Published: Thursday, August 27, 2026, 11:26 [IST]
फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने वाले बच्चों और किशोरों के लिए Meta बड़े बदलाव करने जा रही है। कंपनी पर अमेरिका में बच्चों को सोशल मीडिया का आदी बनाने और उनकी सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले फीचर इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे। इस मामले को खत्म करने के लिए Meta ने राज्यों के साथ एक बड़े समझौते पर सहमति जताई है।
इसके तहत कंपनी करीब 17 अरब डॉलर तक का भुगतान कर सकती है। साथ ही 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल के नियम भी सख्त किए जाएंगे। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट सीमा तय करने से लेकर रात में ऐप बंद रखने तक कई बदलाव होंगे। हालांकि Meta ने समझौते में किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है।
2023 में शुरू हुआ था मामला
अमेरिका के कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने साल 2023 में Meta के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम में ऐसे फीचर तैयार किए गए, जिनकी वजह से बच्चे और किशोर जरूरत से ज्यादा समय इन प्लेटफॉर्म पर बिताने लगे। राज्यों का कहना था कि सोशल मीडिया का इस तरह लगातार इस्तेमाल बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। Meta पर माता-पिता और आम लोगों को इन संभावित खतरों की सही जानकारी नहीं देने का आरोप भी लगाया गया।
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इस मामले की सुनवाई अगस्त 2026 में कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में शुरू हुई थी। अब समझौता होने के बाद मुकदमा आगे नियमित सुनवाई के तौर पर नहीं चलेगा। हालांकि समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अदालत की मंजूरी अभी बाकी है।
Meta कितने अरब डॉलर देगी?
समझौते की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के अनुसार, राज्यों को इस समझौते के तहत 17 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं। वहीं Meta ने अपने बयान में कुल भुगतान करीब 18 अरब डॉलर बताया है। विदेशी मीडिया रिपोर्टों में समझौते की अधिकतम रकम करीब 16.68 अरब डॉलर बताई गई है। इस पूरी रकम का एक बड़ा हिस्सा तय है, जबकि 5 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम कुछ शर्तें पूरी होने पर ही मिलेगी।
यह अतिरिक्त रकम तभी जारी होगी, जब यूट्यूब और टिकटॉक भी बच्चों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाएं और तय रकम का भुगतान करें। Meta ने बताया है कि वह इस समझौते के लिए 2026 की तीसरी तिमाही में करीब 10 अरब डॉलर का कानूनी खर्च दर्ज करेगी।
फेसबुक-इंस्टाग्राम पर रोज 2 घंटे की सीमा
समझौते का सबसे बड़ा असर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स पर पड़ेगा। फेसबुक और इंस्टाग्राम को मिलाकर रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट सीमा तय की जाएगी। अगर कोई किशोर इस सीमा को हटाना चाहता है तो उसके लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। दोनों ऐप्स पर बिताया गया समय इसी दो घंटे की कुल सीमा में जोड़ा जाएगा। यानी कोई यूजर एक घंटे इंस्टाग्राम और एक घंटे फेसबुक चलाता है तो उसका पूरा दो घंटे का समय इस्तेमाल माना जाएगा।
रात में नहीं चला पाएंगे ऐप
किशोरों के लिए रात के समय भी इस्तेमाल पर रोक रहेगी। नए नियमों के तहत रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा स्कूल के समय भी नोटिफिकेशन पर रोक रहेगी। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक डिफॉल्ट रूप से नोटिफिकेशन बंद रहेंगे। हालांकि सीधे संदेश और सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट इस नियम से बाहर रहेंगे।
लगातार इस्तेमाल पर ब्रेक का रिमाइंडर
Meta किशोर यूजर्स को लगातार सोशल मीडिया चलाने से रोकने के लिए ब्रेक लेने के रिमाइंडर भी दिखाएगी। यानी लंबे समय तक ऐप इस्तेमाल करने पर उन्हें बीच-बीच में ब्रेक लेने के लिए कहा जाएगा। इसके साथ उम्र की जांच के लिए ज्यादा सख्त तकनीक, माता-पिता के लिए आसान नियंत्रण और बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे। कुछ ऐसे फीचर भी सीमित किए जाएंगे जिनको लेकर बच्चों की मानसिक सेहत पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। इनमें सार्वजनिक लाइक की संख्या और कुछ खूबसूरती बढ़ाने वाले फिल्टर शामिल हैं।
YouTube और TikTok पर भी बढ़ेगा दबाव
इस समझौते में यूट्यूब और टिकटॉक को लेकर भी बड़ी शर्त रखी गई है। Meta का कहना है कि केवल फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नियम सख्त करने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी, क्योंकि बच्चे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं। इसी वजह से समझौते की बाकी रकम का एक हिस्सा यूट्यूब और टिकटॉक की ओर से ऐसे ही सुरक्षा कदम उठाए जाने पर निर्भर है।
इन प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए एक घंटे की रोजाना सीमा, रात में इस्तेमाल पर रोक और उम्र की जांच जैसे उपाय लागू करने होंगे। साथ ही उन्हें Meta के बराबर तय रकम भी देनी होगी।
Meta ने आरोपों से किया इनकार
Meta ने इस मामले में लगाए गए आरोपों को लगातार खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि किशोरों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव उसकी प्राथमिकता है। समझौते में भी Meta ने किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी ने यह भी कहा है कि समझौते का असर तभी बेहतर होगा, जब दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी बच्चों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाएं।
अदालत की मंजूरी अभी बाकी
फिलहाल यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। कैलिफोर्निया की संघीय अदालत को इसकी अंतिम मंजूरी देनी होगी। अदालत की मंजूरी के बाद ही समझौते में तय नियम लागू होंगे। हालांकि इस समझौते से Meta की सभी कानूनी परेशानियां खत्म नहीं होंगी। बच्चों और सोशल मीडिया से जुड़े दूसरे मामले भी कंपनी के खिलाफ जारी हैं।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका में हुआ यह समझौता भारत में सीधे तौर पर लागू नहीं होगा। फिर भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर इसका असर दुनिया भर की टेक कंपनियों पर पड़ सकता है। भारत में भी बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नियम मौजूद हैं। ऐसे में आगे उम्र की जांच, माता-पिता के नियंत्रण और बच्चों के स्क्रीन टाइम जैसे उपायों को भारतीय बाजार में किस तरह लागू किया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
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