एक कोच को सालभर में 2.80 लाख रु. की बिजली देगा, 11 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा
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रेलवे कोच अब अपनी जरुरत की बिजली सूरज की रोशनी से भी बनाएंगे। भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा की दिशा में पहल करते हुए कोच की छत पर सोलर पैनल लगाए हैं। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में सोलर-असिस्टेड कोच बनाए हैं। एक कोच पर करीब 7 किलोवाट-पीक क्षमता के सोलर पैनल लगाए हैं। ये सालाना 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली बनाएंगे। रेलवे के अनुसार एक कोच सालाना करीब 2.80 लाख रु. बचाएगा।
करीब 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटेगा। प्रयागराज में प्रयोग सफल रहने पर इसको जोधपुर मंडल सहित अन्य मंडलों में भी लागू किया जाएगा। परंपरागत आईसीएफ कोचों में बिजली उत्पादन के लिए एक्सल-चालित अल्टरनेटर का इस्तेमाल होता है। ट्रेन के पहिए घूमने के साथ अल्टरनेटर बिजली पैदा करता है। हालांकि सभी ट्रेनों में यह व्यवस्था नहीं होती है।
न ट्रेन की गति प्रभावित होगी, न अतिरिक्त फ्यूल लगेगा, ऊर्जा खर्च घटेगा नई व्यवस्था में सोलर सिस्टम इस मौजूदा व्यवस्था को अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत उपलब्ध कराएगा। यानी दिन के समय कोच की छत पर लगे पैनल बिजली बनाकर सीधे बैटरी चार्जिंग में योगदान देंगे।
सोलर सिस्टम को एक आईसीएफ गैर वातानुकूलित कोच में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया है। रेलवे इस कोच के प्रदर्शन, बिजली उत्पादन और वास्तविक ऊर्जा बचत का आकलन करेगा। परिणाम पॉजिटिव रहने पर यह तकनीक दूसरे कोचों में भी लागू की जा सकती है। इस तरह बिजली बनाने में न तो ट्रेन की गति बदलेगी न अतिरिक्त ईंधन खर्च होगा। कोच की छत का भी सदुपयोग होगा। इससे रेलवे के ऊर्जा खर्च में कमी के साथ स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
जोधपुर में सोलर प्लांट से हर साल दो करोड़ रुपए की बिजली बनेगी जोधपुर रेल मंडल में स्टेशन व विभिन्न स्थानों पर करीब 1,700 किलोवाट-पीक (1.7 मेगावाट) क्षमता के सोलर प्लांट लग चुके हैं। ये सालाना करीब 22-25 लाख यूनिट बिजली पैदा कर सकते हैं। बिजली की औसत लागत 7-8 रु. प्रति यूनिट मानें तो सालाना करीब 1.50-2 करोड़ रु. की बिजली बनेगी। 20 साल में करीब 30-40 करोड़ रु. की बचत हो सकती है।
बता दें कि इससे पहले प्रयागराज रेल मंडल में 4.7 मेगावाट सोलर क्षमता से 2024-25 में 42.19 लाख यूनिट बिजली बनी और करीब 1.6 करोड़ रुपए की बचत हुई थी। इसके अलावा उत्तरप्रदेश के चुनार, मिर्जापुर, नैनी, इटावा, फफूंद और मानिकपुर स्टेशनों पर भी सौर ऊर्जा परियोजनाओं का संचालन हो रहा है।