महाराष्ट्र के बाद अब हरियाणा में भी दूध के भाव उछाल मार सकते हैं। डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने वीटा प्लांट में सौंपा ज्ञापन तो कई गांवों में महापंचायत कर 100 रुपये प्रति लीटर भाव तय करने का बना माहौल, नियम तोड़ने पर जुर्माने का ऐलान।
कुरुक्षेत्र में दूध के दाम बढ़ाने के लिए DFA के सदस्यों ने वीटा प्लांट के प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा।
- Published: 29 Aug 2026, 01:22 PM IST
- Last Updated: 29 Aug 2026, 01:22 PM IST
हरियाणा के आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर जल्द ही बड़ा झटका लगने वाला है। प्रदेश भर में दूध की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की सुगबुगाहट तेज हो गई है। एक तरफ जहां डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन (DFA) ने वीटा (Vita) के विभिन्न प्लांट्स में पहुंचकर प्रति किलो दूध पर ₹2 से ₹3 की सीधी वृद्धि की आधिकारिक मांग रखी है, वहीं दूसरी ओर कई ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालक स्वयं एकजुट होकर दूध का न्यूनतम भाव ₹100 प्रति किलो तय करने की रणनीति बना रहे हैं।
यदि यह बदलाव लागू होता है, तो केवल दूध ही नहीं बल्कि दही, पनीर, मक्खन और आगामी त्योहारों के सीजन में मिठाइयों के दाम भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकते हैं।
हिसार के राजथल से सुलगी चिंगारी, कई जिलों में गूंजी आवाज
दूध के दाम में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की इस मुहिम की शुरुआत हिसार जिले के हांसी (नारनौंद) स्थित राजथल गांव से हुई। यहां पशुपालकों ने बैठक करके निर्णय लिया कि 4 सितंबर से भैंस का दूध ₹100 प्रति किलो और गाय का दूध ₹80 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाएगा।
इसके साथ ही शुद्ध देसी घी की कीमत में ₹500 का इजाफा करते हुए इसे ₹1500 से ₹2000 प्रति लीटर तय करने की बात कही गई है। राजथल के अलावा हांसी के भैणीअमीपुर और मिर्चपुर गांवों में भी पशुपालकों ने दरों में ₹20 से ₹30 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का समर्थन किया है। वर्तमान में राज्य के भीतर भैंस का दूध ₹70 से ₹80 और गाय का दूध ₹50 से ₹60 प्रति किलो के स्तर पर बिक रहा है।
दूध के दाम बढ़ाने का यह फैसला अब प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी जोर पकड़ चुका
- जींद (सिरसा खेड़ी) : जुलाना तहसील के इस गांव में 1 सितंबर से ₹100 प्रति किलो दूध बेचने का ऐलान किया गया है। इतना ही नहीं, पशुपालकों ने सर्वसम्मति से यह सख्त नियम भी बनाया है कि यदि कोई भी ग्रामीण निर्धारित दर से कम में दूध बेचता पकड़ा गया, तो उस पर ₹5100 का दंड लगाया जाएगा।
- कैथल (धनौरी) : धनौरी गांव के दुग्ध उत्पादकों ने भी 1 सितंबर से ₹100 किलो की दर लागू करने पर मुहर लगा दी है।
- कुरुक्षेत्र (पिहोवा) : पिहोवा के रेस्ट हाउस में एकत्र हुए किसानों ने इस मुद्दे पर ठोस रणनीति बनाने के लिए 10 सितंबर को एक विशाल महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की है।
वहीं, दूसरी ओर राजथल सहित अन्य प्रभावित गांवों के सरपंचों ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यह पूर्णतया पशुपालकों और दूध उत्पादकों का अपना स्वतंत्र निर्णय है, इसमें ग्राम पंचायतों की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
महंगाई, पशु आहार और परिवहन लागत बनी मुख्य वजह
डेयरी संचालकों और पशुपालकों का तर्क है कि बीते कुछ समय में पशुपालन व्यवसाय बेहद घाटे का सौदा साबित हो रहा है। दूध की लागत बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से निम्न कारण हैं।
- चारा और खल-बिनौला महंगा : पशुओं के लिए अनिवार्य हरा चारा, तूड़ी, चुनी और खल-बिनौले की दरों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
- परिवहन और ईंधन खर्च : ईंधन (तेल) महंगा होने के कारण दूध को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का ट्रांसपोर्टेशन खर्च काफी बढ़ गया है।
- रखरखाव व तबेला संचालन : पशुओं की देखरेख, दवाइयों और तबेले के रखरखाव पर होने वाला दैनिक खर्च पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है।
खुदरा बाजार से लेकर त्योहारी मिठाइयों पर दिखेगा असर
यदि थोक स्तर पर दूध महंगा होता है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं, लोकल डेयरियों और घर-घर दूध पहुंचाने वाले सप्लायर्स पर पड़ेगा। खुदरा सप्लायर 1 सितंबर से नई दरें वसूलना शुरू कर सकते हैं।
इसके अलावा, दूध महंगा होने की गाज दही, पनीर, छाछ और मावा जैसे उत्पादों पर भी गिरेगी। आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए मिठाई विक्रेताओं, बेकरी संचालकों और होटल-रेस्टोरेंट उद्योग की लागत बढ़ना तय है, जिससे बाजार में मिठाइयों के दाम भी उछाल मारेंगे।