्ति के गांव में रहने की जानकारी से इनकार किया। अब पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने में जुटे हैं कि फर्जी पते और दस्तावेजों के जरिए कितने बाहरी लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में जोड़ा गया।

मामले में पुलिस फरार अयाज बेग की तलाश कर रही है। उसके पकड़े जाने के बाद फर्जी लाइसेंस और SIR में नाम जुड़वाने के नेटवर्क को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।