पहाड़ों से 'Work From Home' करना सस्ता या महंगा? लद्दाख में 1 महीने का बजट उड़ा देगा होश!

Published on 22 सित॰ 2026

पहाड़ों से ‘Work From Home’ करना सस्ता या महंगा? लद्दाख में 1 महीने का बजट उड़ा देगा होश!

पहाड़ों पर वर्ककेशन करना फायदेमंद है या नुकसान का सौदा? Image Credit source: Instagram/@anjali.aur.naman

पहाड़ों की ठंडी हवा, खूबसूरत वादियां और लैपटॉप पर काम…सुनने में ये जितना रोमांचक लगता है, जेब पर भारी भी पड़ सकता है. डिजिटल क्रिएटर कपल अंजलि और नमन ने हाल ही में लद्दाख में 1 महीने का वर्ककेशन (Ladakh Workcation Cost) बिताया. दो लोगों के रहने, खाने और घूमने का कुल खर्च 96,600 रुपए रहा. आइए जानते हैं कि इस बजट में क्या-क्या शामिल था और पहाड़ों में वर्ककेशन प्लान करने से पहले आपको क्या बातें पता होनी चाहिए.

रहने के खर्च को लेकर कपल का अनुमान और असलियत में काफी फर्क निकला. उन्हें लगा था कि एक महीने का कमरा 15 से 20 हजार रुपए में मिल जाएगा, लेकिन असल में उन्हें 30 हजार रुपए खर्च करने पड़े, यानी करीब 1 हजार रुपए हर रात के हिसाब से. इससे यह सबक मिलता है कि लेह जैसी जगहों पर या पीक सीजन में रहने का खर्च आपके बजट से ज्यादा हो सकता है.

खान-पान और रोजमर्रा का हिसाब

कपल के मुताबिक, घर के खाने और किराने के सामान पर 9,000 रुपए लगे. नाश्ते और हल्के-फुल्के स्नैक्स में 2,500 रुपए खर्च हुए, जबकि बाहर डिनर और कैफे में 5,000 रुपए लगे. इस तरह खाने-पीने पर कुल मिलाकर 16,500 रुपए का खर्च आया.

घूमना-फिरना और लोकल ट्रांसपोर्ट

कपल ने बताया कि घूमने-फिरने और आने-जाने पर भी अच्छा-खासा खर्च हुआ. होस्ट की मदद से कुछ दिन मुफ्त स्कूटर मिल गया, इसलिए स्कूटर रेंटल में सिर्फ 2,100 रुपए लगे. मनाली से लेह तक का सफर और लद्दाख के अंदर घूमने में करीब 30,000 रुपए खर्च हो गए. इसके अलावा दिल्ली वापसी की फ्लाइट का खर्च भी इसी कुल बजट में शामिल था.

कुल मिलाकर दो लोगों के एक महीने के खर्च का हिसाब देखें तो रहने के लिए 30,000 रुपए लगे. घूमने-फिरने और आने-जाने में 32,100 रुपए खर्च हुए. खाने-पीने और किराने के सामान पर 16,500 रुपए लगे, जबकि आना-जाना और दूसरे छोटे-मोटे खर्चों में करीब 18,000 रुपए लगे. इस तरह एक महीने में कुल 96,600 रुपए का खर्च आया. यह भी पढ़ें:वर्क फ्रॉम माउंटेनसिर्फ 19,500 रुपए में मनाली में रहना, खाना और वाई-फाई भी; देखें ये वायरल बजट!

तो आपका बजट हो सकता है आधा

जरूरी नहीं कि पहाड़ों में रहना हमेशा बजट फ्रेंडली हो. अगर आप सिर्फ एक जगह स्थिर रहकर लोकल फूड खाएं और ज्यादा ट्रेवल न करें, तो खर्च आधा हो सकता है. लेकिन अंजलि और नमन की तरह लेह-लद्दाख घूमना, मनाली से रोड ट्रिप करना और फ्लाइट से लौटना आपके बजट को बढ़ा देता है. यह भी पढ़ें:पहाड़ छोड़ Work From Home करने गोवा पहुंचा शख्स, सिर्फ 30,000 रु. में ले रहा समंदर किनारे विला का मजा; वायरल हुई कहानी

अभिषेक राय

अभिषेक राय

अभिषेक राय (Abhishek Roy) अभी TV9 भारतवर्ष के डिजिटल विंग में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) हैं. पत्रकारिता में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है और इस फील्ड में उनकी अपनी एक अलग पहचान है. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है. शुरुआत में वे भोपाल के 'पीपुल्स समाचार' अखबार (Peoples Samachar) से जुड़े. यहां उन्होंने प्रिंट मीडिया का काम सीखा. इसके बाद वे दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) ग्रुप में लंबे समय तक रहे. खास बात ये कि उन्होंने भास्कर के अखबार और वेबसाइट, दोनों जगह काम किया. इससे उन्हें पुरानी और नई, दोनों तरह की पत्रकारिता का अनुभव मिला. अभिषेक ने अहमदाबाद के 'जानो दुनिया' (Jano Duniya) न्यूज चैनल में भी काम किया. यहां उन्होंने टीवी मीडिया में अपनी काबिलियत दिखाई. अभिषेक को राजनीति और विदेशी मामलों की अच्छी समझ है. वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक कूटनीति को बहुत ही बारीकी से समझते हैं. हालांकि, वर्तमान में डिजिटल मीडिया की बदलती मांग को देखते हुए वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. इन दिनों वे ट्रेंडिंग खबरों, वायरल टॉपिक्स और हटके कंटेंट पर काम कर रहे हैं. अभिषेक के लिए पत्रकारिता महज एक पेशा या सिर्फ पाठकों तक सूचनाएं या खबरें पहुंचाना नहीं है. उनका विजन और उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है. वे मानते हैं कि एक पत्रकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि पाठकों को हर बार कुछ नया और अनूठा पढ़ने को मिले. कंटेंट ऐसा हो जो पाठकों की सोच के दायरे को विस्तृत करे और उन्हें एक नया नजरिया दे. अभिषेक को पत्रकारिता के साथ-साथ ट्रैवलिंग का भी शौक है. भागदौड़ भरी जिंदगी से जब भी फुर्सत मिलती है, वे पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं.

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