गांव से एम्स और फिर UPSC तक का सफर, दूसरे प्रयास में ऐसे IAS बनीं अंकुर लाठर

Published on 23 अग॰ 2026

कम संसाधनों के बीच पली-बढ़ी अंकुर ने पढ़ाई में शुरू से ही शानदार प्रदर्शन किया. डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया और यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल की.

Written By : कविता गाडरी  | Updated at : 23 Aug 2026 07:11 AM (IST)

कम संसाधनों के बीच पली-बढ़ी अंकुर ने पढ़ाई में शुरू से ही शानदार प्रदर्शन किया. डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया और यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल की.

हरियाणा के हिसार जिले के छोटे से गांव राजगढ़ से निकलकर, एम्स दिल्ली से एमबीबीएस करने और फिर यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनने तक का अंकुर लाठर का सफर बहुत प्रेरणादायक माना जाता है. बहुत कम संसाधनों के बीच पली-बढ़ी अंकुर ने पढ़ाई में शुरू से ही शानदार प्रदर्शन किया. डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया और पहली कोशिश में असफल होने के बाद तैयारी जारी रखी और उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल की.

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फिलहाल अंकुर लाठर उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी है और अप्रैल 2026 से फर्रुखाबाद जिलाधिकारी और कलेक्टर के पद पर कार्यरत है. हाल ही में एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण के दौरान बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद एक बार फिर उनकी चर्चा हो रही है.

फिलहाल अंकुर लाठर उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी है और अप्रैल 2026 से फर्रुखाबाद जिलाधिकारी और कलेक्टर के पद पर कार्यरत है. हाल ही में एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण के दौरान बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद एक बार फिर उनकी चर्चा हो रही है.

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अंकुर लाठर का जन्म 13 दिसंबर 1989 को हरियाणा के हिसार जिले के राजगढ़ गांव में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई. बाद में उनके पिता डॉक्टर करण सिंह लाठर जो पशु चिकित्सा है, उनका तबादला हिसार हुआ तो अंकुर ने वहां डीएवी स्कूल में पढ़ाई की.

अंकुर लाठर का जन्म 13 दिसंबर 1989 को हरियाणा के हिसार जिले के राजगढ़ गांव में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई. बाद में उनके पिता डॉक्टर करण सिंह लाठर जो पशु चिकित्सा है, उनका तबादला हिसार हुआ तो अंकुर ने वहां डीएवी स्कूल में पढ़ाई की.

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अंकुर पढ़ाई में शुरू से ही काफी अच्छी थी, उन्होंने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 94 फीसदी और 12वीं में 91 फीसदी अंक हासिल किया. परिवार का भी उन्हें लगातार सहयोग मिला और पिता से उन्हें डॉक्टर बनने के प्रेरणा मिली.  स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंकुर ने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया. उन्होंने प्री मेडिकल टेस्ट पास किया और देश के प्रतिष्ठित एम्स दिल्ली में एमबीबीएस में एडमिशन लिया.

अंकुर पढ़ाई में शुरू से ही काफी अच्छी थी, उन्होंने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 94 फीसदी और 12वीं में 91 फीसदी अंक हासिल किया. परिवार का भी उन्हें लगातार सहयोग मिला और पिता से उन्हें डॉक्टर बनने के प्रेरणा मिली.  स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंकुर ने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया. उन्होंने प्री मेडिकल टेस्ट पास किया और देश के प्रतिष्ठित एम्स दिल्ली में एमबीबीएस में एडमिशन लिया.

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एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंकुर ने करीब 2 साल तक एम्स में डॉक्टर के तौर पर काम किया. मेडिकल का करियर स्थिर था, लेकिन अंकुर का टारगेट अब सिविल सेवा की ओर बढ़ चुका था. वह प्रशासन और जन सेवा के क्षेत्र में काम करना चाहती थी, इसी के चलते उन्होंने डॉक्टर के करियर को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू करने का फैसला किया.

एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंकुर ने करीब 2 साल तक एम्स में डॉक्टर के तौर पर काम किया. मेडिकल का करियर स्थिर था, लेकिन अंकुर का टारगेट अब सिविल सेवा की ओर बढ़ चुका था. वह प्रशासन और जन सेवा के क्षेत्र में काम करना चाहती थी, इसी के चलते उन्होंने डॉक्टर के करियर को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू करने का फैसला किया.

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अंकुर लाठर ने 2013 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. मेडिकल बैकग्राउंड होने के कारण उन्होंने मेडिकल साइंस को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना. पहली कोशिश में उन्हें असफलता मिली, हालांकि असफलता के बाद उन्होंने तैयारी छोड़ने की बजाय, फिर से तैयारी करके दोबारा परीक्षा दी. लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग से उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त की.

अंकुर लाठर ने 2013 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. मेडिकल बैकग्राउंड होने के कारण उन्होंने मेडिकल साइंस को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना. पहली कोशिश में उन्हें असफलता मिली, हालांकि असफलता के बाद उन्होंने तैयारी छोड़ने की बजाय, फिर से तैयारी करके दोबारा परीक्षा दी. लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग से उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त की.

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अंकुर लाठर 2016 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी है. अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई पदों पर काम किया. वह सितंबर 2018 से जुलाई 2020 तक मऊ की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रही. इसके बाद उन्होंने अमेठी में मुख्य विकास अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली.

अंकुर लाठर 2016 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी है. अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई पदों पर काम किया. वह सितंबर 2018 से जुलाई 2020 तक मऊ की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रही. इसके बाद उन्होंने अमेठी में मुख्य विकास अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली.

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वह बुलंदशहर खुर्जा विकास प्राधिकरण की वॉइस अध्यक्ष भी रही. इस दौरान उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण से जुड़े कई प्रोजेक्ट पर काम किया. वहीं अप्रैल 2026 में अंकुर लाठर को फर्रुखाबाद का जिला अधिकारी और कलेक्टर नियुक्त किया गया. जिला प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने के बाद वह लगातार सरकारी व्यवस्थाओं और संस्थाओं का निरीक्षण कर रही है.

वह बुलंदशहर खुर्जा विकास प्राधिकरण की वॉइस अध्यक्ष भी रही. इस दौरान उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण से जुड़े कई प्रोजेक्ट पर काम किया. वहीं अप्रैल 2026 में अंकुर लाठर को फर्रुखाबाद का जिला अधिकारी और कलेक्टर नियुक्त किया गया. जिला प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने के बाद वह लगातार सरकारी व्यवस्थाओं और संस्थाओं का निरीक्षण कर रही है.

Published at : 23 Aug 2026 07:11 AM (IST)

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