सिद्धार्थनगर में 12 बोरी अनुदानित यूरिया पकड़ी गई: ड्राइवर पर मुकदमा, ई-वे बिल और वैध दस्तावेज मांगने पर दिखाया नहीं - Siddharthnagar News

Published on 26 जुल॰ 2026
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रोहित सिंह | सिद्धार्थनगर5 घंटे पहले

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सिद्धार्थनगर में खरीफ सीजन के दौरान अनुदानित यूरिया की कालाबाजारी रोकने के सरकारी दावों पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मोहाना पुल से एक ई-रिक्शा पर लदी कृभको की 12 बोरी सब्सिडी वाली यूरिया बरामद हुई। ड्राइवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया, लेकिन खाद के स्रोत और आपूर्ति करने वाले विक्रेता को लेकर विभाग ने कोई जानकारी नहीं दी।

कृषि विभाग के अनुसार, 25 जुलाई को मोहाना पुल पर संयुक्त जांच अभियान के दौरान ई-रिक्शा संख्या UP-55 AT-4037 से कृभको कंपनी की 12 बोरी भारतीय अनुदानित यूरिया बरामद की गई। ई-रिक्शा चला रहे सुकई (23) , निवासी पतिला, थाना मोहाना, से खाद के संबंध में प्राप्ति रसीद, पीओएस मशीन की पर्ची, ई-वे बिल या अन्य वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

इसके बाद यूरिया, ई-रिक्शा और चालक को मोहाना थाने के सुपुर्द कर दिया गया तथा उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।

कार्रवाई के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि 12 बोरी सब्सिडी वाली यूरिया आखिर किस अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निकली? कृषि विभाग के प्रेस नोट में इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई।

यदि खाद किसी लाइसेंसधारी दुकान से बेची गई थी, तो क्या संबंधित दुकान के स्टॉक रजिस्टर, पीओएस मशीन का रिकॉर्ड, बिक्री रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई? यदि जांच हुई तो उसके क्या निष्कर्ष रहे और यदि नहीं हुई तो क्यों?

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी मात्रा में अनुदानित यूरिया बिना किसी अधिकृत विक्रेता की संलिप्तता के बाजार में पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में केवल वाहन चालक पर कार्रवाई करने से कालाबाजारी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना संभव नहीं होगा।

कृषि विभाग हर वर्ष उर्वरकों की निगरानी और सघन चेकिंग अभियान चलाने का दावा करता है। इसके बावजूद जिले में समय-समय पर अनुदानित यूरिया के अवैध परिवहन और कालाबाजारी के मामले सामने आते रहे हैं। इससे विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

यदि निगरानी इतनी प्रभावी है, तो सब्सिडी वाली खाद बिना वैध दस्तावेजों के खुलेआम सड़क तक कैसे पहुंच रही है? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।

लाइसेंसधारी विक्रेता पर कार्रवाई होगी

उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत यदि किसी लाइसेंसधारी विक्रेता की संलिप्तता सामने आती है, तो उसका लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में कृषि विभाग ने किसी विक्रेता के खिलाफ जांच या प्रस्तावित कार्रवाई की कोई जानकारी साझा नहीं की है। इससे यह धारणा बन रही है कि कार्रवाई फिलहाल केवल परिवहन कर रहे व्यक्ति तक सीमित है।

किसानों ने उठाई पारदर्शी जांच की मांग

किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन में हर साल यूरिया की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आती हैं। उनका कहना है कि यदि अवैध परिवहन पकड़ा गया है तो केवल चालक पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जिस दुकान या नेटवर्क से खाद बाहर निकली, उसका भी खुलासा होना चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। तभी कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

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