उत्तर प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए डिजिटल प्रणालियों को मजबूत कर रही है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए एमआईएसऔर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के सुचारू संचालन के लिए 6.55 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कर जारी कर दी है।
एमआईएस और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से बच्चों से जुड़ी जानकारी के बेहतर उपयोग को नई मजबूती मिलेगी।
- Published: 12 Sep 2026, 03:37 PM IST
- Last Updated: 12 Sep 2026, 03:37 PM IST
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के आंकड़ों के पारदर्शी प्रबंधन और उनकी शैक्षणिक प्रगति की सटीक निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, एमआईएस (यू-डायस प्लस) और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कुल 6.55 करोड़ रुपये की बजट स्वीकृति प्रदान की गई है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस स्वीकृत बजट के पारदर्शी और नियमानुसार उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बजट का आवंटन और एसएमसी के जरिए पारदर्शी खर्च
जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, कुल 655.01 लाख रुपये की धनराशि को दो मुख्य मदों में विभाजित किया गया है। एमआईएस (यू-डायस प्लस) प्रणाली के संचालन के लिए 262.00 लाख रुपये तथा चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए 393.01 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पूरी धनराशि विद्यालय स्तर पर गठित स्कूल प्रबंध समितियों (SMC) के माध्यम से निर्धारित स्वीकृत गतिविधियों पर व्यय की जाएगी, जिससे जमीनी स्तर पर आंकड़ों के संकलन में कोई व्यवधान न आए।
अपार आईडी से जुड़ेगा चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम
राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य हर छात्र के शैक्षणिक विकास की अलग और विशिष्ट ट्रैकिंग सुनिश्चित करना है। इसके तहत यू-डायस प्लस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और बच्चों की विशिष्ट 'अपार आईडी' (APAAR ID) को चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के साथ एकीकृत किया जाएगा। इससे प्रत्येक छात्र की विद्यालय में उपस्थिति, सीखने की क्षमता और एक से दूसरे स्कूल में स्थानांतरण की स्थिति को डिजिटल रूप से व्यवस्थित और ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे ड्रॉप-आउट दर में कमी आएगी।
जिला स्तर से विद्यालय स्तर तक सख्त मॉनिटरिंग ढांचा
सरकारी धन के उपयोग और योजना की प्रगति के लिए बहुस्तरीय निगरानी ढांचा तैयार किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एसएमसी स्तर पर हुए व्यय की पाक्षिक और मासिक समीक्षा करें। निर्धारित शासकीय पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं के आधार पर भौतिक और वित्तीय प्रगति की निरंतर जांच की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर आंकड़ों या धनराशि के उपयोग में अनियमितता न हो सके।