भागलपुर57 मिनट पहले
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सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले कच्ची कांवड़िया पथ पर शिवभक्ति के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। इस मार्ग पर बोल बम के जयकारे और भगवा रंग का सैलाब उमड़ रहा है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल से आए शिवभक्तों की विशेष कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
कुछ शिवभक्तों ने अपनी कांवड़ पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की विशाल प्रतिमाएं स्थापित की हैं। वहीं, कुछ अन्य भक्तों ने भगवान शिव के परम भक्त रावण की प्रतिमा को कांवड़ पर बैठाकर बाबा बैद्यनाथ धाम ले जाने का संकल्प लिया है। ये कांवड़ें शिवभक्ति और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रही हैं।
कोलकाता, पश्चिम बंगाल से आए श्रद्धालु मोहन यादव और उनके साथियों ने एक ऐसी विशाल कांवड़ बनाई है, जिस पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन प्रतिमाओं का वजन लगभग 110 से 120 किलोग्राम है, जिसमें जल का वजन शामिल नहीं है। फाइबर, रुई और अन्य सामग्री से निर्मित इन प्रतिमाओं को 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा के लिए विशेष रूप से मजबूत बनाया गया है।

आकर्षक लाइटों से कावड़ को श्रद्धालुओं ने सजाया
इस कांवड़ को आकर्षक लाइटों से भी सजाया गया है। भक्तों के अनुसार, रात में रोशनी के बीच महादेव और माता पार्वती की प्रतिमा का दृश्य अत्यंत मनमोहक प्रतीत होगा।
मोहन यादव बताते हैं कि वे वर्ष 2014 से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। हर साल उनकी कोशिश रहती है कि बाबा की भक्ति में कुछ नया और अनोखा किया जाए। उनका कहना है कि इतनी भारी कांवड़ उठाना सामान्य इंसान के लिए आसान नहीं है, लेकिन जब कंधे पर कांवड़ हो और दिल में महादेव का नाम, तो थकान और परेशानी का एहसास ही नहीं होता।
उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना सिर्फ अपने लिए नहीं है। वे बाबा भोलेनाथ से पूरे समाज, परिवार, वातावरण और पशु-पक्षियों के कल्याण की कामना करते हैं।

महादेव के सबसे बड़े भक्त रावण को बाबा धाम ले जा रहे भक्त
इसी कच्ची कांवड़िया पथ पर पश्चिम बंगाल के हावड़ा मैदान से आए 22 श्रद्धालुओं का एक और दल लोगों का ध्यान खींच रहा है। इन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के परम भक्त माने जाने वाले रावण की विशाल प्रतिमा को कांवड़ पर विराजमान किया है।
करीब 150 किलोग्राम से अधिक वजन वाली इस विशेष कांवड़ को लेकर श्रद्धालु अजगैबीनाथ धाम से बाबा बैद्यनाथ धाम की करीब 105 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं।
कांवड़ संघ पेलकल घाट रेलवे कॉलोनी से जुड़े श्रद्धालु दीपक कुमार पासवान, सूरज कुमार और सत्यम मंडल सहित अन्य भक्तों का कहना है कि वे रावण को उसके आराध्य भगवान शिव से मिलाने के लिए बाबा धाम लेकर जा रहे हैं।

श्रद्धालु बोले- 10 साल से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं
श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। पहले वे साधारण पिट्ठू कांवड़ लेकर यात्रा करते थे, लेकिन इस बार सभी साथियों ने मिलकर कुछ अलग करने का फैसला किया। इसके बाद हावड़ा से विशेष रूप से रावण की प्रतिमा तैयार कराई गई और उसे कांवड़ पर स्थापित किया गया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान भोलेनाथ का सबसे बड़ा भक्त रावण था। इसलिए इस बार उनके मन में भाव आया कि रावण को कांवड़ पर बैठाकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक ले जाया जाए।
150 किलो से अधिक वजन उठाने की चुनौती के बावजूद उनके चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि अद्भुत उत्साह नजर आ रहा है। उनका कहना है कि कांवड़ भारी जरूर है, रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन आस्था के सामने मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं।
उनका विश्वास है कि “जब महादेव का हाथ सिर पर हो तो कोई भी भार भारी नहीं होता। बाबा की कृपा से यह यात्रा पूरी होगी और भोलेनाथ अपने भक्तों की नैया पार लगाएंगे।”
श्रद्धालुओं ने बताया कि इस यात्रा को पूरा करने में लगभग चार दिन का समय लगेगा। रास्ते में विश्राम करते हुए वे लगातार बाबा धाम की ओर बढ़ेंगे। उनकी कोई व्यक्तिगत या सांसारिक इच्छा नहीं है। वे बाबा से अपने परिवार, समाज और पूरी दुनिया के लिए सुख, शांति और कल्याण का आशीर्वाद मांग रहे हैं।

बोल बम के जयकारों से गूंज रही शिवनगरी
कच्ची कांवड़िया पथ पर इन अनोखी कांवड़ों के साथ चल रहे श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। कोई कंधे पर भारी कांवड़ लेकर दौड़ रहा है, तो कोई भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए धीरे-धीरे बाबा धाम की ओर बढ़ रहा है।
उधर बाबा नगरी पहुंच रहे श्रद्धालुओं में भी जबरदस्त उत्साह है। दिल्ली से आए श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ के दर्शन के बाद कहा कि वे किसी सांसारिक इच्छा के लिए नहीं, बल्कि बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं।
उनका कहना है कि बाबा के दरबार में पहुंचते ही मन को ऐसी शांति मिलती है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। “हम दिल्ली से बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आए हैं। बोल बम का नाम लेते हुए बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई है। अब बाबा ही अपने भक्तों की नैया पार लगाएंगे।”
सुल्तानगंज से देवघर तक इस समय हर कदम शिवमय है। कंधों पर कांवड़, जुबां पर बोल बम और दिल में महादेव की भक्ति लिए लाखों श्रद्धालु अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। कहीं कांवड़ पर महादेव और माता पार्वती विराजमान हैं, तो कहीं उनके परम भक्त रावण को बाबा के दरबार तक पहुंचाने का संकल्प है। यही आस्था श्रावणी मेले को सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और समर्पण का विराट उत्सव बना रही है।
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