VVPAT पर्ची गिनवाने की मांग कर रहे थे स्टालिन, HC ने दिया झटका; विजय को बड़ी राहत

Published on 3 सित॰ 2026

Sep 03, 2026 11:41 am ISTलाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई।

Follow us on Google News

share

सिब्बल ने तर्क दिया कि चूंकि निर्वाचन आयोग की देरी के कारण 45 दिनों का समय निकल गया इसलिए याचिकाकर्ता को बिना किसी कानूनी विकल्प के नहीं छोड़ा जा सकता और इसके लिए रिट याचिका ही एकमात्र जरिया था।

Stalin was demanding a count of VVPAT slips HC deals a blow Vijay gets major relief

हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्टालिन की पार्टी को बड़ी राहत मिली है।

मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कोलाथुर विधानसभा सीट पर वीवीपैट की पूरी पर्चियों की पुनर्गणना कराने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। स्टालिन ने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के विधायक वीएस बाबू के निर्वाचन को रद्द कर खुद को विजयी घोषित करने की मांग की थी।

पीठ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की यह याचिका विचार योग्य नहीं है। इससे पहले सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश जी. राजागोपालन और दामा शेषाद्रि नायडू ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 329(b) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 80 के तहत चुनाव के नतीजों को केवल चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। आयोग ने कहा कि रिट याचिका के जरिए चुनाव परिणामों को रद्द करने की अनुमति देने से न्यायिक और चुनावी प्रक्रिया में अव्यवस्था पैदा हो जाएगी।

स्टालिन की दलीलें

स्टालिन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2024 के उस फैसले के तहत आता है जिसमें चुनाव में दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को 5 प्रतिशत ईवीएम के बर्न मेमरी या माइक्रोकंट्रोलर की जांच कराने का अधिकार दिया गया है।

नहीं काम आईं सिब्बल की दलीलें

सिबब्ल ने कहा कि नियमानुसार परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर सत्यापन का आवेदन देना होता है जो स्टालिन ने तीन दिनों के भीतर 7 मई ही दे दिया था। निर्वाचन आयोग ने 45 दिनों की चुनाव याचिका दायर करने की समय सीमा बीत जाने के बाद 29 जुलाई से 5 अगस्त के बीच 14 ईवीएम का सत्यापन किया। जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। एक पोलिंग स्टेशन संख्या 208 की बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट को डिटेक्ट ही नहीं कर सकी जिससे मशीन में स्टालिन का नाम तक प्रदर्शित नहीं हो पाया। इसके अलावा वीवीपीएटी और कंट्रोल यूनिट के बीच डेटा सिग्नलों की विसंगति भी पाई गई।

सिब्बल ने तर्क दिया कि चूंकि निर्वाचन आयोग की देरी के कारण 45 दिनों का समय निकल गया इसलिए याचिकाकर्ता को बिना किसी कानूनी विकल्प के नहीं छोड़ा जा सकता और इसके लिए रिट याचिका ही एकमात्र जरिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग के संवैधानिक और कानूनी तर्कों को स्वीकार करते हुए रिट याचिका को खारिज कर दिया।

आपको बता दें कि मई में घोषित चुनाव परिणामों में टीवीके उम्मीदवार वी.एस. बाबू को 82,997 वोट मिले थे, जबकि स्टालिन को 74,202 वोट मिले, जिससे वे 8,795 वोटों से चुनाव हार गए।