दिल्ली में 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवा नहीं रोकी गई: रेल कॉरपोरेशन का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, कहा- 303 में से 45 स्टेशनों पर ही आवाजाही रोकी

Published on 14 अक्टू॰ 2026

नई दिल्ली1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो ट्रेन सेवाओं में न कटौती की गई नही सेवा रद्द की गई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आदेश पालन हलफनामे में यह जानकारी दी।

DMRC ने बताया कि 303 में से 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट सीमित की गई थी। वहीं, 258 स्टेशन यानी मेट्रो नेटवर्क का 85% से ज्यादा हिस्सा पूरी तरह चालू रहा।

पुलिस के कहने पर 45 स्टेशन पर आवाजाही रोकी

DMRC ने कहा कि 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट सीमित करने का फैसला पुलिस के आकलन के आधार पर लिया गया था।

कॉरपोरेशन ने कहा कि यह कदम पुलिस के निर्देशों के मुताबिक उठाया गया। केवल 45 स्टेशन प्रभावित हुए, जो पूरे नेटवर्क का 15% हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दाखिल

कॉरपोरेशन ने यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश बाद दाखिल की। कोर्ट ने दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए कई मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनें रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने DMRC और अन्य पक्षों को आदेश पालन हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया था।

निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान

प्रदर्शन का आह्वान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कुछ छात्र संगठनों ने किया था। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

इन संगठनों ने निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था।

2 याचिकाएं दाखिल की गई थीं

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो और यहां आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगाई जाए। इसके बावजूद शनिवार को कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हुआ। इस पर

इसके बाद कोर्ट ने रविवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली के अधिकारियों को नोटिस जारी कर मंगलवार तक जवाब मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। इंटरनेट बाधित नहीं होना चाहिए और लोगों की आवाजाही नहीं रोकी जानी चाहिए।

सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर 2 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने इस पर सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा।

वहीं, एडवोकेट कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े, शोएब आलम और शादान फरासत ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा।

10 अक्टूबर: जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी ने SIR के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को धरने का ऐलान किया था। हालांकि दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रदर्शन रोक दिया था।

पार्टी की टॉप लीडरशिप अभिजीत दीपके,सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान से ही हिरासत में ले लिया था। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तीनों को रविवार सुबह करीब 10 बजे रिहा करने का आदेश दिया था। तीनों 23 घंटे पुलिस कस्टडी में रहे।

वहीं अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और 2 पूर्व सीएम समेत 7000 लोगों को भी हिरासत में लिया था। दो जगह पथराव भी हुआ था, जिसमें पुलिस के 7 जवान घायल हुए थे।

-------------------------------

ये खबर भी पढ़ें:

सुप्रीम कोर्ट बोला- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लें:मेट्रो-इंटरनेट बहाल करें; CJP प्रदर्शन में 45 मेट्रो स्टेशन बंद और 7000 लोग कस्टडी में लिए थे

कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को प्रदर्शन बुलाया था। इस दौरान पुलिस ने 7,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो-ट्रेन सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने सुनवाई की। पढ़ें पूरी खबर…

.