दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) की 10वीं-12वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट तैयार कर बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना शबाब आलम सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआ
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पुलिस ने जीटी रोड शाहदरा स्थित विकास मॉल के पास जाल बिछाकर सबसे पहले आरोपी नवनीत त्यागी को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर गिरोह के सरगना शबाब आलम और उसके साथी फरीद को भी दबोच लिया गया। आरोपियों के कब्जे से फर्जी मार्कशीट, लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
पूछताछ में सामने आया कि शबाब आलम ने वर्ष 2017 में हिमाचल प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान खोला था, जिसे स्कूल शिक्षा बोर्ड से पंजीकरण मिला था। हालांकि, अनियमितताएं पाए जाने पर बोर्ड ने उसका पंजीकरण रद्द कर दिया था। इसके बाद, उसने वर्ष 2019 से एनसीआर क्षेत्र में फर्जी मार्कशीट तैयार कर बेचने का नेटवर्क स्थापित कर लिया। यह गिरोह मुख्य रूप से सुरक्षा गार्ड, ऑफिस सहायक और अन्य ऐसी नौकरियों के अभ्यर्थियों को निशाना बनाता था, जिनके लिए 10वीं या 12वीं पास होना अनिवार्य होता है।
इस मामले पर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि बोर्ड की भूमिका केवल छात्रों का नामांकन, परीक्षा आयोजित करना और सफल अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र जारी करने तक सीमित है। उन्होंने इस तरह के किसी भी फर्जीवाड़े से बोर्ड का कोई लेना-देना होने से इनकार किया।
हमारा काम केवल परीक्षा आयोजित करना: डॉ शर्मा
डॉ. शर्मा ने कहा, "हमारा काम केवल छात्रों का एनरोलमेंट करना, परीक्षा आयोजित करना और उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना है। इसके अलावा किसी भी संस्थान या ऐसी गतिविधि में बोर्ड की कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं रहती। हमारे पास केवल उन्हीं विद्यार्थियों का रिकॉर्ड होता है, जिन्होंने बोर्ड से विधिवत पंजीकरण कर परीक्षा उत्तीर्ण की है।"
मामला संज्ञा में आया तो दोषियों के खिलाफ करेंगे कार्रवाई
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बोर्ड के नाम पर कोई व्यक्ति या गिरोह फर्जी मार्कशीट तैयार करता है या किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा करता है और मामला बोर्ड के संज्ञान में आता है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने सरकारी और निजी संस्थानों से अपील की कि भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का बोर्ड से सत्यापन अवश्य कराएं, ताकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।