
इन 5 लोगों ने लाखों स्टूडेंट्स के लिए आसान कर दी पढ़ाई
Teachers Day 2026: एक अच्छा टिचर सिर्फ किताबों की नॉलेज नहीं देता बल्कि छात्रों को आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाता है. देश में कई ऐसे शिक्षक रहे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, अलग पढ़ाने के तरीके और शिक्षा के प्रति समर्पण से लाखों स्टूडेंट्स को नई दिशा दी. इनमें HC वर्मा, आनंद कुमार, आरके श्रीवास्तव, खान सर और एसआर रंगनाथन जैसे नाम शामिल हैं. किसी ने कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाया तो किसी ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मौका दिया. वहीं, कुछ शिक्षकों ने शिक्षा को किताबों और कक्षाओं से आगे ले जाकर आम लोगों तक ज्ञान पहुंचाने का काम किया.
HC वर्मा ने फिजिक्स को बनाया आसान
डॉ. हरीश चंद्र वर्मा यानी HC वर्मा का नाम फिजिक्स की पढ़ाई में काफी जाना-पहचाना है. बिहार के दरभंगा से जुड़े प्रोफेसर वर्मा लंबे समय तक IIT कानपुर में टिचर रहे. उनकी किताब Concepts of Physics इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय रही है. इस किताब ने कठिन फिजिक्स कॉन्सेप्ट को समझने में स्टूडेंट्स की मदद की. एजुकेशन और साइंस के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.
आनंद कुमार ने गरीब छात्रों को दिखाई IIT की राह
बिहार के आनंद कुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में Super 30 के जरिए अलग पहचान बनाई. उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई. यहां छात्रों को कम संसाधनों के बावजूद बेहतर तैयारी का अवसर मिला. उनके प्रयासों से कई स्टूडेंट्स ने IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जगह बनाई. आनंद कुमार की कहानी पर फिल्म भी बनी, जिसके बाद उनकी पहचान देश के साथ विदेशों में भी बढ़ी. उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में काम के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं.
आरके श्रीवास्तव ने 1 रुपये में पढ़ाकर बनाया रिकॉर्ड
पटना के मैथ्स टिचर आरके श्रीवास्तव ने शिक्षा को ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक पहुंचाने की कोशिश की. उन्होंने सिर्फ एक रुपये गुरु दक्षिणा लेकर पढ़ाने की पहल की. उनके बारे में बताया जाता है कि उनकी मदद से 950 से ज्यादा छात्र इंजीनियर बने. शिक्षा के प्रति उनके इस प्रयास के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया. उनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है. आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना छात्रों की मदद करना उनकी पहचान बनी.
खान सर ने आसान भाषा में समझाए प्रतियोगी परीक्षा के विषय
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले टिचर्स में खान सर का नाम काफी चर्चित है. उनका मूल नाम फैजल खान बताया जाता है और उनका संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से है. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की और भूगोल में एमए किया. पटना में पढ़ाना शुरू करने के समय उनकी कक्षा में केवल छह स्टूडेंट थे. बाद में उन्होंने 2019 में Khan GS Research Centre के जरिए ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया. सरल भाषा और रोचक उदाहरणों से पढ़ाने की शैली ने उन्हें छात्रों के बीच लोकप्रिय बनाया.
एसआर रंगनाथन ने भारत में पुस्तकालयों को नई दिशा दी
प्रोफेसर डॉ. एसआर रंगनाथन को भारत में लाइब्रेरी साइंस का जनक माना जाता है. उनका जन्म 9 अगस्त 1892 को तमिलनाडु के शियाली में हुआ था. उन्होंने मैथ्श के टिचर के रूप में करियर शुरू किया और बाद में लाइब्रेरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया. 1924 में उन्हें मद्रास यूनिवर्सिटी का लाइब्रेरियन बनाया गया. उन्होंने पुस्तकालयों को ज्यादा उपयोगी और पाठक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया. 1931 में उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियम बताए. उन्होंने कॉलन वर्गीकरण प्रणाली भी विकसित की, जिससे किताबों को व्यवस्थित करना आसान हुआ. उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 1957 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया.

सपना यादव
दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को लक्ष्य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.
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