Success Story: मिलिए बिहार के उन भाई-बहन से, जो एक ही हफ़्ते में बने सरकारी अफसर, जानिए कैसे?

Published on 11 जुल॰ 2026

बिहार के हाजीपुर में पिता के निधन के बाद दादाजी की पेंशन के सहारे पढ़े भाई-बहन ने रचा इतिहास। अमित आनंद बने IBPS PO और अर्पिता सिंह BPSC से BPRO, जानिए उनकी प्रेरक सफलता की कहानी। 

हाजीपुर (बिहार): कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो किस्मत की लकीरों को भी झुकना पड़ता है। बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर से सफलता की एक ऐसी ही चौंकाने और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने पूरे राज्य को गौरवान्वित कर दिया है। एक ही घर के दो सगे भाई-बहन ने महज सात दिनों के भीतर दो अलग-अलग प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाएं पास कर इतिहास रच दिया है। अमित आनंद और उनकी बहन अर्पिता सिंह आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं, लेकिन इस कामयाबी के पीछे का दर्द और सस्पेंस किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

अचानक उठा पिता का साया: जब अंधेरे में डूब गया था इस परिवार का भविष्य

अमित और अर्पिता की जिंदगी हमेशा से इतनी खुशनुमा नहीं थी। जब ये दोनों अपनी उम्र के शुरुआती पड़ाव पर थे, तभी इनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। पिता की असमय मृत्यु ने हंसते-खेलते परिवार को गहरे सदमे और तंगहाली के दलदल में धकेल दिया था। समाज और रिश्तेदारों को लगने लगा था कि अब इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है। घर में कमाई का कोई जरिया नहीं बचा था और पढ़ाई का खर्च उठाना एक नामुमकिन सपना लगने लगा था।

दादाजी की वो इकलौती पेंशन: जिसके सहारे बुनी गई अफसरों वाली ये अनकही दास्तान

जब सारे रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब संकटमोचक बनकर सामने आए उनके दादाजी। दादाजी को मिलने वाली सरकारी पेंशन ही इस परिवार की आखिरी उम्मीद और सहारा बनी। बेहद सीमित आर्थिक संसाधनों और दादाजी की उसी पेंशन के पैसों को जोड़-जोड़कर मां ने दोनों बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। अमित और अर्पिता ने भी तय कर लिया था कि वे अपने परिवार के इस संघर्ष को बेकार नहीं जाने देंगे। उन्होंने सुख-सुविधाओं का त्याग किया, एक छोटे से कमरे को अपनी कर्मभूमि बनाया और दिन-रात किताबों की दुनिया में खो गए।

वो ऐतिहासिक सात दिन: जब एक ही हफ्ते में घर के आंगन में बरसीं दो-दो कामयाबियां

सालों की खामोश तपस्या का फल जब मिला, तो उसकी गूंज पूरे हाजीपुर में सुनाई दी। अमित आनंद ने सबसे पहले देश की सबसे कठिन बैंकिंग परीक्षाओं में से एक IBPS (इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन) की चयन प्रक्रिया को क्रैक किया। उन्हें बैंकिंग सेक्टर में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के प्रतिष्ठित पद पर चुना गया। अभी परिवार इस दोहरी खुशी का जश्न मना ही रहा था कि ठीक उसी हफ्ते एक और धमाका हुआ। उनकी सगी बहन अर्पिता सिंह ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के नतीजों में बाजी मार ली। अर्पिता को बिहार सरकार के अधीन ब्लॉक पंचायती राज अधिकारी (BPRO) के पद पर नियुक्त किया गया है।

वैशाली में पहली बार ऐसा चमत्कार: आंसुओं में डूबी मां का सीना गर्व से हुआ चौड़ा

हाजीपुर के स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक गलियारों के मुताबिक, वैशाली जिले के इतिहास में यह शायद पहला ऐसा दुर्लभ मामला है, जब एक ही परिवार के दो सगे भाई-बहन लगभग एक ही समय और एक ही सप्ताह के भीतर राजपत्रित और प्रतिष्ठित सरकारी अधिकारी बने हैं। आज जिस घर के बाहर कभी सन्नाटा पसरा रहता था, वहां बधाइयों का तांता लगा हुआ है। अपने बच्चों की इस अभूतपूर्व सफलता पर बात करते हुए अमित और अर्पिता की मां की आंखें छलक आईं। उन्होंने कहा कि यह उनके दिवंगत पति का आशीर्वाद और बच्चों की अटूट लगन है, जिसने दादाजी की पेंशन के एक-एक पैसे का कर्ज चुका दिया है। अमित और अर्पिता की यह जोड़ी आज देश के हर उस छात्र को हिम्मत दे रही है जो संसाधनों की कमी का रोना रोकर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं।

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