3 घंटे पहले
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भागवत ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों को संबोधित किया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में शनिवार रात करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है।
भागवत ने कहा- विविधता में एकता भारत की पारंपरिक सोच है और देश समय-समय पर पूरी दुनिया को इसका एहसास कराता रहा है। उन्होंने आगे कहा- सोचने की क्षमता इंसान के लिए एक वरदान है। सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे जानवरों के करीब ले जाती है।
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) ने किया। कार्यक्रम में 30 देशों के 180 धार्मिक नेता पहुंचे थे।

भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें…
1. धर्म सिर्फ पूजा नहीं, जीवन को संतुलित रखने का नियम: भागवत ने कहा कि भारत में जिस सिद्धांत को धर्म कहा जाता है, उसे सिर्फ धर्म या पूजा के तौर पर नहीं समझना चाहिए। धर्म वह व्यवस्था है जो ब्रह्मांड और जीवन को संभालती है। यह जीवन की अलग-अलग स्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
2. सिर्फ भौतिक सुख से जिंदगी में संतुष्टि नहीं मिलती: भागवत ने कहा कि पैसा, सामान और दूसरी भौतिक सुविधाएं हमेशा खुशी नहीं दे सकतीं। भौतिक सुख अस्थायी होता है और बहुत ज्यादा सुविधाएं होने के बावजूद संतुष्टि की कमी रह सकती है।
3. अमेरिका कर्मभूमि है, उसके प्रति सच्चे रहें: अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भागवत ने कहा कि आपकी पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि के प्रति है, उसके प्रति वफादार रहना चाहिए।

4. जीवन में सीधे संन्यास नहीं, हर पड़ाव की अपनी जिम्मेदारी: भागवत ने कहा कि इंसान के जीवन में चार चरण होते हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। पहले सीखना, फिर परिवार और समाज को संभालना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी को देना जरूरी है।
5. व्यक्ति, समाज और पर्यावरण साथ आगे बढ़ें: भागवत ने कहा कि प्रगति के लिए न व्यक्ति को दबाना चाहिए और न समाज को। व्यक्ति, समाज और पर्यावरण की भलाई साथ-साथ होनी चाहिए।
कार्यक्रम से जुड़ी 4 तस्वीरें…

भागवत के लिए भारतीय प्रवासियों ने पारंपरिक लोकगीत गाए।

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RSS चीफ भागवत के संबोधन से पहले बड़ी संख्या में लोग जुटे।

मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर भारतीय महिलाओं ने पुरुषों को राखी बांधी।

मैडिसन में संबोधन से पहले टाइम्स स्क्वायर के बिलबोर्ड पर भागवत की तस्वीरें दिखाई गईं।
RSS के शताब्दी वर्ष पर भागवत का 3 देशों का दौरा

न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग देखें…
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अपडेट्स
10:25 PM29 अगस्त 2026
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लोकगीतों के साथ ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ का समापन हुआ
09:31 PM29 अगस्त 2026
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‘भौतिक सुख गलत नहीं, आध्यात्मिक विकास भी जरूरी’
- भागवत ने कहा कि हिंदू दर्शन में भौतिक सुख और समृद्धि को गलत नहीं माना गया है। जीवन के चार पुरुषार्थों में अर्थ और काम को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
- उन्होंने जीवन के चार पारंपरिक चरणों—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास का भी जिक्र किया। भागवत ने कहा कि हर चरण की अपनी जिम्मेदारी होती है। पहले सीखना, फिर परिवार और समाज की जिम्मेदारियां निभाना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी के साथ साझा करना जरूरी है।

09:30 PM29 अगस्त 2026
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भागवत बोले- कमाई कितनी है से ज्यादा कितना बांटते हैं यह जरूरी
भागवत ने कहा कि करियर का मतलब सिर्फ पैसा कमाना और भौतिक सुख हासिल करना नहीं है। हम कितना कमाते हैं, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं, जितना यह कि हम उसमें से कितना दूसरों के साथ बांटते हैं। जीवन में कमाई के साथ सेवा और आध्यात्मिक विकास भी जरूरी है।
09:28 PM29 अगस्त 2026
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'भारत के लिए योगदान जरूरी नहीं, लेकिन उससे मिले मूल्यों पर चलें’
भागवत ने कहा कि भारतीय प्रवासियों को पहले अपनी कर्मभूमि की जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। भारत उनकी जन्मभूमि है, इसलिए अमेरिका के प्रति अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद अगर वे भारत के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने से कोई रोक नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए योगदान देना जरूरी नहीं है। जन्मभूमि उनसे मुख्य रूप से यह अपेक्षा करती है कि वे भारत से मिले मूल्यों को अपनाएं और उन्हीं के अनुसार अपना जीवन जिएं।
09:27 PM29 अगस्त 2026
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भागवत ने कहा- अमेरिका कर्मभूमि, उसके प्रति वफादार रहें
भागवत ने कहा कि अमेरिका में रहने और काम करने वाले भारतीयों की पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि अमेरिका के प्रति है। आप अमेरिका में हैं, अमेरिका में रहते हैं और अमेरिका में कमाते हैं। इसलिए आप अमेरिकी हैं और आपको अमेरिका के प्रति सच्चा होना चाहिए।
09:22 PM29 अगस्त 2026
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भागवत ने कहा- समाज या व्यक्ति को दबाकर विकास नहीं हो सकता
RSS प्रमुख ने कहा कि व्यक्ति, समाज और पर्यावरण को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। विकास किसी व्यक्ति या समाज को दबाकर नहीं होना चाहिए। व्यक्ति की सफलता के लिए समाज को दबाना भी सही नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि समाज की प्रगति के लिए व्यक्तियों को दबाया जाए।

09:17 PM29 अगस्त 2026
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भागवत बोले- धर्म सिर्फ पूजा या मजहब नहीं, इससे कहीं आगे है
भागवत ने कहा कि धर्म वह सिद्धांत है जो पूरी दुनिया को संतुलित रखता है। भारत में जिस सिद्धांत को ‘धर्म’ कहा जाता है, वह सिर्फ धर्म या पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है। यह उससे कहीं व्यापक है और पूरी दुनिया को बनाए रखने वाले सिद्धांत को दर्शाता है।
भागवत ने कहा- धर्म सिर्फ पूजा या मजहब नहीं है। यह इन सब चीजों से परे है। धर्म वह नियम या सिद्धांत है, जिसके आधार पर ब्रह्मांड कायम रहता है। यह इंसान को जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों और विरोधाभासों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
भागवत ने धर्म को संतुलन का सिद्धांत बताते हुए कहा कि यही संतुलन सब कुछ एक साथ बनाए रखता है और समाज के अलग-अलग लोग भी एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
09:14 PM29 अगस्त 2026
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भागवत बोले- सोच की शक्ति इंसान के लिए वरदान
भागवत ने इंसान और जानवरों के व्यवहार की तुलना की। उन्होंने कहा कि जानवर मुख्य रूप से अपनी प्राकृतिक जरूरतों और प्रवृत्तियों के अनुसार व्यवहार करते हैं, जबकि इंसान सोच सकता है। गाय का उदाहरण देते हुए कहा कि गाय पेट भरने तक घास खाती है। पेट भर जाने के बाद वह उस घास की चिंता नहीं करती।
उन्होंने कहा कि जानवर यह नहीं सोचता कि आज पेट भर गया है, लेकिन कल फिर भूख लगेगी, इसलिए खाना बचाकर रखना चाहिए। इंसान सोच सकता है। यह उसकी खूबी, वरदान और सौभाग्य है। लेकिन आप किस तरह सोचते हैं, यह महत्वपूर्ण है। भागवत ने कहा कि सोचने की क्षमता के साथ जिम्मेदारी भी आती है।

09:13 PM29 अगस्त 2026
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मोहन भागवत बोले- भौतिक सुख से स्थायी संतुष्टि नहीं मिलती
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भौतिक सुख और सुविधाएं इंसान को लंबे समय तक संतुष्ट नहीं कर सकतीं। पैसा, सामान और सुख-सुविधाएं मिलने के बावजूद इंसान को पूरी संतुष्टि नहीं मिलती। भौतिक सुख अस्थायी होता है और इसलिए इससे स्थायी खुशी नहीं मिल सकती। सच्ची खुशी की तलाश आखिरकार इंसान को अपने भीतर के आत्म तत्व (आत्मा) को समझने की ओर ले जाती है।
09:02 PM29 अगस्त 2026
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भागवत बोले- अलग दिखने के बावजूद हम सब जुड़े हैं
- RSS प्रमुख मोहन भागवत ने ‘एकता’ यानी वननेस की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि लोगों के रहने के तरीके और रोजमर्रा की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन इसके बावजूद सभी के बीच एक जन्मजात एकता मौजूद है।
- उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की भौतिक जरूरतें अलग होती हैं। किसी एक व्यक्ति की भूख मिट जाने का मतलब यह नहीं कि दूसरे की भी भूख मिट गई। इसी तरह हर व्यक्ति को अलग से खाना, कमाना और खर्च करना पड़ता है।
- भागवत ने कहा कि ये अंतर दुनिया की भौतिक वास्तविकता का हिस्सा हैं। लोग अलग दिखाई देते हैं और उनकी जरूरतें भी अलग होती हैं, लेकिन इन अलगावों के बावजूद उनके बीच एक स्वाभाविक जुड़ाव मौजूद रहता है।

09:00 PM29 अगस्त 2026
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भागवत ने कहा- यहां हम एकता का जश्न मनाने के लिए जुटे
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, यह सभा ‘एकता’ का जश्न मनाने के लिए आयोजित की गई है। हम यहां एकता का जश्न मनाने के लिए जुटे हैं। न्यूयॉर्क में ऐसा करने के लिए यह बिल्कुल उपयुक्त है। अमेरिका और भारत दोनों देश विविधता की अवधारणा से जुड़े हैं।
जब हम अमेरिका, यानी यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है। वह है-बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक दूसरा शब्द, एक दूसरा वाक्यांश चर्चा में आता है- एकता में विविधता।
09:00 PM29 अगस्त 2026
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भागवत ने कहा- एकता और विविधता भारत के DNA में है
मोहन भागवत ने कहा कि भारत के लिए एकता और विविधता दोनों उसके DNA का हिस्सा हैं। राष्ट्रों को केवल भौगोलिक इकाइयों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इस ब्रह्मांड की व्यवस्था में हर राष्ट्र की एक जिम्मेदारी है। ये राष्ट्र केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं हैं। इस ब्रह्मांड की संरचना में राष्ट्रों को एक जिम्मेदारी निभानी है।
उन्होंने कहा, स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र की एक अलग भूमिका और उद्देश्य होता है। हर राष्ट्र के पास देने के लिए एक संदेश है। हर राष्ट्र को पूरा करने के लिए एक मिशन है। हर राष्ट्र को पूरा करने के लिए एक नियति है।
08:27 PM29 अगस्त 2026
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लोग बोले- वसुधैव कुटुंबकम पर भागवत के विचार सुनने को उत्साहित
08:11 PM29 अगस्त 2026
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भागवत के साथ मंच पर विभिन्न धर्मों के नेताओं ने फोटो ली
08:10 PM29 अगस्त 2026
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भारतीय मूल की महिला ने भागवत को राखी बांधी

07:56 PM29 अगस्त 2026
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भारतीय मूल के अमेरिकी बोले- विवेकानंद के बाद भागवत का संबोधन हिंदुत्व की याद दिलाएगा
भागवत के संबोधन से पहले भारतीय मूल के एक अमेरिकी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका आकर दुनिया को हिंदुत्व के बारे में बताया था। भागवत का संबोधन उस विचार को फिर से याद दिलाने जैसा है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सिर्फ एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।
07:46 PM29 अगस्त 2026
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मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कार्यक्रम की 4 तस्वीरें...




07:11 PM29 अगस्त 2026
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मैडिसन स्क्वायर गार्डन में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू
07:07 PM29 अगस्त 2026
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भागवत बोले- जो सोचता है भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं
भागवत ने मैडिसन गार्डर में कार्यक्रम से पहले न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने कहा- अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि हिंदू होने के लिए यह मानना जरूरी है कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की गरिमा समान है। पूरी खबर पढ़ें…
07:05 PM29 अगस्त 2026
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भागवत का भाषण सुनने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में जुटे लोग
06:41 PM29 अगस्त 2026
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न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर पहुंचे भागवत

भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर का दौरा किया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ शांति ला सकती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में भले ही अलग-अलग तरह की विविधताएं, मतभेद और संघर्ष हों, लेकिन अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो दुनिया में बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है।
भागवत 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। इसे मैचलैस गिफ्ट्स भी कहा जाता है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस्कॉन के 120 देशों में 1,300 मंदिर हैं।
06:39 PM29 अगस्त 2026
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अमेरिका का मैडिसन स्क्वायर गार्डन 58 साल पुराना
मैडिसन स्क्वायर गार्डन (MSG) न्यूयॉर्क शहर के मैनहैटन में स्थित एक मशहूर इनडोर एरिना है। यहां स्पोर्ट्स इवेंट, कंसर्ट, कॉमेडी शो और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
मौजूदा मैडिसन स्क्वायर गार्डन 1968 में बना। इसे 11 फरवरी 1968 को खोला गया। यह MSG नाम की चौथी इमारत है। इससे पहले इसी नाम से तीन और एरिना बन चुके थे।
डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में न्यूयॉर्क में अपनी राजनीतिक वापसी के दौरान यहां बड़ा कार्यक्रम किया था। रिपब्लिकन पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन 2004 में और डेमोक्रेटिक पार्टी के सम्मेलन 1976, 1980 और 1992 में यहां हुए थे।

06:39 PM29 अगस्त 2026
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2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत
मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था।
2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।

06:37 PM29 अगस्त 2026
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1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी RSS की स्थापना