न्यू यॉर्क सिटी के उस खूबसूरत फाइव स्टार होटल के रूम में दाखिल होते ही प्रोफेसर तबस्सुम ने कमरे पर एक नज़र डाली... रूम खूबसूरत था पर उन्होंने ज़्यादा गौर नहीं किया और सामान पहुँचाने आए लड़के को कुछ डॉलर्स देकर दरवाजा बंद कर लिया.... वो पहले भी कई बार न्यूयॉर्क आ चुकी थीं... हालांकि पहली बार वो कोई अवार्ड लेने न्यूयॉर्क आईं थीं। लंबी थकान की वजह से वो पास रखे सोफे पर बैठ गईं... फिर कुछ सोचकर आँखे खोली और फोन पर सोशल मीडिया स्क्रॉल करने लगी... स्क्रीन पर एक न्यूज स्क्रॉल करते हुए वो ठहर गई... एक भेड़िए की खूंखार तस्वीर थी और लिखा था... “भेड़िए के हमले से यूपी के बहराइच में तीसरी मौत” प्रोफेसर तबस्सुम को एक झटका सा लगा जैसे उन्हें कुछ याद आया और उनके आंसू मोटे चश्मे के फ्रेम के पीछे से उनके गालों पर लुढ़कने लगे.
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चंद्रशेखर यूनिवर्सिटी में फिज़िक्स पढ़ाने वाली प्रोफेसर तबस्सुम देश की बड़ी रिसर्चर थी कई सरकारी गैर सरकारी प्रोजेक्ट में उनकी राय ली जाती थी. वो किसी ज़माने में PMO में कंसल्टेंट भी रह चुकी थी. फिजिक्स पर उनकी लिखी किताबें ना सिर्फ देश में बल्कि International Universities के कोर्स में भी शामिल थीं. बीते कई सालों से टाइम ट्रैवल पर रिसर्च कर रही थी और उनका मानना था कि टाइम ट्रैवल बिल्कुल पॉसिबल है... एक जर्मन मैगजीन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी था की आगे आने वाले वक्त में वो शायद ये बात साबित भी कर देंगी कि समय में आगे या पीछे जाना बिल्कुल पॉसिबल है। हालांकि साइंस वर्ल्ड जर्नल में कई बड़े साइंटिस्ट्स ने उनकी इस बात का मज़ाक उड़ाया था।
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ख़ैर तो प्रोफेसर तबस्सुम अपनी प्रोफेशनल लाइफ में बहुत कामयाब थीं लेकिन अपनी पर्सनल लाइफ में वो बहुत अकेली थी. उनका कोई भाई-बहन था नहीं. शादी के बाद शौहर की डेथ कुछ 10 साल पहले हो गयी थी. एक जवान बेटा था मुर्तज़ा वो भी 3 साल पहले एक हादसे में दुनिया छोड़ गया था. दरअसल एक वक्त था जब प्रोफेसर तबस्सुम के घर के पीछे वाले जंगल में आदमखोर भेड़ियों ने आतंक मचाया हुआ था और उन्हीं दिनों एन दिन भेड़ियों ने मुर्तजा पर हमला कर दिया था. हमला ऐसा था कि मुर्तजा की लाश भी नहीं मिली थी.
प्रोफेसर तबस्सुम पति को पहले ही खो चुकी थीं... अब बेटे की मौत ने उन्हें अंदर से और कमज़ोर कर दिया था लेकिन वो दुनिया को दिखाती थीं कि वो बहुत मजबूत हैं...
तो ख़ैर... आज अख़बार में भेड़िये वाली ख़बर देखकर उन्हें अचानक ये सब याद आ गया। तभी होटल के कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई तो उनका ध्यान टूटा... उन्होंने उठकर दरवाजा खोला. एक अजनबी लड़की खड़ी थी.. बोली
“मैं मैं मैं प्लीज अंदर आ सकती हूँ… Its really urgent” काले रंग की अजीब सी बैगी pant और एक झबले जैसी ढीली कमीज पहने थी वो... नीली बड़ी बड़ी आंखे... और बाल खुले हुए थे.
प्रोफेसर तबस्सुम ने उसके चेहरे की हड़बड़ाहट देखी और उसे इस तरह देखा जैसे वो उस नीली आंखों वाली लड़की को पहले देख चुकी हैं कहीं.... बोलीं... “आओ अंदर आओ” वो लड़की आई और सोफे के सामने वाली सिंगल सोफा-चेयर पर बैठ गयी... प्रोफेसर साहिबा भी बैठ गयीं...
प्रोफेसर ने गहरी सांस ली और कहा, “पिछले दो ढाई हफ्ते से मैं नोटिस कर रही हूँ कि मैं जहाँ भी जा रही हूँ तुम मेरा पीछा कर रही हो. उस दिन दिल्ली में वो एडीजी साहब के बेटे के रिसेप्शन में भी मैंने तुम्हें देखा था. तुम एक्सिट गेट के पास खड़ी थी. उसके बाद वो पैसिफिक माल की पार्किंग में थी. एक रात तो मैंने तुम्हें अपने घर के नीचे भी देखा था. और अब यहाँ न्यू यॉर्क में. कौन हो तुम? क्या चाहती हो?”
वो लड़की बोली, “”Mam आप प्लीज घबराइए मत. मैं मैं मैं बस आपकी फैन हूँ... मैं आपको नुकसान नहीं पहुंचाना चाहती”
“वो मुझे चेहरा देख कर ही अंदाज़ा हो गया था..तभी तुम्हं अंदर बुलाया... बताओ... क्या चाहती हो”
“मैम... मैं मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं और एक बहुत ज़रूरी काम से आई हूं... और बहुत दूर से आई हूं”
“बहुत दूर से मतलब? किसी दूसरे देश से आई हो?”
“नहीं मैडम मैं….” वो लड़की उनके करीब आयी और बोली “मैं 300 साल बाद की दुनिया से आई हूँ I am time traveller”
अचानक प्रोफेसर साहिबा के चेहरे के भाव बदले और वो जोर से हंसी.
“ओके, आई सी तो तुम टाइम ट्रैवलर हो”… उस नीली आँखों वाली लड़की ने संजीदगी से हाँ में सर हिलाया. प्रोफेसर बोलीं. “ज़रूर तुम्हें मेरे क्लास के कुछ शरारती बच्चों ने भेजा होगा. टीचर की फिरकी लेते हुए शर्म नहीं आती तुम लोगों को?”
“मैडम, प्लीज आप आप गलत समझ रही है. मुझे किसी ने नहीं भेजा. मैं खुद आई हूँ आपसे, आपसे मिलने के लिए. मेरा मिलना आपसे बहुत जरूरी है. I Know आपके लिए ये यकीन कर पाना मुश्किल होगा. सबके लिए होता है. पर पर ये सच है”
- “सबके लिए होता मतलब? ओह, तुम और लोगों से भी मिली हो... आई सी” प्रोफेसर तबस्सुम ने मज़े लेते हुए कहा. “चलो तो फिर मान लेते हैं कि तुम टाइम ट्रैवलर हो, लेकिन आना कैसे हुआ? Ahh let me guess… यूँ ही किसी सुबह तुम्हारा मन हुआ होगा कि चलो भाई 300 साल पीछे घूम आते हैं. तो तुम उठी, मस्कारा लगाया, आह कुछ कपड़े पहने अजीब से और फिर टाइम मशीन में बैठ के चली आई घूमने. है ना?”
- Madam, मैं जिस वक्त से आई हूँ वहाँ टाइम मशीन कोई खास चीज़ नहीं है. हाँ थोड़ी महंगी ज़रूर होती है लेकिन mostly सभी बड़े मीडिया हाउस के पास है. असल में मैं एक जर्नलिस्ट हूँ”
फिर उसने हाथ बढ़ाते हुए कहा, “मेरा नाम नैना है”
- “ओह्हो तो आप जर्नलिस्ट है नैना जी हम्म” प्रोफेसर तबस्सुम को भी इस बातचीत में मज़ा आने लगा था। उन्होंने हाथ मिलाया और फिर वो उठी और किनारे रखे जग से ग्लास में पानी निकालते हुए बोलीं “तो मिस नैना, 2326 की जर्नलिस्ट हैं आप.. हाँ? मिलके अच्छा लगा आपसे. दा जर्नलिस्ट फ्रॉम थे फ्यूचर.” कहते हुए उसकी तरफ पानी का ग्लास बढ़ाया... फिर हसी दबाते हुए बोलीं. “कहिये तो कैसे आना हुआ.. हमारे पुराने ज़माने में”
नैना ने पूरी संजीदगी से कहा “मैडम हमारी दुनिया यानी 2326 में मीडिया ग्रुप्स ही इस पूरी दुनिया को चलाते हैं. वो ही सबसे ताकतवर हैं... क्योंकि उनके पास पब्लिक परसेप्शन बदलने की ताकत है... वो जिसको चाहें आबाद कर सकते हैं, जिसको चाहें बर्बाद... सब कुछ उनके ही हाथ में है. डेमोक्रेसी इस जस्ट आ शो पीस...देश में कौन राज करेगा... कौन विपक्ष में होगा... दोनों बातें मीडिया हाउस ही तय करते हैं. सरकारें उनके आगे झुकी रहती है. कॉम्पिटिशन सिर्फ दो तीन मीडिया हाउसेज़ के बीच चल रहा है. हर मीडिया हाउस खुद को बेहतर बताता है... इंडस्ट्री पर अपना अपना वर्चस्व साबित करने के लिए एक नया तरीका अपनाया गया और वो है टाइम मशीन। आपको ये बात सुनने में कुछ अजीब लग रही होगी पर यकीन मानिए 300 साल बाद की हमारी दुनिया में. टाइम मशीन वैसे ही है जैसे आज न्यूज चैनलों के पास... आपके वक्त में आउटडोर ब्रॉडकास्टिंग वैन होती है... जिसे आप ओबी वैन कहते हैं... जहां से आप LIVE वीडियो कर सकते हैं... जब पहली बार किसी ने OB VAN इस्तेमाल की होगी... तब लोग ऐसे ही हैरान हुए होंगे जैसे आज आप टाइम मशीन सुनने पर हो रही हैं”
प्रोफेसर तबस्सुम उसे हैरानी से सुन रही थीं... वो सच बोल रही थी या झूठ पता नहीं, लेकिन बात दिलचस्प थी। उस नीला आंखों वाली नैना ने आगे कहा, “तो मैम सारे बड़े मीडिया हाउस ने टाइम मशीन खरीद ली है और अब वो उस टाइम मशीन से बीते हुए ज़माने के लोगों का इंटरव्यू करते हैं”
- “वाह... कमाल है भाई... क्या कांसेप्ट है” प्रोफेसर तबस्सुम ने पैर मोड़कर सोफे पर टेक लगाते हुए कहा… अब उन्हें नैना की बातों में मज़ा आ रहा था। उसने आगे बताया.
“आ..अअ टाइम मशीन की टेक्नोलॉजी अब बहुत महंगी भी नहीं रही है. अगर ठीक ठाक मीडिया हाउस है तो उनके यहाँ ये मशीन होती है। आप ऐसे समझ लीजिए जैसे अलग-अलग बीट्स के जर्नलिस्ट होते हैं न. एंटरटेनमेंट बीट, पॉलिटिक्स बीट, टेक्नोलॉजी बीट, हेल्थ बीट, बिज़नेस वगैरह... वैसे ही अब हमारे यहां एक टाइम ट्रैवल एक बीट है... बाकायदा टाइम ट्रैवल जर्नलिज्म के कोर्स ऑफर होते हैं यूनिवर्सिटीज में. उन्हें सिखाया जाता है कि कैसे…”
“हम्म अच्छा अच्छा तो चाहती क्या हो मुझसे?” प्रोफेसर तबस्सुम ने नैना की बात काटते हुए कहा. वो बोली, “मैम मैं, कुछ नहीं... बस... बस आपका इंटरव्यू लेना चाहती हूं”
“तो वो तो तुम ऐसे भी ले सकती हो.. उसके लिए इतनी तिकड़मबाजी की क्या ज़रूरत है?”
“ज़रूरत है मैम क्योंकि मेरे कुछ ऐसे सवाल है जिनके जवाब देने में आप कंफर्टेबल नहीं होंगे। उन सवालों का जवाब देना आपके लिए मुश्किल होगा... जब मैं आपसे वो सवाल पूछूंगी तो आप चौंक जाएँगी क्योंकि अभी आपको ऐसा लगता है कि वो आपके राज़ हैं...कोई उनके बारे में जानता नहीं लेकिन प्रोफेसर मैम.... तीन सौ साल बाद की दुनिया में लोगों ने आप पर रिसर्च करके वो सारे राज़ जान लिये हैं”
- “क्या-क्या बक रही हो? कौन-सा राज़?” इस बार प्रोफेसर तबस्सुम थोड़ा नाराज हुई, “बंद करो ये टाइम ट्रैवल की बकवास... हाँ ये ठीक है की मैं टाइम ट्रैवल पर रिसर्च कर रही हूँ और मानती हूँ कि ये पॉसिबल है लेकिन... लेकिन अभी उस पर रिसर्च चल रही है और रिसर्च अधूरी है”
नैना ने कहा, “मैम मैं जानती हूं आप की रिसर्च अधूरी है... और आप की मौत तक वो अधूरी ही रहेगी... क्योकि मैंने आप पर लिखी किताबें पढ़ी हैं... आप उसे कभी पूरा नहीं कर पाएंगे. लेकिन देखिए... मैं 300 साल बाद की दुनिया से आयी हूँ. तीन सौ साल बाद रिसर्च पूरी हो गयी है... और इसे पूरा किया जा सका है उसी आधे अधूरी प्रिंसिपल पर.. जो आपने शुरुरती थ्योरी के तौर पर दिया था... हमारे वक्त के साइंटिस्ट ने आपकी की थ्योरी को आगे बढ़ाया... और वो कामयाब हुए... इसलिए टाइम ट्रैवल को इनवेंट करने का क्रेडिट आपको ही दिया जाता है… आफ जानती हैं हमारी दुनिया में आपको MOTHER OF TIME MACHINE कहा जाता है”
प्रोफेसर तबस्सुम के चेहरे की मुस्कराहट आहिस्ता-आहिस्ता रोमांच में बदलती जा रही थी लेकिन अब उन्हें उस लड़की से थोड़ा-थोड़ा डर भी लगने लगा था.. उन्हें लग रहा था कि ये कोई बहरूपिया है. जो मेरे होटल रूम में आई है. शायद मुझे लूटने के लिए या किसी और गलत इरादे से. नैना बोलती जा रही थी प्रोफेसर साहिबा उठीं और अपने पर्स से कुछ कागज़ात निकाले और बिस्तर के किनारे लगे ड्रावर में रखने के बहाने उन्होंने ड्रावर को खोला... और नैना की नज़र बचाकर किनारे लगे एक पैनिक बटन दबा दिया... नैना को पता भी नहीं चला। प्रोफेसर ने तबस्सुम से पूछा, “हम्म. तो नैना…पूरा नाम क्या है तुम्हारा?”
- “मैडम, बस नैना ही नाम है”
- “नैना कोई तो सरनेम होगा... कुछ तो होगा शर्मा, वर्मा, बाजपेयी, सोनकर कुछ तो होगा”
- “नहीं मैम, बस नैना ही है” कहते हुए उसने मुस्कुरा कर अपनी कलाई में बंधी एक अजीब सी घड़ी उतार कर मेज पर रखी और कहा. “मैम हमारे वक्त तक कास्ट सिस्टम पूरी तरह से खत्म हो गया है...इनफैक्ट रिलिजन भी”
- “बकवास ये तो हो ही नहीं सकता” प्रोफेसर तबस्सुम ने हंसते हुए कहा, “शायद मैं तुम्हारी बात मान भी लेती लेकिन इस बात के बाद तो मैं पक्का कह सकती हूँ कि तुम झूठी हो। धर्म इस दुनिया की वो धुरी है जिस पर पूरी कायनात टिकी है. सब कुछ खत्म हो सकता है लेकिन धर्म ख़त्म नहीं हो सकता”
- “हो गया है मैम, मेरा यकीन कीजिए. 300 सालों में धर्म मज़हब अब कोई नहीं मानता... लोग हंसते हैं वो कहानियां सुनकर... स्कूल कॉलेज के ड्रामों में लोग इस्तेमाल करते हैं... कल्चर के तौर पर.. कि भई किसी ज़माने में ये होता था... पर कोई आप धार्मिक या मज़हबी नही है... वो सब ख़त्म हो गया है... अब ना कोई हिन्दू है, ना मुसलमान है, ना यहूदी है, ना ईसाई है. ये सब हम सिर्फ किताबों में पढ़ते हैं हिस्ट्री के तौर पर. अब हमारे यहाँ अब बस दो तरह के लोग हैं. एक गरीब और एक अमीर... और लड़ाई इन्हीं दोनों के बीच है”
कहते हुए नैना ने अपनी वो अजीब सी घडी जो उसने कुछ देर पहले उतार कर मेज पर रखी थी उसमें एक बटन दबाया. उसमें कुछ लाइट जलने लगी. बोली “मैम, ये एक टाइम टैलीपोर्टर है. इसमें आप जो भी कहेंगी, वो हमारी दुनिया में लगे ऑडियो ट्रांसमीटर में रिकॉर्ड होगी... जिसे हम अपका इंटरव्यू अपनी पूरी दुनिया को सुना पाएँगे”
“बकवास कर रही हो तुम नैना... ये सब एक मज़ेदार कहानी की तरह लग रहा है... लेकिन है कोरी गप्प... चलो मान लिया की तुम 300 साल बाद की दुनिया यानी 2326 से आई हो... ये भी मान लिया कि तुम लोग हिस्ट्री में जाकर पुराने लोगों का इंटरव्यू करते हो... तो बताओ... तुमने किस-किस का इंटरव्यू किया है अब तक.. बताओ?
- मैम, मैंने अभी तक किसी का इंटरव्यू नहीं किया है... ये मेरा पहला टाइम मशीन इंटरव्यू है... इसीलिए मैं नर्वस हूं” वो आगे बोली, “लेकिन मेरे सीनियर्स और जो मेरे चैनल के, और दूसरे चैनलों के बड़े जर्नलिस्ट है उन्होंने बहुत पुराने लोगों के इंटरव्यू किए हैं… उनमें आ...मुगल बादशाह अकबर हैं... मिर्जा गालिब है, राणा सांगा... महात्मा गांधी का इंटरव्यू भी हुआ है... आइंस्टीन का भी इंटरव्यू हो चुका है. इस बीट में सबसे बड़ा चैलेंज यही है मैम कि हम जब उस दौर में पहुँचते हैं तो लोगों को कन्विंस करना बहुत मुश्किल होता है की हम फ्यूचर से आए हैं.... जैसे अभी आप कंविंस नहीं हो रही... इसीलिए हमारे कुछ सीनियर जर्नलिस्ट पास्ट से वापस आए तो उन्हें बिना इंटर्वयू के लौटना पड़ा... जैसे चार्ली चैपलिन ने इसे प्रैंक कहा और इंटरव्यू नहीं दिया. ऐसे ही एक पोएट थे अल्लामा इकबाल उन्होंने भी कहा कि ये बकवास है. तुम कोई बेहरुपी हो जो मेरे साथ मजाक कर रहे हो. उन्होंने भी इंटरव्यू नहीं दिया. तो अक्सर ऐसा होता है कि खाली हाथ लौटना पड़ता... मगर मैम मैं खाली हाथ नहीं लौटना चाहती... ये मेरा पहला असाइंटमेंट है... एक्चुअली मेरे एडिटर ने मुझे पहले टाइम ट्रैवल असाइंटमेंट का चांस दिया तो उसने कहा कि मैं खुद ही चुन लूं कि किसका इंटरव्यू करना चाहती हूं... मैंने बहुत रिसर्च की... और फिर एक आइडिया आया... कि क्यों न मैं उसी शख्स का इंटरव्यू करूँ जिसने सबसे पहले इस टाइम मशीन की कल्पना की थी. यानि कि आप”
प्रोफेसर तबस्सुम उसे हैरानी से देख रही थीं... नैना बोलती जा रही थी। उसने कहा,
“आपके नाम के आइडिया के बाद मैंने वर्चुअल लाइब्रेरीज में आपके बारे में पढ़ाई की, रिसर्च की तो पता चला कि आप ने ही टाइम ट्रैवल का सबसे पहली थ्योरी दी थी, आइंस्टीन के बाद... फिर मैने आपकी चारों किताबें पढ़ी. An Introduction to Quantam Physics – The Pricnciple of Time – Theory of Time and relativity और चौथी किताब वो.... आ... हां A Brief History of the Future
- “क्या...” अचानक प्रोफेसर चौंक गई. “क्या कहा तुमने? चौथी किताब…”
अब उनके चेहरे पर हैरानी थी. बोलीं, “मैंने तो अभी सिर्फ तीन किताबें ही लिखी हैं और चौथी मैं लिखने वाली हूं और ये नाम A Brief History of the Future मैंने सोचा था कि मैं चौथी किताब का ये नाम रखूंगी... ये तुम्हें कैसे मालूम.. सच बताओ कौन हो तुम” अब वो सच में हैरान थीं। नैना बिल्कुल आराम से बोली, “मैम मैंने कहा न मैं तीन सौ साल बाद से आई हूं..”
अब प्रोफेसर कांप रही थीं... लेकिन ठीक उसी वक्त उस रूम का दरवाज़ा धड़ाम से खुला और दो बंदूकधारी अंग्रेज सिक्योरिटी गार्ड्स दरवाजे पर खड़े थे.. जो इमरजेंसी बटन प्रोफेसर ने कुछ देर पहले दबाया था... उसकी वजह से गार्ड्स आ गए थे... “Hands Up”
गार्ड्स ने बंदूक नैना की तरफ की और ज़ोर से चिल्लाए... डोंट मूव
नैना के चेहरे पर डर था... लेकिन अभी जो किताब वाली बात उसने प्रोफेसर को बताई थी... वो सुनकर प्रोफेसर के चेहरे पर भी हवाइंया उड़ रही थीं... वो समझ गयी थीं... कि ये लड़की जो कह रही है... वो बस यूं ही नहीं... कुछ तो है....
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