क्या जिंदा है The Odyssey का सबसे बड़ा Villain, 3000 साल पुरानी कहानी आज भी हमारी क्यों लगती है

Published on 17 जुल॰ 2026

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Christopher Nolan की The Odyssey रिलीज हो गई है। जानिए करीब 3000 साल पुरानी इस कहानी में ओडीसियस कौन है और कैसे अहंकार, बदले तथा दूसरों पर हावी होने की इच्छा असली खलनायक है।

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द ओडिसी का असली खलनायक समझें- किसकी वजह से आगे बढ़ती है कहानी

The Odyssey Explained in Hindi: क्रिस्टोफर नोलन की बहुप्रतीक्षित फिल्म The Odyssey आज 17 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। समुद्र, युद्ध, राक्षसों और देवताओं से भरी यह कहानी पहली नजर में एक रोमांचक यात्रा लगती है। लेकिन इसकी परतें खोलें तो पता चलता है कि इसका असली संघर्ष घर लौटने का नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बैठे अहंकार, अधिकार और दूसरों पर हावी होने की इच्छा का है।

The Odyssey में मैट डेमन इसमें ओडीसियस की भूमिका निभा रहे हैं। पूरी तरह IMAX फिल्म कैमरों से शूट की गई इस फिल्म को एक भव्य ‘Mythic Action Epic’ के रूप में पेश किया गया है। लेकिन इसकी जड़ें आधुनिक सिनेमा में नहीं, करीब 2800 साल पुरानी एक ऐसी महागाथा में हैं जिसने सदियों पहले ही मनुष्य के मन में छिपे अहंकार को पहचान लिया था।

सवाल उठता है कि आखिर The Odyssey क्या है? इसका नायक कौन है? वह घर लौटने में दस साल क्यों लगा देता है? क्या समुद्री तूफान और राक्षस ही उसकी राह रोकते हैं या उसकी अपनी सोच भी उसकी मुश्किलें बढ़ाती है?

गौर से देखें तो इसका जवाब समुद्र में नहीं, मनुष्य के मन में छिपा है।

आखिर क्या है The Odyssey

The Odyssey प्राचीन यूनान का एक महाकाव्य है, जिसकी रचना का श्रेय यूनानी कवि होमर को दिया जाता है। माना जाता है कि होमर लगभग आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुए थे, हालांकि उनके जीवन के बारे में बहुत कम विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध है। The Iliad और The Odyssey उनकी दो सबसे प्रसिद्ध रचनाएं हैं।

The Iliad ट्रोजन युद्ध की कहानी है, जबकि The Odyssey उस युद्ध के बाद शुरू होती है। यह इथाका के राजा ओडीसियस की घर वापसी की यात्रा है। ट्रोजन युद्ध में दस वर्ष बिताने के बाद ओडीसियस अपने राज्य, पत्नी पेनेलप और बेटे टेलीमेकस के पास लौटना चाहता है। लेकिन घर पहुंचने में उसे दस वर्ष और लग जाते हैं।

इस यात्रा में उसे समुद्री तूफानों, एक आंख वाले साइक्लोप्स पॉलीफेमस, मोहक सायरन, जादूगरनी सर्सी, अप्सरा कैलिप्सो और समुद्र के देवता पोसाइडन का सामना करना पड़ता है। देखने में ये सभी उसके शत्रु हैं। लेकिन लगभग हर संकट की जड़ में शक्ति, स्वामित्व, बदला या अहंकार का कोई न कोई रूप मौजूद है।

कौन है ओडीसियस

ओडीसियस इथाका का राजा, पेनेलपी का पति और टेलीमेकस का पिता है। वह केवल तलवार और शारीरिक शक्ति के भरोसे लड़ने वाला योद्धा नहीं है। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी बुद्धि, रणनीति और मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में रास्ता खोज लेने की क्षमता है।

ट्रोजन युद्ध में यूनानियों को जीत दिलाने वाले प्रसिद्ध Trojan Horse की योजना भी परंपरागत रूप से ओडीसियस से जोड़ी जाती है। वह साहसी और चतुर है, लेकिन अपनी बुद्धिमत्ता पर उसे जरूरत से ज्यादा भरोसा भी है। उसे लगता है कि वह हर परिस्थिति को नियंत्रित कर सकता है।

यही सोच उसे असाधारण नायक बनाती है और यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन जाती है।

ओडीसियस कोई पूर्ण या निर्दोष नायक नहीं है। वह छल करता है, झूठ बोलता है, चेतावनियों के बावजूद जोखिम उठाता है और कई बार विजय का प्रदर्शन करने की इच्छा को रोक नहीं पाता। इसीलिए वह किसी देवता जैसा आदर्श पात्र नहीं, बल्कि हमारी तरह गलतियां करने वाला मानवीय नायक लगता है।

ओडीसियस अपने अहंकार में कई गलत फैसले लेता है

ओडीसियस अपने अहंकार में कई गलत फैसले लेता है

एक घोषणा, जिसने पूरी यात्रा बदल दी

ओडीसियस के अहंकार का सबसे बड़ा उदाहरण साइक्लोप्स पॉलीफेमस वाला प्रसंग है। पॉलीफेमस एक आंख वाला शक्तिशाली राक्षस है, जो ओडीसियस और उसके साथियों को अपनी गुफा में बंद कर देता है। वह उनमें से कुछ को मार भी देता है।

ओडीसियस उसे शराब पिलाता है। जब पॉलीफेमस उसका नाम पूछता है तो वह अपना नाम Nobody यानी कोई नहीं बताता है। इसके बाद ओडीसियस और उसके साथी उसकी आंख फोड़कर गुफा से सुरक्षित निकल जाते हैं।

यहां तक उसकी बुद्धि उसकी जान बचाती है। लेकिन खतरे से निकलने के बाद वह चुप नहीं रह पाता। वह समुद्र से पॉलीफेमस को अपना असली नाम बताकर ललकारता है। मानो उसकी जीत तब तक पूरी न हो, जब तक पराजित व्यक्ति यह न जान ले कि उसे हराने वाला कौन था।

पॉलीफेमस समुद्र के देवता पोसाइडन का पुत्र है। वह अपने पिता से ओडीसियस को दंड देने की प्रार्थना करता है। इसके बाद पोसाइडन उसकी घर वापसी को और कठिन बना देता है।

यहां समुद्र असली खलनायक नहीं है। असली खलनायक ओडीसियस का वह अहंकार है, जिसने सुरक्षित निकल जाने के बाद भी उसे पीछे मुड़कर अपनी जीत की घोषणा करने पर मजबूर किया।

आज भी क्या हम ऐसा नहीं करते? विवाद समाप्त होने के बाद अंतिम बात बोलना, सामने वाले को गलत साबित करना या अपनी जीत जताना कई बार नए विवाद की शुरुआत बन जाता है।

केवल ओडीसियस ही अहंकारी नहीं

The Odyssey की खूबी यह है कि इसमें अहंकार केवल नायक की कमजोरी नहीं है। लगभग हर प्रमुख पात्र किसी न किसी रूप में शक्ति और अधिकार की लड़ाई लड़ता दिखाई देता है।

पॉलीफेमस को अपनी शारीरिक ताकत पर घमंड है। उसे लगता है कि उसकी गुफा में आने वाले लोगों के साथ वह कुछ भी कर सकता है। ओडीसियस बुद्धि के अहंकार का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि पॉलीफेमस ताकत के अहंकार का। दोनों के बीच संघर्ष केवल नायक और राक्षस का नहीं, बल्कि दो प्रकार की श्रेष्ठता के बीच टकराव है।

पोसाइडन का क्रोध भी केवल पुत्र के घायल होने का दुख नहीं है। उसमें अपनी सत्ता को चुनौती दिए जाने की पीड़ा दिखाई देती है। ओडीसियस मानता है कि वह अपनी बुद्धि से हर संकट को मात दे सकता है। पोसाइडन मानो उसे बताना चाहता है कि समुद्र और मनुष्य का भाग्य अब भी देवताओं के अधीन है।

इस तरह दोनों के बीच टकराव ‘कौन ज्यादा शक्तिशाली है’ की लड़ाई बन जाता है।

पेनेलप को लेकर भी कहानी में अहम की लड़ाई है

पेनेलप को लेकर भी कहानी में अहम की लड़ाई है

पेनेलप पर अधिकार की लड़ाई

इथाका में ओडीसियस की अनुपस्थिति के दौरान कई युवक उसकी पत्नी पेनेलप से विवाह करना चाहते हैं। उनकी नजर में पेनेलप केवल एक स्त्री नहीं, बल्कि इथाका की सत्ता तक पहुंचने का माध्यम है। उन्हें लगता है कि ओडीसियस जीवित नहीं है और अब उसके घर, पत्नी तथा सिंहासन पर उनमें से किसी एक का अधिकार होना चाहिए।

यहां अहंकार का भी एक रूप है जो खाली दिखाई दे रहा है, उस पर मेरा अधिकार है।

इसके उलट पेनेलप चुपचाप प्रतीक्षा करने वाली असहाय स्त्री नहीं है। वह वर चुनने का दबाव टालने के लिए कहती है कि अपने ससुर के लिए कफन की बुनाई पूरी करने के बाद ही विवाह करेगी। वह दिन में कपड़ा बुनती और रात में उसे खोल देती है। इस तरह वह अपनी बुद्धि से वर्षों तक अपने जीवन पर नियंत्रण बनाए रखती है।

पुरुष उसे पुरस्कार की तरह देखते हैं, लेकिन पेनेलप खुद को किसी की जीत बनने से रोकती रहती है।

टेलीमेकस की अपने अस्तित्व की तलाश

ओडीसियस का बेटा टेलीमेकस पिता के बिना बड़ा हुआ है। उसके सामने चुनौती केवल घर पर कब्जा करने वाले लोगों को हटाने की नहीं है। उसे यह भी साबित करना है कि वह अब कमजोर बच्चा नहीं रहा।

वह अपने पिता को खोजते हुए अपनी पहचान भी खोजता है। उसकी यात्रा उस युवा की कहानी है, जो परिवार की विरासत का सम्मान तो करना चाहता है, लेकिन केवल अपने पिता की पहचान बनकर नहीं रहना चाहता।

टेलीमेकस के भीतर उभरता आत्मसम्मान जरूरी है। कहानी यहां आत्मसम्मान और अहंकार के बीच का महीन अंतर दिखाती है। आत्मसम्मान व्यक्ति को अपनी जगह बनाने की शक्ति देता है, जबकि अहंकार दूसरों की जगह छीनने के लिए उकसाता है।

प्रेम बंधन नहीं चाहता... यहीं एक बड़ी गलती होती है

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प्रेम के भीतर छिपा स्वामित्व

वहीं अप्सरा कैलिप्सो का भी किरदार कुछ इसी लाइन पर है। कैलिप्सो को ओडीसियस अपने द्वीप पर रोककर रखती है। वह उसे अमरता तक देने का प्रस्ताव करती है। बाहर से यह प्रेम और सुरक्षा जैसा लगता है, लेकिन इसके भीतर स्वामित्व की भावना भी दिखाई देती है कि यदि मैं तुम्हें सब कुछ दे सकती हूं तो तुम मुझे छोड़कर क्यों जाना चाहते हो।

नोएडा के प्राइवेट अस्पताल में साइकॉलजिस्ट रही युक्ति रस्तोगी कहती हैं कि यहीं यह प्राचीन कहानी आधुनिक रिश्तों से जुड़ जाती है। कई बार हम प्रेम के नाम पर सामने वाले की इच्छा और स्वतंत्रता को छोटा समझने लगते हैं। अपनी भावनाओं में हम दूसरे व्यक्ति के दिल की नहीं सुनते। उसकी पसंद को नहीं समझते। ऐसी ऑब्सेसिव प्रेम कहानियां हमने कई बार पर्दे पर देखी हैं।

लेकिन क्या किसी को रोक लेना प्रेम है या फिर यह अपने प्रेम को सामने वाले की स्वतंत्रता से ऊपर रखने का अहंकार है?

ओडीसियस का Thought Process: मुझे सब पता है

ओडीसियस का मन लगातार योजनाएं बनाता रहता है। वह खतरे को पहचानता है और तुरंत समाधान खोजता है। उसका विश्वास है कि हर मुश्किल का कोई न कोई बौद्धिक रास्ता अवश्य होगा।

फिल्म के बारे में डिस्कस करने पर युक्ति कहती हैं कि यह सही है कि यही सोच उसे बार-बार बचाती है, लेकिन उसके भीतर Illusion of Control यानी नियंत्रण का भ्रम भी पैदा करती है। उसे लगने लगता है कि उसकी बुद्धि हर परिणाम को उसके पक्ष में मोड़ सकती है। तभी वह फिजूल के रिस्क लेने से भी नहीं चूकता जिससे हालात कई बार और मुश्किल हो जाते हैं।

यहीं साहस और अहंकार एक-दूसरे में घुल जाते हैं।

मनोवैज्ञानिक की नजर से अहंकार

युक्ति का कहना है कि अहंकार हमेशा ऊंची आवाज या दूसरों को नीचा दिखाने के रूप में सामने नहीं आता। कई बार यह इस विश्वास में छिपा होता है कि मैं परिस्थितियों को दूसरों से बेहतर समझता हूं और मुझसे गलती नहीं हो सकती। ओडीसियस की बुद्धिमत्ता उसे संकट से बचाती है, लेकिन लगातार मिलने वाली सफलता उसके भीतर नियंत्रण का भ्रम भी पैदा करती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को आगे ले जाता है, लेकिन जब उसमें विनम्रता न रहे तो वही आत्मविश्वास विनाशकारी अहंकार बन सकता है।

घर लौटने से ज्यादा खुद तक लौटने की यात्रा

ओडीसियस की मंजिल इथाका है, लेकिन उसकी असली यात्रा उसके भीतर चलती है। शुरुआत में वह विजेता योद्धा है, जिसे अपनी बुद्धि और उपलब्धियों पर गर्व है। रास्ते में वह अपने साथी खोता है, असहाय होता है और दूसरों की सहायता पर निर्भर रहना सीखता है।

जिस व्यक्ति ने पॉलीफेमस को अपना नाम बताकर मुसीबत बुला ली थी, वही अपने घर पहुंचकर भिखारी का वेश धारण करता है। अब वह समझ चुका है कि हर जगह अपनी पहचान और शक्ति की घोषणा करना बुद्धिमानी नहीं होती। कभी-कभी जीतने के लिए सही समय की प्रतीक्षा और अपने अहंकार को शांत रखना जरूरी है।

The Odyssey में हर पात्र कुछ चाहता है - घर, सत्ता, प्रेम, सम्मान, स्वतंत्रता या बदला। समस्या चाहने में नहीं, बल्कि अपनी इच्छा को दूसरे की इच्छा से बड़ा मानने में है।

शायद यही कारण है कि 2800 साल पुरानी यह कहानी आज भी हमारी लगती है। आज हमारे सामने साइक्लोप्स या समुद्री देवता नहीं हैं, लेकिन दफ्तर, रिश्तों और सोशल मीडिया की बहसों में हम लगातार खुद को सही और दूसरों को गलत साबित करने में लगे रहते हैं।

The Odyssey हमें याद दिलाती है कि हर तूफान बाहर से नहीं आता। कुछ तूफान हम अपने भीतर के अहंकार से खुद पैदा करते हैं। ओडीसियस का सबसे बड़ा शत्रु वह नहीं था, जो समुद्र में उसका इंतजार कर रहा था। असली शत्रु वह आवाज थी, जो हर जीत के बाद उसके भीतर से कहती थी कि अब दुनिया को बताओ कि तुम कौन हो।