चेन्नई में चीफ बैंक मैनेजर ने किया सुसाइड, 10 साल में 500 बैंककर्मियों ने दी जान, आखिर क्यों?

Published on 4 अक्टू॰ 2026

चेन्नई में चीफ बैंक मैनेजर ने किया सुसाइड, 10 साल में 500 बैंककर्मियों ने दी जान, आखिर क्यों?

बैंक के कर्मचारियों पर क्या ज्यादा दबाव है?

बैंकिंग सेक्टर में काम के दबाव और कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ को लेकर बहस के बीच चेन्नई से एक और मामला सामने आया है. इंडियन बैंक के हेड ऑफिस में आईटी डिवीजन के चीफ मैनेजर कनिष्क बाजपेयी ने शनिवार शाम बैंक की चौथी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. यह बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा कोई पहला मामला नहीं है. पिछले कुछ सालों में बैंक कर्मचारियों की आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें वर्क प्रेशर, टारगेट, सीनियर का दबाव और नौकरी से जुड़ी दूसरी परेशानियों का जिक्र मिला है.

फरवरी 2026 में राज्यसभा में CPI(M) सांसद एए रहीम ने दावा किया कि पिछले एक दशक में देशभर में करीब 500 बैंक कर्मचारी वर्क रिलेटेड स्ट्रेस, हैरेसमेंट और वर्कप्लेस एब्यूज की वजह से आत्महत्या कर चुके हैं. हालांकि, यह आंकड़ा सरकार का आधिकारिक ऑल-इंडिया डेटा नहीं है, बल्कि संसद में रखा गया दावा है. मगर मीडिया रिपोर्ट्स देखें तो आए दिन कर्मचारियों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आती रहती हैं.

राज्यसभा में सांसद एए रहीम ने 2021 से 2024 के बीच के कई मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि बैंक कर्मचारियों पर बढ़ते टारगेट और काम के दबाव का असर गंभीर है. उन्होंने बताया कि एक यूनियन बैंक के चीफ मैनेजर ने अपने नोट में असंभव टारगेट नहीं देने की बात लिखी थी. तमिलनाडु में एक ब्रांच मैनेजर की मौत का भी जिक्र किया गया, जबकि केरल में एक महिला बैंक मैनेजर के मामले में वर्क प्रेशर की बात सामने आई थी. हालांकि, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में बैंक कर्मचारियों की आत्महत्या का ऐसा अलग से साल-दर-साल ऑल-इंडिया आंकड़ा साफ तौर पर उपलब्ध नहीं है.

कर्मचारियों की आत्महत्या के मामले

  1. 2026 में सामने आया यूनियन बैंक का मामला- सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच मैनेजर दुर्गेश श्रीवास्तव की मौत का मामला सामने आया. पुलिस के मुताबिक वह अपनी कार में मृत मिले थे और मौके से एक पत्र भी मिला. पुलिस ने शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या माना, लेकिन मामले की जांच जारी है. इस केस में खास बात यह है कि उपलब्ध रिपोर्ट में वर्क प्रेशर को मौत की वजह के तौर पर स्थापित नहीं किया गया. परिवार की ओर से भी ऐसी कोई अंतिम वजह सामने नहीं आई थी.
  2. बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ मैनेजर का मामला- जुलाई 2025 में महाराष्ट्र के बारामती में बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ मैनेजर शिव शंकर मित्रा की मौत हुई. पुलिस के मुताबिक उनके पास से एक नोट मिला था, जिसमें उन्होंने बैंक के काम के दबाव को अपनी मौत की वजह बताया था. मित्रा ने इससे कुछ दिन पहले इस्तीफा भी दिया था. पुलिस के अनुसार इस्तीफे में हेल्थ इश्यू और वर्क प्रेशर का जिक्र था. बैंक ने उन्हें 90 दिन के नोटिस पीरियड के कारण तत्काल रिलीव नहीं किया था. पुलिस ने यह भी कहा था कि नोट में किसी बैंक अधिकारी को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था और मामले की जांच जारी थी.
  3. प्राइवेट बैंक कर्मचारी ने सीनियर पर लगाए आरोप- मार्च 2025 में बेंगलुरु में ICICI Bank के रीजनल हेड ऑफ सेल्स विवेक समदर्शी की मौत का मामला सामने आया. उनके भाई ने पुलिस में शिकायत देकर दो सीनियर अधिकारियों पर कथित वर्कप्लेस हैरेसमेंट और अत्यधिक दबाव का आरोप लगाया. परिवार के मुताबिक विवेक ने सीनियर अधिकारियों की ओर से लगातार अपमान और दबाव की बात बताई थी. पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया और मामले की जांच शुरू की. यह केस सरकारी बैंक से अलग है और दिखाता है कि बैंकिंग सेक्टर में वर्कप्लेस स्ट्रेस का सवाल सिर्फ PSU बैंकों तक सीमित नहीं है. हालांकि, इस मामले में परिवार के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.
  4. बैंक कर्मचारी ने छोड़ा 5 पेज का नोट- जुलाई 2024 में गाजियाबाद में 27 साल की शिवानी त्यागी की मौत का मामला सामने आया. वह नोएडा में एक बैंक से जुड़े कॉर्पोरेट ऑफिस में रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर काम कर रही थीं. उनके परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें सहकर्मियों की ओर से लगातार बुलिंग और हैरेसमेंट का सामना करना पड़ रहा था. पुलिस के मुताबिक एक पांच पेज का नोट मिला था और परिवार की शिकायत के आधार पर कई सहकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. बाद में पुलिस ने कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी की. रिपोर्ट के मुताबिक शिवानी ने नौकरी से इस्तीफा देने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में उन्हें टर्मिनेशन लेटर मिला.
  5. यूनियन बैंक के चीफ मैनेजर का मामला- फरवरी 2024 में गुजरात के जूनागढ़ में यूनियन बैंक के चीफ मैनेजर सियाराम प्रसाद की मौत का मामला सामने आया. रिपोर्ट के मुताबिक वह लोन डिस्बर्समेंट टारगेट को लेकर दबाव में थे. उनके नोट में असंभव टारगेट और कर्मचारियों पर दबाव का जिक्र बताया गया. यह केस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बैंक के मुख्य बिजनेस टारगेट और कर्मचारी के दबाव के बीच संबंध सामने आया. बैंकिंग यूनियनों ने भी इस तरह के मामलों में टारगेट और सीनियर अधिकारियों के दबाव को बड़ा मुद्दा बताया है.
  6. UCO Bank के युवा ब्रांच मैनेजर की मौत- फरवरी 2024 में चेन्नई में UCO Bank के 29 वर्षीय ब्रांच मैनेजर सूर्यनारायण की मौत का मामला सामने आया. वह ओरगडम ब्रांच में तैनात थे और पीछे पत्नी तथा एक साल की बेटी छोड़ गए. बैंकिंग अधिकारियों के संगठन ने इस मामले में वर्क-लाइफ बैलेंस, देर रात की मीटिंग और काम के दबाव को लेकर चिंता जताई थी. रिपोर्टों में ब्रांच में हुए गोल्ड लोन फ्रॉड से जुड़े दबाव का भी जिक्र आया.

मामलों को देखें तो किस तरह का दबाव सामने आया?

रिपोर्ट किए गए मामलों को देखें तो बैंक कर्मचारियों से जुड़ी आत्महत्या की खबरों में अलग-अलग तरह के कारण सामने आए हैं.

  • टारगेट प्रेशर: लोन डिस्बर्समेंट, रिकवरी और दूसरे बिजनेस टारगेट.
  • वर्कलोड: कम स्टाफ के बीच ज्यादा काम और लंबे समय तक काम करने की शिकायतें.
  • सीनियर का दबाव: कुछ मामलों में परिवार या कर्मचारी की ओर से अपमान, धमकी या हैरेसमेंट के आरोप.
  • जॉब सिक्योरिटी: 2024 में Paytm Payments Bank के एक कर्मचारी की मौत के मामले में पुलिस ने शुरुआती जांच में संभावित नौकरी जाने के डर को वजह बताया था.
  • ऑडिट और लोन का दबाव: कुछ मामलों में ब्रांच में हुए लोन या ऑडिट से जुड़े विवादों का जिक्र सामने आया.
  • निजी वजह: हर केस को वर्क प्रेशर से जोड़ना सही नहीं है. उदाहरण के लिए 2026 में महाराष्ट्र के एक बैंक कर्मचारी के मामले में पुलिस के मुताबिक मौत से पहले बीमारी को लेकर डर का जिक्र मिला था.

स्टाफ की कमी कितनी है?

वर्क प्रेशर का एक सीधा ताल्लुक स्टाफ की कमी से भी होता है. कम लोगों को जब ज्यादा लोगों का काम करना पड़ता है तो तनाव जैसी स्थिति में जाने की आशंका कई बार होती है. राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए एए रहीम ने लोकसभा में दिए आंकड़ों का हवाला दिया. उनके मुताबिक जून 2025 तक पब्लिक सेक्टर बैंकों में 32,567 पद खाली थे. यानी एक तरफ बैंकिंग सेक्टर में काम और बिजनेस बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्टाफ की कमी का मुद्दा भी सामने है. इसी को बैंकिंग यूनियनें बढ़ते वर्कलोड और टारगेट प्रेशर से जोड़ती रही हैं.

क्या बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव आत्महत्या की वजह बन रहा है?

इससे जुड़े जो भी मामले सामने आए हैं उनमें इतना जरूर दिखता है कि कई बैंक कर्मचारियों की मौत से पहले वर्क प्रेशर, टारगेट, हैरेसमेंट या नौकरी से जुड़ी परेशानियों का जिक्र हुआ. सबसे बड़ी समस्या डेटा की है. करीब 500 बैंक कर्मचारियों की आत्महत्या का दावा संसद में जरूर रखा गया है, लेकिन बैंक कर्मचारी के प्रोफेशन के आधार पर ऐसा विस्तृत सरकारी डेटाबेस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, जिससे साल, बैंक, पद और कारण के हिसाब से पूरे देश की तस्वीर निकाली जा सके.

इसलिए फिलहाल तस्वीर दो हिस्सों में है. एक तरफ करीब 500 मौतों का दावा है, दूसरी तरफ हाल के वर्षों में सामने आए कई ऐसे केस हैं जिनमें वर्क प्रेशर या वर्कप्लेस विवाद का जिक्र हुआ. सवाल अब यह है कि क्या बैंकिंग सेक्टर के पास कर्मचारियों के मानसिक दबाव और वर्कलोड को मापने और रोकने का कोई मजबूत सिस्टम है? भले ही प्रेशर आत्महत्या का मेन कारण न रहा हो, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स की बिनाह पर ऐसे सवालों और आशंकाओं को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता है.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

Read More

google button