तो — विशाखा नक्षत्र
ना, नी, नू, ने — अनुराधा नक्षत्र
नो, या, यी, यू — ज्येष्ठा नक्षत
16 जुलाई से 23 जुलाई तक
दिनांक 16 को समय की चाल आपके अनुरूप होगी आप संवेदनशील होंगे। लोगों से मिलना-जुलना, जीवन का हर सम्भव तरीके से आनन्द उठा पाएंगे। 17, 18 को प्रतिष्ठादायक समय रहेगा। आपके एहसास और कौशल शानदार होंगे। जागरुकता और उपलब्धियां हासिल होगी। बेहतर पारिवारिक संसाधन और आय प्राप्ति के लिए जागरुकता बढ़ाएंगे। प्रकाशन, जनसम्पर्क आपके व्यवसाय को आगे बढ़ाएंगे। आप नए विचारों, नवीन आविष्कारों तथा गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे। 19, 20 को दिन भरपूर प्रसन्नता वाला रहेगा। कामकाज, दायित्वों वित्त और कर्तव्यों के बीच सन्तुलन बना रहेगा। 21, 22 व 23 को सोचे हुए कार्यों में रुकावट आएगी। घर से बाहर कम जाएं तो ठीक रहेगा। आराम करें।
ग्रह स्थिति
मासारम्भ में चन्द्रमा धनु राशि का द्वितीय भाव में, राहु कुंभ राशि का चतुर्थ भाव में, शनि मीन राशि का पंचम भाव में, मंगल वृषभ राशि का सप्तम भाव में, सूर्य मिथुन राशि का अष्टम भाव में, बुध + बृहस्पति + शुक्र कर्क राशि का नवम भाव में, केतु सिंह राशि का दशम भाव में है।
वृश्चिक राशि की शुभ-अशुभ तारीख़ें
| 2026 | शुभ तारीख़ें | सावधानी रखने योग्य अशुभ तारीख़ें |
| जनवरी | 8, 9, 10, 14, 15, 18, 19, 20 | 2, 3, 4, 11, 12, 21, 22, 29, 30, 31 |
| फरवरी | 5, 6, 10, 11, 12, 15, 16 | 8, 9, 18, 19, 26, 27 |
| मार्च | 4, 5, 6, 10, 11, 14, 15 | 7, 8, 17, 18, 25, 26, 27 |
| अप्रैल | 1, 2, 6, 7, 10, 11, 12, 28, 29 | 3, 4, 13, 14, 15, 21, 22, 23 |
| मई | 3, 4, 5, 8, 9, 25, 26, 30, 31 | 1, 2, 11, 12, 19, 20, 28, 29 |
| जून | 1, 4, 5, 21, 22, 23, 27, 28 | 7, 8, 15, 16, 24, 25 |
| जुलाई | 1, 2, 3, 19, 20, 24, 25, 28, 29, 30 | 4, 5, 6, 12, 13, 14, 21, 22, 31 |
| अगस्त | 15, 16, 20, 21, 22, 25, 26 | 1, 2, 9, 10, 18, 19, 28, 29 |
| सितम्बर | 11, 12, 13, 17, 18, 21, 22, 23 | 5, 6, 7, 14, 15, 24, 25 |
| अक्टूबर | 9, 10, 14, 15, 18, 19, 20 | 2, 3, 4, 12, 21, 22, 23, 30, 31 |
| नवम्बर | 5, 6, 10, 11, 12, 15, 16 | 8, 9, 18, 19, 26, 27 |
| दिसम्बर | 2, 3, 4, 8, 9, 12, 13, 14, 30, 31 | 5, 6, 15, 16, 17, 23, 24, 25 |
वृश्चिक राशि का वार्षिक भविष्यफल
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वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह साल धनदायक रहेगा। इस साल आपके पास में पैसा आयेगा खर्चा भी जोरदार रहेगा। स्वास्थ्य का पाया इस साल मजबूत रहेगा। आपका पूरा ध्यान व फोकस इस साल स्वास्थ्य पर ही रहेगा। कोई छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आएगी तो आप आयुर्वेद, होम्योपैथी आदि वैकल्पिक चिकित्सा से लाभ लेंगे। खान-पान व दिनचर्या में आवश्यक परिवर्तन अमल में लाएंगे। महत्वाकांक्षाएं खूब रहेंगी, तथा वे महत्वाकांक्षाएं काफी हद तक पूरी भी होंगी। पति-पत्नी में सम्बन्ध बहुत ही बढ़िया रहेंगे। दोनों एक दूसरे की भावनाओं और मूड को समझ कर आचरण करेंगे। इस वर्ष गम्भीर व घातक बीमारी की संभावना व आशंका नहीं है, इस साल घर के किसी वरिष्ठ सदस्य के स्वास्थ्य पर खर्चा होगा। उदर, विकार, अपच व वायु विकार संबंधी परेशानी से आप परेशान रह सकते हैं। भाईयों से सम्पत्ति व बटवारे को लेकर कई बार विवाद व तनाव की स्थितियां बनेगी, लेकिन आप वाक्पटुता, चतुराई से आप उन मामलों को निपटा लेंगे। आप वृश्चिक लग्न के जातक हैं। बुद्धि व दिमाग के मामले में आप बहुत तेज रहेंगे, जिनीपस रहेंगे, परंतु आपके दिमाग का लाभ दसरे लोग उठा सकते हैं। अगर आप राजकीय सेवा में हैं, तो आपको आगे बढ़ने के समुचित अवसर मिलेंगे। वरिष्ठ व्यक्ति व बॉस आपके काम से खुश रहेंगे, व आपके सम्पर्क में आने वाले सभी लोग भी आपसे संतुष्ट रहेंगे, जिससे ऑफिस में आपकी ख्याति होगी। प्राईवेट नौकरी में लक्ष्यों को पूरा करने का दबाव आप पर बना रहेगा। काफी हद तक आप लक्ष्यों को प्राप्त भी कर लेंगे। विद्यार्थीयों व करियर में बेहतरी के लिए प्रयासरत लोगों को नौकरी तो मिल जायेगी, परंतु प्रयास व परिश्रम काफी करना पड़ेगा। इस वर्ष भूमि, भवन, वाहन आदि की खरीद फरोख्त के योग बनते हैं, परंतु निवेश करने से पहले अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लें। आयकर, जीएसटी, रायल्टी व कर से जुड़ी समस्या का समाधान आपके पक्ष में होगा। 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य खर्चों पर नियत्रंण रखें, अन्यथा उधार लेने की भी नौवत आ सकती है। वाणी व क्रोध पर भी नियंत्रण आवश्यक है। शत्रु व षडयंत्र सक्रिय तो होंगे, लेकिन आपका बिगड़ कुछ भी नहीं पाएंगे। कोर्ट केस या जो विवाद चल रहा है, उस पर पैनी नजर आपको संकटों से उभारने में सहायक सिद्ध होगी। पति-पत्नी में आपसी तालमेल व सामजस्य कभी कभार गड़बड़ा सकता है। यह साल वृश्चिक राशि वालों के लिए जी तोड़ मेहनत करने का साल है। घर-परिवार के वरिष्ठ सदस्य या माता-पिता का स्वास्थ्य चिंता का कारण बन सकता है।
शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्य:-
इस साल आप उत्तम स्वास्थ्य का उपयोग करेंगे। स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता आपकी सफलता की कुंजी होगी। काम-काज की व्यस्तता के बीच में भी आप शरीर को प्राथमिकता देंगे। वृद्ध व वरिष्ठ व्यक्तियों को हड्डियों के रोग, जोड़ों में दर्द, कमरदर्द, पीठ दर्द जैसी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं। ज्यादा गरिष्ठ व तैलीय भोजन आदि से परहेज करेंगे। माता-पिता के स्वास्थ्य में गम्भीर व घातक उतार चढ़ाव 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य देखने को मिल सकते हैं। अस्पताल आदि पर खर्चा भी होगा। वाहन चलाते समय ट्रेफिक नियमों का पालन करें, वाहन द्वारा क्षति के योग भी हैं। घर के किसी बड़े-बुजुर्ग व वरिष्ठ व्यक्ति का स्वास्थ्य गड़बड़ हो सकता है, तथा अस्पताल पर भी खर्चा होगा।
व्यापार-व्यवसाय व धन :-
इस साल कारोबार में आपको लाभ प्राप्त होगा। आर्थिक पक्ष सुदृढ़ व सक्षम होगा, लेकिन आपको मेहनत पहले से ज्यादा करनी पड़ेगी। हालांकि पैसा आने से पहले जाने का रास्ता भी तैयार रहेगा। आर्थिक पक्ष में खीचतान लगी रहेगी। व्यापार व कारोबार में विस्तार की जो योजना पेडिंग चल रही थी उस दिशा में काम शुरू होगा। आपका पूरा ध्यान व फोकस ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी पर होगा । कोई नया महत्वपूर्ण काम आपको सुझाई देगा, तथा आप उस पर ध्यान देंगे। इस साल किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति या अधिकारी से आपकी मुलाकात लाभ के मार्ग खोल देगी। बड़े व्यक्ति के सान्निध्य से आपके काफी काम आसान हो जाएंगे। कई मामलों में स्वाभिमान आपकी उन्नति में बाधक बनेगा। क्योंकि स्वाभिमान के कारण आप अपने उसुलों व सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करेंगे। नौकरी में बॉस व अधिकारी आपके काम से संतुष्ट रहेंगे, आपको कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है । 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के बीच वक्री शनि के कारण आप अपने लाभ को नुकसान में परिवर्तित कर लेंगे, कोई गलत निर्णय हो जायेगा। काम में उदारता व लचीलापन घातक हो सकता है। ग्राहकों व पार्टीयों के साथ व्यवहार मृदु रखें, काम में क्वालिटी व गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। आर्थिक पक्ष को सुदृढ़ करने के लिए “श्रीसुक्त" का नियमित पाठ करें।
घर, परिवार, संतान व रिश्तेदार:-
वृश्चिक राशि के जातक कुछ क्रोधी स्वभाव के होते हैं। कई बार क्रोध व आवेश से बना बनाया खेल आप बिगाड़ लेंगे। मृदुभाषिता व उदारवादी दृष्टिकोण को अपने जीवन में अपनाएं यही आपके लिए शांति का मूल मंत्र रहेगा। दाम्पत्य सम्बन्धों में पति-पत्नी के रिश्तों में कभी-कभार तनाव की स्थितियां बनेंगी, लेकिन बड़े ही मनोवैज्ञानिक ढंग से आप हर परिस्थिति पर नियंत्रण बना लेंगे। संतान के करियर, अध्ययन व प्लेसमेंट को लेकर चिंता रहेगी। लेकिन विवाह, अध्ययन व करियर को लेकर स्पष्टता नहीं बन पायेगी। रिश्तेदार व सगे सम्बन्धियों से किसी भी प्रकार की उम्मीद करना बेमानी ही कहा जायेगा। सास, बहु, ननद-भोजाई, देवरानी-जेठानी जैसे उलझे हुए रिश्तों में सम्बन्ध धीमे-धीमे बेहतरी की तरफ चलेंगे। पारिवारिक व व्यावसायिक जीवन में बेहतर तालमेल बिठाने में आप सक्षम रहेंगे।
विद्याध्यन, पढ़ाई व करियर :-
देवगुरु बृहस्पति 2 जून के पश्चात् भाग्य स्थान में उच्च की राशि में आकर वहां पर अतिचारी होंगे अतः विद्यार्थीयों का प्रदर्शन अध्ययन में बेहतर बनेगा, आप सकारात्मक होकर परिश्रम करेंगे। पूर्ण रूप से एकाग्रचित होकर अपने अध्ययन व करियर पर फोकस रहेंगे। अपनी पढ़ाई, अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षा, नौकरी से सम्बन्धित परीक्षा में पूरी तैयारी करके प्रयास करेंगे, तो कोई कारण नहीं कि आप असफल हों, प्रेम-पसंग, आलस्य व प्रमाद को त्यागें, गायत्री मंत्र का जप करें, निश्चित ही विभागीय परीक्षा जॉब इंटरव्यू में सफलता आपके कदम चूमेगी। 31 अक्टूबर तक सफलता का क्रम जारी रहेगा। सोचे गए काम पूरे होंगे। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप्प, फेसबुक आदि से उचित दरी बनाकर रखें। इस वर्ष आप उन्नति की राह पर अग्रसर होंगे, परिस्थितियां आपको सपोर्ट करेंगी।
प्रेम प्रसंग व मित्र:-
पंचम स्थान में शनि के प्रभाव से इस वर्ष प्रेम के प्रस्ताव मिलेंगे। परंतु प्रेम-प्रस्ताव छम्य होंगे। प्रेम सम्बन्धों में आपके साथ धोखा हो सकता है। किसी पर भी आंख मूंदकर विश्वास नहीं करें। वृश्चिक लग्न के जातक स्पष्टवादी व बेवाक होते हैं। इस कारण कई बार प्रेम-प्रसंगों में गलत फहमियां व कटुता का रस घुल सकता है। मित्रों का इस वर्ष
साथ रहेगा। मित्रों की भीड़ में अच्छे व सच्चे मित्र आपको मिलेंगे। किसी जरूरतमंद मित्र की तरफ मद्द का हाथ बढ़ाएंगे वहीं किसी मित्र की मदद आपको भी मिलेगी।
वाहन, खर्च व शुभकार्य:-
आपका राशिपति मंगल वर्षारंभ में द्वितीय भाव में स्थित है, तथा 11 मई से 21 जून के मध्य मंगल अपनी स्वराशि (मेष राशि) में चलायमान होकर नवीन वाहन के योग की सृष्टि कर रहे है। इस साल आप नवीन वाहन की खरीद पर विचार करेंगे, खर्च बहुत ही ज्यादा होगा। इस वर्ष बढ़े हुए खर्चों से परेशान होकर आप फिजूलखर्ची पर लगाम लगाएंगे। कुछ आवश्यक खर्चों पर नियंत्रण करेंगे। जहां तक शुभ कार्य व मांगलिक प्रसंग का कार्यक्रम 27 जुलाई के बाद वर्ष के उत्तरार्द्ध में बन सकता है। व्यापार में विस्तार की योजना या संतान के अध्ययन करियर पर बड़ी राशि खर्च होने के योग बने हुए हैं, परंतु उसमें निवेश करना उपयुक्त होगा, क्योंकि भविष्य में उसका लाभ व प्रतिफल आयेगा।
हानि, कर्ज व अनहोनी:-
इस वर्ष धनहानि के योग कमजोर हैं। परंतु विश्वासघात के योग जरूर बने हुए हैं। रुपयों-पैसों को लेकर किसी पर भी विश्वास विश्वासघात का कारण बन सकता है। व्यापार में उधार देने की प्रवृत्ति से बचें अन्यथा लाभांश का बहुत बड़ा हिस्सा कहीं पर फंस सकता है। भूमि, भवन, वाहन आदि की खरीद को लेकर ऋण लेना पड़ सकता है। यह ऋण सम्पत्ति व समृद्धि में वृद्धि का कारण बनेगा, इसलिए इस ऋण को उपयुक्त ही कहा जायेगा। वाहन सावधानी पूर्वक चलावें। शराब दुव्यवर्सन व मोबाइल का प्रयोग वाहन चलाते समय नहीं करें, अन्यथा आप किसी अनहोनी को निमंत्रित कर देंगे।
यात्राएं :-
इस वर्ष अप्रैल से जुलाई के मध्य बृहस्पति सक्रांति करेंगे, अतः तीर्थ स्थान की यात्रा का कार्यक्रम परिवार के साथ बन सकता है। व्यापार में विस्तार को लेकर भी कुछ यात्राएं वर्षारंभ के साथ ही होंगी। यात्रा में खान-पान आदि का ध्यान रखें।
उपाय:- वर्ष की शुभता में वृद्धि के लिए वृश्चिक राशि के जातकों को नित्य हुनमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। भाईयों से प्रेम व मेल-झोल बढ़ाएं। मंगलवार को बदंरों को गुड़ व चने खिलावें। 6 » रती का मूंगा युक्त मंगलयंत्र गले में धारण करें। इससे आप सभी प्रकार के अनिष्ठ व विघ्नों से बचे रहेंगे।
वृश्चिक राशि की चारित्रिक विशेषताएं
आपकी राशि का स्वामी मंगल है। मंगल पुरुषार्थ व परिश्रम को परिलक्षित करता है। मंगल से प्रभावित जातक साहसी, कर्मठ, परिश्रमी व जुझारू प्रवृत्ति का होता है, ऐसा व्यक्ति परिस्थितियों की मार के सामने भी कभी नहीं झुकता है। मंगल तेजोमय व अग्नि तत्त्व प्रधान है। इसका प्राकृतिक स्वभाव दबंग, क्रोध युक्त, दंभी, हठी, दृढ़ प्रतिज्ञ व स्पष्टवादी पुरुषों का प्रजनन है।
वृश्चिक राशि का राशि चिह्न 'डंकदार बिच्छू' है। बिच्छू के करीब 21 नेत्र शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों पर होते हैं। इसलिए इस राशि का जातक किसी वस्तु का समस्त अवलोकन करने के बाद विषय की बारीकी को सहज ही पकड़कर अपने काम की वस्तु उसमें से ग्रहण कर लेता है। बिच्छू बड़ा ही तेज स्वभाव का व शीघ्र डंक मारने वाला प्राणी है। ऐसे व्यक्ति दूसरों की असावधानी से शीघ्र फायदा उठाने के लिए तत्पर रहते हैं। इस राशि में उत्पन्न व्यक्तियों के पूर्वार्द्ध साधारण तथा जीवन के अंतिम दिनों में भरे-पूरे व सर्व प्रभुत्व-संपन्न बन जाते हैं।
वृश्चिक राशि स्त्री जाति सूचक, जल तत्त्व प्रधान व रात्रि बली होती है। इस राशि के जातक रात्रि में अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं। यदि आप क्रोधित हो जाएं, तो फिर आप क्षमा करना नहीं जानते। मन में क्रोधाग्नि भीतर-ही-भीतर धधकती रहती है। यद्यपि बाहर से ज्ञात होता है कि आप शांत हो गए, परन्तु प्रतिहिंसा की भावना आपके अंदर और भी भयानक रूप धारण कर लेती है। आप प्रतिद्वंद्वी को निर्दयता से हानि पहुंचाने की चेष्टा करते हैं। ये शत्रु को धर दबोचने वाले, झगड़ालू व उन्मत व्यवहार के व्यक्ति होते हैं।
सामान्यता इस राशि में उत्पन्न जातक स्वस्थ एवं बलवान होते हैं तथा परिश्रम एवं लगन के द्वारा अपने शुभ एवं महत्त्वपूर्ण कार्यों को सम्पन्न करके उनमें सफलता अर्जित करते हैं। इनको विभिन्न विषयों का ज्ञान होता है तथा एक विद्वान के रूप में इनकी छवि रहती है। कुल या परिवार में ये श्रेष्ठ रहते हैं तथा मित्र एवं बंधु वर्ग के मध्य सम्माननीय रहते हैं। आत्मशक्ति की इनमें प्रबलता रहती है। इनकी महत्त्वाकांक्षा भी तीव्र होती है। धन-संग्रह के प्रति इनकी रुचि रहती है तथा धनार्जन में नैतिक सीमा का अनुपालन कम ही करते हैं। इनमें अल्प भावुकता रहती है तथा बुद्धि के द्वारा ही अधिकांश कार्यों को संपन्न करते हैं, साथ ही विज्ञान एवं गणित के क्षेत्र में ये ख्याति अर्जित करते हैं।
अतः इसके प्रभाव से आप स्वस्थ एवं बलवान पुरुष होंगे तथा स्वपराक्रम एवं परिश्रम से सांसारिक कार्यों में सफलता प्राप्त करेंगे। इससे आपके उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे तथा जीवन में धनैश्वर्य, वैभव एवं सुख-संसाधनों को अर्जित करके सुखपूर्वक इनका उपभोग करेंगे। आप में निर्भयता तथा लग्नशीलता का भाव भी विद्यमान होगा। फलतः कार्यक्षेत्र में प्रभावशाली होंगे तथा उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होंगे।
आप एक महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति होंगे तथा अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सर्वदा प्रयत्नशील रहेंगे। धन-संग्रह के प्रति भी आपकी रुचि रहेगी, परन्तु इससे आपके समीपस्थ लोग यदा-कदा असुविधा की अनुभूति करेंगे। भावुकता से आप जीवन में कम ही कार्य करेंगे, फलतः प्रसन्नतापूर्वक अपना समय व्यतीत करेंगे।
आप एक सहनशील स्वभाव के व्यक्ति होंगे तथा धैर्यपूर्वक अपने सांसारिक कार्यकलापों को सम्पन्न करके उनमें वांछित सफलता प्राप्त करेंगे। सरकार या उच्चाधिकारी वर्ग से आप नित्य आर्थिक लाभ अर्जित करेंगे तथा इनसे आपको सहयोग भी मिलता रहेगा, जिससे आपके अन्य कार्य भी यथासमय सिद्ध होंगे।
आपके स्वभाव में दया एवं उदारता का भाव भी विद्यमान होगा तथा अवसरानुकूल अन्य जनों को सुख-दुःख में सेवा तथा सहयोग प्रदान करेंगे। इससे अन्य लोग आपसे प्रसन्न तथा संतुष्ट रहेंगे। साथ ही सत्कर्मों को करने में आपकी रुचि रहेगी तथा यत्नपूर्वक उन्हें सम्पन्न करके मान-सम्मान एवं यश में अभिवृद्धि करेंगे। धनैश्वर्य एवं भौतिक सुखों के प्रति आपके मन में तीव्र लालसा रहेगी तथा इनकी प्राप्ति में आप अत्यधिक परिश्रम एवं पराक्रम का प्रदर्शन करेंगे।
धर्म के प्रति आपके मन में श्रद्धा रहेगी तथा समय-समय पर धार्मिक कार्यकलापों या तीर्थ-यात्राओं को मानसिक शांति के लिए सम्पन्न करेंगे। मित्र वर्ग में भी आप श्रेष्ठ एवं आदरणीय रहेंगे तथा उनसे इच्छित लाभ एवं सहयोग प्राप्त करेंगे। इस प्रकार आप परिश्रमी, संग्रहकर्ता एवं महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति होंगे तथा धनैश्वर्य से अपना समय व्यतीत करेंगे। युक्त होकर यदि आपका जन्म वृश्चिक राशि 'विशाखा नक्षत्र' के चतुर्थ चरण में हुआ है और आपका नाम 'तो' अक्षर पर है, तो आपका जन्म 16 वर्षों वाली बृहस्पति की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-व्याघ्र, गण-राक्षस, वर्ण-शूद्र, युज्जा-मध्य, हंसक-वायु, नाड़ी- अन्त्य, वश्य-द्विपद, पाया-तांबा, वर्ग-सर्प है। विशाखा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति सौम्य होते हैं तथा अपने शत्रुओं का सफाया बड़ी चतुरता से करते हैं।
यदि आपका जन्म वृश्चिक राशि 'अनुराधा नक्षत्र' (ना, नी, ने) में है, तो आपका जन्म 19 वर्ष वाली शनि की महादशा हुआ है। आपकी योनि मृग, गण-देव, वर्ण- विप्र, युज्जा-मध्य, योनि-मृग, वर्ण-विप्र, हंसक-जल, नाड़ी-आद्य, पाया-तांबा, योनि-सर्प है। अनुराधा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति गुप्त व्यसनों के आदी होते हैं। फिर भी अपने बुद्धि- चातुर्य से बहुत अधिक धन अर्जित करते हैं।
यदि आपका जन्म वृश्चिक राशि 'ज्येष्ठ नक्षत्र' (नो, या, यी, यू) में है, तो आपका जन्म 17 वर्ष वाली बुध की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-मृग, गण - राक्षस, वर्ण- विप्र, युज्जा- अन्त्य, हंसक-जल, नाड़ी-आद्य, पाया-तांबा, योनि प्रथम चरण की सर्प एवं बाकी तीनों चरण की हिरण है। ज्येष्ठ नक्षत्र को 'गण्डमूल' कहा गया है। इसमें जन्मे व्यक्ति बहुत तेजस्वी तथा अत्यधिक पराक्रमी होते हैं।
बिच्छू की आयु कम होती है, अतः वृश्चिक राशि वाले अल्पायु को प्राप्त होते देखे गए हैं। अचानक आक्रमण, दुर्घटना तथा घटनाचक्र के मोड़ से यह शीघ्र ही काबू में आ जाते हैं। इनको प्रायः तिक्त (खट्टा) स्वाद पसंद होता है तथा खाना खाते वक्त नींबू का प्रयोग ज्यादा करते हैं।
उपाय :- 4 » रत्ती का मूंगा 'मंगल यंत्र' से जड़वाकर धारण करें। बंदरों को भोजन व फल खिलाएं। मंगलवार को हनुमानजी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। ताम्रपात्र में रात्रि में जल भरकर रखें व प्रातःकाल उस जल को पिएं। लाल रंग का सुगन्धित रुमाल पास में रखें।