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सार
Central Railway ने पहली तिमाही में स्क्रैप बिक्री से ₹136.10 करोड़ कमाए। पिछले 5 सालों की पहली तिमाही में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से हुई 89% की बढ़ोतरी। 'मिशन-जीरो स्क्रैप स्टेटस' से राजस्व में उछाल

मध्य रेल का मिशन जीरो स्क्रैप स्टेटस (सोर्स: AI)
विस्तार
Central Railway Record Revenue: पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में मध्य रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। ‘मिशन–जीरो स्क्रैप स्टेटस’ अभियान के तहत मध्य रेल ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में स्क्रैप बिक्री से ₹136.10 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है।
यह पिछले पांच वर्षों की पहली तिमाही का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। मध्य रेल के स्टोर्स विभाग ने सभी पांच मंडलों और कारखानों में बिखरे हुए कबाड़ की पहचान कर उसके व्यवस्थित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया। इसका नतीजा राजस्व में भारी वृद्धि के रूप में सामने आया।
पिछले सालों की तुलना में दोगुनी कमाई
मध्य रेल ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में स्क्रैप बिक्री से ₹136.10 करोड़ का राजस्व अर्जित कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 89 प्रतिशत अधिक है, जो रेलवे की संसाधन प्रबंधन और स्क्रैप निस्तारण नीति की बड़ी सफलता मानी जा रही है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025-26 में ₹71.94 करोड़, 2024-25 में ₹81.09 करोड़, 2023-24 में ₹81.64 करोड़ और 2022-23 में ₹101.40 करोड़ की आय हुई थी। इस बार की रिकॉर्ड कमाई से स्पष्ट है कि ‘मिशन-जीरो स्क्रैप स्टेटस’ अभियान के तहत अपनाई गई रणनीति ने राजस्व बढ़ाने के साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी सुनिश्चित किया है।
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किस मंडल ने कितनी कमाई की
इस बार मुंबई मंडल ₹22.43 करोड़ के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद भुसावल मंडल ₹20.44 करोड़, नागपुर मंडल ₹19.98 करोड़, पुणे मंडल ₹18.19 करोड़ और सोलापुर मंडल ₹6.44 करोड़। इसके अलावा परेल और माटुंगा कारखानों सहित अन्य शेडों और इकाइयों ने मिलकर ₹48.62 करोड़ का योगदान दिया।
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क्या-क्या बेचा गया
यह राजस्व रेल के परमानेंट-वे के पुराने स्लीपर, लौह और अलौह धातु स्क्रैप, अनुपयोगी कंडेम्ड कोच-वैगन और अन्य कबाड़ सामग्री को बेचकर हासिल किया गया। मध्य रेल के अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि वित्तीय अनुशासन, परिचालन दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ‘मिशन-जीरो स्क्रैप स्टेटस‘ के जरिए कबाड़ को राजस्व में बदलकर संसाधनों का सदुपयोग किया जा रहा है।
