Vaibhav-Tilak Controvarsy: मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाज की मैदान में जमकर ठुकाई और उसके बाद तिलक वर्मा (Tilak Varma ) की वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) से बहस और गरमागरमी कई संकेत दे रही है। वैभव उम्र में जरूर किशोर हैं, लेकिन उन्होंने सीनियर्स के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है। यही सब चेन्नई में चल खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के फाइनल (Duleep-Trophy Final) में दिखने को मिला है। अब इस गरमागरमी (Vaibhav-Tilak Controvarsy) का वीडियो वायरल हो रहा है।
यहां बता दें, इस खिताबी मुकाबले में वैभव ईस्ट जोन के उपकप्तान और तिलक वर्मा साउथ जोन के कप्तान हैं।
— Asvanth (@asvanth1808) September 6, 2026
चेपॉक स्टेडिय में छाया सन्नाटा !
ब्हाइट बॉल से धमाल मचाने वाला 15 साल का लड़का जब रेड बॉल मुकाबले में मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाज को धुन रहा होता है तो चेपॉक स्टेडियम में थोड़ी देर को सन्नाटा छा जाता है। प्रतिद्वद्वियों के पसीने छूट रहे होते हैं। इसी बीच वैभव और तिलक के बीच बहस क्रिकेट दुनिया का ध्यान खींच लेती है। अब इस बहस पर तरह-तहर की चर्चा होने लगी है।
कामयाबी ने सब कुछ बदल दिया
वैभव की कामयाबी ने बेहद तेजी से बहुत कुछ बदल दिया है। पिछले सीजन तक जिस खिलाड़ी को क्रिकेट की दुनिया 'बेबी' या 'बच्चा' कहकर बुला रही थी, वही अब सीनियर घरेलू खिलाड़ियों के बीच टीम का वाइस कैप्टन है।
प्रतिद्वद्वियों के लिए चुनौती बना
दलीप ट्रॉफी से पहले IPL में वैभव की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने उसकी अलग पहचान बना दी। 15 साल की उम्र में बड़े-बड़े गेंदबाजों पर हमला करने वाला यह बल्लेबाज अब सिर्फ भविष्य का सितारा नहीं रह गया है। वह मौजूदा मुकाबलों में प्रतिद्वद्वियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
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दलीप ट्रॉफी के फाइनल में भी नहीं बदला अंदाज
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में 92 और 40 रन बनाने के बाद फाइनल में भी वैभव ने शुरुआत उसी अंदाज में की। मोहम्मद सिराज के ओवर्स में भी वैभव ने कोई नरमी नहीं बरती और चारों ओर रेड बॉल को उड़ाया। जानकारों की मानें, तो अब उसे रोकने के लिए सिर्फ फील्डिंग प्लान नहीं, बल्कि साइकोलॉजिकल दबाव की टैक्टिस भी आजमाई जा रही है।
तिलक का तंज- 'क्या यार, ये वाइस-कैप्टन'
फाइनल में ईस्ट जोन की पारी के दौरान वैभव और अभिमन्यु ईश्वरन ने तेजी से रन बनाए। दोनों के बीच शतकीय साझेदारी हुई। वैभव ने सीनियर गेंदबाजों पर भी बिना किसी भय के हमला जारी रखा।
इसी दौरान साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने वैभव को स्लेज करना शुरू किया। 11वें ओवर में उन्होंने कहा- 'क्या यार, ये वाइस-कैप्टन।'
वैभव भी डटा रहा
बात यहीं नहीं रुकी। दोनों के बीच बहस बढ़ी और तिलक वैभव की तरफ बढ़ते गए। उनका हाथ भी 'पंच' जैसी मुद्रा में दिखाई दिया। जवाब में वैभव पीछे हटने की बजाय उनके सामने डटा रहा। स्थिति बिगड़ती, इससे पहले अंपायर को आकर दोनों को अलग करना पड़ा।
कुछ सेकंड की बहस की क्रिकेट दुनिया में चर्चा
यह घटना भले ही कुछ सेकंड की थी, क्रिकेट दुनिया में इसकी चर्चा है। इसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या वैभव अब प्रतिद्वंद्वियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं ?
जहां तक उम्र का सवाल है तो खेल मैदान में प्रतिद्वंद्वि वे सब हथकंडे आजमाते हैं, जिससे उन्हें अपनी पराजय का अंदेशा होता है।
सिराज पर हमला पर बड़ी पारी से चूके
तेज गेंदबाज मोम्मद सिराज पर हमला बताता है कि वैभव कितना बदल चुका है। फाइनल में भी इसका उदाहरण देखने को मिला। वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। सीनियर पेसर के खिलाफ उसके शॉट्स में किसी तरह की झिझक नहीं दिखी।
पहली इनिंग की पहली पारी में 37 गेंदों में 44 रन, 5 चौके और एक छक्का। यह प्रदर्शन बताता है कि बड़े गेंदबाज उसके खेल के आड़े नहीं आ सकते।
इस बस के बीच उनकी पारी में भी वही पुरानी कहानी दोहराई गई। शुरुआत शानदार रही, लेकिन वे इसे बड़ी पारी में नहीं बदल सके। फिर वहीं चूक, शॉर्ट गेंद पर अतिरिक्त उछाल ने उसका बल्ला चूका दिया और टॉप एज के जरिए कैच हो गए।
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क्या सच में सीनियर्स को खटकने लगी है कामयाबी ?
जानकारों का मानना है कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि तिलक का रवैया 'जलन' या किसी व्यक्तिगत परेशानी का नतीजा था। मैदान पर स्लेजिंग क्रिकेट का पुराना हिस्सा रहा है और कई बार खिलाड़ी मुकाबले की गर्मी में एक-दूसरे को उकसाते हैं, लेकिन इस घटना ने एक दिलचस्प बदलाव जरूर सामने रखा है।
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