शहर की सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर कचरा फेंकने वालों पर अब नगर निगम की नजर रहेगी। रायपुर के सभी 10 जोन में इस महीने करीब 160 हाईटेक नाइट विजन कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की मदद से सड़क किनारे कचरा फेंकने, वाहन से कचरा उतारने या खुले में कचरा डा
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निगम के मुताबिक कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर संबंधित व्यक्ति या वाहन तक पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी। कैमरों को सोलर पैनल और माइक्रोचिप सिस्टम से संचालित किया जाएगा, जिससे बिजली की नियमित सप्लाई पर निर्भरता कम होगी।
अंधेरे में भी 50 मीटर तक रिकॉर्डिंग
कैमरों में नाइट विजन की सुविधा होगी। अंधेरे में भी करीब 50 मीटर तक की तस्वीर साफ रिकॉर्ड की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर स्ट्रीट लाइट की रोशनी में इसकी निगरानी क्षमता और बढ़ जाएगी।
निगम अधिकारियों के अनुसार कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाएगा। किसी जगह कचरा फेंकने की घटना सामने आने पर फुटेज के जरिए व्यक्ति या वाहन की पहचान कर कार्रवाई की जा सकेगी।
सीसीडी वेस्ट वाहनों पर भी रहेगी नजर
सिर्फ सड़क पर कचरा फेंकने वालों की ही नहीं, बल्कि कचरा कलेक्शन के लिए चलने वाले वाहनों की भी निगरानी की जाएगी। वाहनों के नंबर रिकॉर्ड किए जाएंगे और यह पता लगाया जा सकेगा कि कचरा कहां से उठाया गया और उसे किस जगह डाला गया।
मोबाइल ऐप से 24 घंटे मॉनिटरिंग
कैमरों की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप से जुड़ा सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसमें जोन कमिश्नर और संबंधित अधिकारी-कर्मचारी कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग कर सकेंगे।
निगम ने इसके लिए एक कमांड सेंटर तैयार करने की भी योजना बनाई है। कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों और वीडियो को जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
23 संवेदनशील जगहों पर कैमरे लगाने की शुरुआत
निगम ने पुलिस के साथ मिलकर शहर की करीब 23 संवेदनशील जगहों को चिह्नित किया है। इनमें व्यावसायिक और भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल हैं। इन स्थानों पर कैमरे लगाने का काम प्राथमिकता से किया जाएगा।
निगम अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण कचरा फेंकने के कई मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती। नई व्यवस्था में वीडियो फुटेज मिलने से कार्रवाई के लिए जरूरी साक्ष्य उपलब्ध हो सकेंगे।
तीन साल तक कैमरों का संचालन-संधारण
कैमरों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी कंपनी को तीन साल तक दी जाएगी। इसके लिए 15वें वित्त आयोग से स्वच्छता और निगरानी व्यवस्था के लिए मिले फंड का इस्तेमाल किया जाएगा।
रायपुर में रोज करीब 750 टन कचरा निकलता है
शहर से रोजाना करीब 750 टन कचरा प्रोसेसिंग प्लांट भेजा जाता है। इसके बावजूद सार्वजनिक जगहों पर कचरा फेंकने की समस्या बनी हुई है। निगम का मानना है कि कैमरों की निगरानी से खुले में कचरा डालने वालों पर अंकुश लगाने और सफाई व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिलेगी।