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वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है और यूपीएससी की तैयारी भी इससे अछूती नहीं है. अनेक उम्मीदवार यह जानने को उत्सुक हैं कि एआई उनकी तैयारी को कैसे आसान और अधिक कुशल बना सकता है, वहीं कुछ को यह आशंका भी है कि क्या एआई अंततः भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों की आवश्यकता को समाप्त कर देगा. इस प्रश्न का उत्तर यूपीएससी की परीक्षा के मूल उद्देश्य में निहित है: यूपीएससी केवल जानकारी का नहीं बल्कि निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण करता है.
एआई सूचना का एक विशाल भंडार प्रदान कर सकता है. अगर आप भारत में गरीबी के कारण, जलवायु परिवर्तन की व्याख्या या संविधान के अनुच्छेद 21 के बारे में पूछते हैं तो एआई तुरंत सटीक जानकारी प्रदान करेगा, लेकिन एक आईएएस अधिकारी को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहां सूचना अधूरी होती है और मानवीय निर्णय सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है. उदाहरण के लिए बाढ़ग्रस्त जिले में सीमित संसाधनों के साथ किसे पहले बचाना है , बच्चों से भरा स्कूल या बुजुर्गों वाला गांव? यह गूगल का सवाल नहीं बल्कि मानवीय संवेदना, नैतिकता और तात्कालिक निर्णय का प्रश्न है जो एआई नहीं कर सकता. एडमिनिस्ट्रेशन में हर समस्या का समाधान पाठ्यपुस्तकों में नहीं मिलता और डीएम बनने के बाद ऐसी कई अनिश्चित स्थितियां आएंगी जहां तुरंत और प्रभावी निर्णय लेने होंगे.
यूपीएससी तैयारी में एआई के स्मार्ट इस्तेमाल के तरीके
एआई को अपनी तैयारी में बुद्धिमानी से प्रयोग करने के कई तरीके हैं. अगर आपको लक्ष्मीकांत का कोई चैप्टर समझने में कठिनाई हो रही है तो एआई उसे सरल भाषा में समझा सकता है. समाचार पत्रों में आए डब्ल्यूटीओ जैसे किसी विषय के बैकग्राउंड की जानकारी एआई से ली जा सकती है. यह मुख्य परीक्षा के उत्तरों की संरचना सुधारने, निबंध के लिए उद्धरण खोजने, वैकल्पिक विषयों के कठिन कॉन्सेप्ट्स को सरल बनाने में मदद कर सकता है. एआई से रिवीजन के लिए प्रश्न, फ्लैशकार्ड्स, माइंड मैप्स और टाइम टेबल की जांच करवाई जा सकती है. यह स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए एक्रॉनिम और सीखने की युक्तियां भी सुझा सकता है.
एआई से पूरा आंसर लिखवाकर रटना पड़ सकता है भारी
हालांकि, एस्पिरेंट्स को एक बड़ी गलती से बचना चाहिए. एआई से पूरा आंसर लिखवाना और उसे बस रटना. यह केवल जानकारी एकत्र करना है, न कि उसे आत्मसात करना. यूपीएससी परीक्षक एआई का आंसर नहीं बल्कि उम्मीदवार की अपनी समझ, मुद्दों को जोड़ने की क्षमता, उदाहरणों का उपयोग और निष्कर्ष लिखने की कला को देखता है.
एआई के दौर में मानवीय गुणों की अहमियत और बढ़ेगी
एआई के युग में आईएएस अधिकारियों का महत्व कम नहीं बल्कि बढ़ जाएगा. सूचना सभी के पास उपलब्ध है, लेकिन अंतर निर्णय लेने की गुणवत्ता का है. सहानुभूति, नेतृत्व और लोगों का विश्वास जीतने जैसे मानवीय स्किल एआई के पास नहीं हैं. सांप्रदायिक तनाव की स्थिति में एआई डेटा दे सकता है, लेकिन लोगों के बीच विश्वास स्थापित करना एक अधिकारी का ही काम है. सूखे की स्थिति में एआई वर्षा का ट्रेंड दिखा सकता है पर किस गांव को पहले पानी के टैंकर भेजने हैं यह निर्णय एडमिनिस्ट्रेशन को ही लेना होगा. प्रौद्योगिकी उपकरण बदल सकती है, लेकिन जनसेवा का मूल सार नहीं और यूपीएससी उन्हीं मानवीय गुणों का परीक्षण करता है.
यूपीएससी परीक्षा प्रक्रिया में भी एआई का बढ़ रहा इस्तेमाल
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यूपीएससी स्वयं परीक्षा प्रक्रिया को अधिक कुशल और निष्पक्ष बनाने के लिए एआई का उपयोग कर रहा है चाहे वह फेस मैचिंग हो या मुख्य परीक्षा के उत्तरों का मूल्यांकन. एआई एक महान समानता लाने वाला भी साबित हो रहा है. चाहे आप किसी गांव में हों या शहर में एआई एक 24 घंटे उपलब्ध एआई मेंटर और कम्पेनियन की तरह काम कर सकता है. अब आपको पुराने मासिक पत्रिकाएं पलटने या पास्ट ईयर क्वेश्चन्स ढूंढने में समय नहीं गंवाना पड़ता, एआई ये सब तुरंत उपलब्ध करा सकता है.
एआई को सहायक बनाएं, अपनी सोच का विकल्प नहीं
संक्षेप में, एआई यूपीएससी की तैयारी में क्रांति ला सकता है, इसे और अधिक सुलभ और कुशल बना सकता है. लेकिन इसकी सबसे महत्वपूर्ण सीमा को हमेशा याद रखना चाहिए: एआई सूचना दे सकता है, निर्णय नहीं. अपनी निर्णय लेने की क्षमता, आलोचनात्मक सोच और मानवीय गुणों को विकसित करना ही सफलता की कुंजी है. एआई का उपयोग एक उपकरण के रूप में करें, लेकिन उसे अपना विचार करने वाला न बनने दें.

सपना यादव
दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को लक्ष्य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.
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