प्रधानमंत्री मोदी ने यूपीएससी के शताब्दी समारोह में परीक्षा प्रणाली में सुधार और परीक्षा चक्र को छोटा करने पर जोर ...और पढ़ें

पीएम मोदी का सभी आयोगों को संदेश
HighLights
परीक्षा चक्र को छोटा करने पर प्रधानमंत्री मोदी का जोर।
लोक सेवा से प्रेरित युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में लाना।
भविष्य की चुनौतियों जैसे डीपफेक से निपटने की तैयारी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना के सौ साल पूरे होने पर आयोजित शताब्दी समारोह के जरिए ही प्रधानमंत्री सभी आयोगों को यह संदेश दे दिया कि परीक्षा तंत्र में बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा साइकिल छोटी कैसे हो, सभी आयोग यह सुनिश्चित करना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि देश में आज रिफॉर्म एक्सप्रेस तेजी से चल रही है। ऐसे में परीक्षाएं कराने वाली एजेंसियों को भी रिफॉर्म पर तेजी से काम करना होगा। जो आज के समय की मांग है। इनमें परीक्षाओं को कराने में लगने वाला समय एक बहुत अहम विषय है। परीक्षाओं में कुछ महीनों की देरी युवाओं के लिए बड़ा संकट बन सकती है।
कोचिंग की फीस, रेंट, ट्रांसपोर्ट का खर्च, ये बहुत बड़ा बोझ उस परिवार पर होता है। इसलिए परीक्षाओं को तय समय पर कराने के सिद्धांत को अपनाना बहुत जरूरी है। यूपीएससी सहित देश के सभी चयन आयोगों को यह सुनिश्चित करना होगा, कि नियमों को शिथिल किए बगैर हमारी एग्जामिनेशन साइकिल छोटी कैसे हो?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नागरिकों की बदलती सोच को देखते हुए प्रशासनिक सेवाओं में सुधार की वकालत की और कहा कि हमें प्रशासनिक सेवाओं में ऐसे युवा चाहिए,जो लोक सेवा से प्रेरित हो न कि पद से। इसके लिए भर्ती के दौरान उम्मीदवारों की परख सिर्फ इस आधार न हो कि उसे कितना आता है बल्कि यह भी देखें कि वह युवा प्रशासनिक सेवाओं में क्यों आना चाहता है।
उन्होंने कहा कि जब मोटीवेशन सही होगा तो बदलती जन-आकांक्षाओं के साथ चलना और ढलना भी आसान होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि हमने वह दौर भी देखा है, जब माना जाता था कि सरकार ही माई-बाप है, लेकिन आज ये दौर है जिसमें हमारा मंत्र है, ‘नागरिक देवो भव।’ हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है। बता दें कि यूपीएससी की स्थापना एक अक्टूबर 1926 को हुई थी।
पीएम ने यह भी कहा
- तेजी से बदलते टेक्नालाजी के इस युग में हमें ऐसे प्रशासनिक सेवक तैयार करने होंगे जो आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भी सक्षम हो। इनमें इंफार्मेंशन वार, डीपफेक, क्लाइमेंट जस्टिस जैसे चैलेंज है। ऐसे में हमें चयन प्रक्रिया में इस पर ध्यान देना होगा।
- बेटियों की बढ़ी भागीदारी: पीएम ने बताया कि 1952 में सिविल सर्विसेज में सिर्फ तीन प्रतिशत महिलाएं थी, जो अब 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। वहीं 1976 में जब यूपीएससी के पचास साल पूरे हुए थे, तब से लेकर अब तक इसकी परीक्षा देने वालों की संख्या में 45 गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
- -यूपीएससी की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता व निष्पक्ष प्रक्रिया ही उसकी पहचान है। ये मूल्य न सिर्फ हमेशा बने रहना चाहिए बल्कि अपग्रेड भी करते रहना चाहिए।