Updated On: Jul 31, 2026 | 12:20 PM IST
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सार
Booth Level Agents: नागपुर में एसआईआर प्रक्रिया और भारी बारिश को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा ने 2167 बीएलए नियुक्त करने का दावा करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।

दयाशंकर तिवारी (सोर्स: सोशल मीडिया)
विस्तार
Nagpur SIR Political Row: नागपुर शहर में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया और हाल ही में हुई भारी बारिश के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने दावा किया है कि दुर्भाग्यवश कांग्रेस, आप और बसपा ने अपेक्षित संख्या में बीएलए नियुक्त नहीं किए जबकि अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 2167 बीएलए नियुक्त किए हैं।
एसआईआर प्रक्रिया में नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन सामान्य नागरिक कई कारणों से इस प्रक्रिया से दूर रहते हैं। इसलिए निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) नियुक्त करने को कहा था।
भारतीय जनता पार्टी के शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा पूरी पारदर्शिता के साथ नागरिकों को मतदान प्रक्रिया में सहायता कर रही है। वहीं भारी बारिश एक प्राकृतिक आपदा थी, जिसे राजनीति से प्रेरित होकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
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निजी लोगों की नियुक्ति के आरोप पर बोले
कांग्रेस अध्यक्ष प्रफुल्ल गुडधे के उस आरोप पर कि भाजपा ने एसआईआर के लिए निजी लोगों को नियुक्त किया है, तिवारी ने स्वीकार किया कि महानगर में लगभग 300 से 350 एसआईआर समन्वयक नियुक्त किए गए हैं।
उनका काम बीएलओ और बीएलए की मदद से मतदाताओं के फॉर्म सही ढंग से भरवाने में सहायता करना है। भाजपा ने एक एप विकसित किया है, जिसके माध्यम से वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम खोजकर नागरिकों की मदद की जा रही है, ताकि किसी भी मतदाता का नाम छूट न जाए,
पानी और ‘क्लाउडबर्स्ट’ जैसी स्थिति पर बयान
गुडधे के एक लाख करोड़ रुपये कमीशन में गए और नागपुर पानी-पानी हो गया वाले बयान पर पलटवार करते हुए तिवारी ने कहा कि उस राशि में नागपुर को मिलने वाले पीने के पानी की लागत भी शामिल है।
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इसलिए इसे ‘पानी में जाना’ कहना पूरी तरह गलत है। हाल ही में हुई भारी बारिश पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 24 घंटे में 65 मिमी बारिश को अतिवृष्टि कहा जाता है लेकिन नागपुर में महज ढाई घंटे में 180 मिमी बारिश हुई, जो कि ‘क्लाउडबर्स्ट’ प्राकृतिक आपदा थी।महानगर पालिका की व्यवस्था 65 मिमी बारिश को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। इसलिए इतनी भारी बारिश का सामना करना मुश्किल था।
