स्मार्ट खेती के लिए एआई-रोबोटिक्स से जुड़ेगा कृषि क्षेत्र:139 करोड़ के प्रोजेक्ट से स्मार्ट होगी एमपी की खेती, 26 जिलों में लगेंगे एआई वेदर स्टेशन
ग्वालियर6 घंटे पहले
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यह हाईटेक AI स्मार्ट वेदर स्टेशन मौसम का विश्लेषण कर बताया कौन से मौसम में क्या खेती करना है
मध्यप्रदेश में खेती को तकनीक से जोड़कर स्मार्ट और आधुनिक बनाने की दिशा में पहल की गई है। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) ने ‘डिजिटल और रोबोटिक फार्मिंग प्रोजेक्ट’ के लिए शासन को 139 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है।
प्रस्ताव मंजूर होने पर खेती में एआई, ड्रोन, रोबोटिक्स और सेंसर तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। खेतों से जुड़ी मौसम, मिट्टी और फसल की जानकारी किसानों तक मोबाइल के जरिए पहुंचाने की योजना है।

एग्रीकल्चर की प्रोफेसर सुषमा खेत में खड़ी फसल को देखते हुए।
कैंपस में बनेगी एआई एग्रीकल्चर लैब
प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में एआई आधारित एग्रीकल्चर लैब विकसित की जाएगी। यहां छात्रों, शोधकर्ताओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी।
खेतों में ड्रोन, कृषि रोबोट और ऑटोमेटेड सिंचाई प्रणाली के इस्तेमाल पर भी काम होगा।
प्रिसिजन फार्मिंग के तहत सेंसर के जरिए मिट्टी की नमी, पोषक तत्व और फसल की स्थिति का डेटा जुटाया जाएगा। इसके आधार पर खेती से जुड़े फैसले अधिक सटीक तरीके से लेने में मदद मिलेगी।

AI हाईटेक स्मार्ट वेदर स्टेशन इन सात तरीकों से करेगा मौसम का विश्लेषण
IIT रोपड़ के साथ हुआ एमओयू
विश्वविद्यालय के निदेशक शिक्षण डॉ. प्रदीप कुमार के अनुसार, RVSKVV ने आईआईटी रोपड़ के ANAM AI केंद्र के साथ एमओयू किया है। शिक्षा मंत्रालय से फंडेड इस केंद्र के साथ कृषि जरूरतों के अनुसार एआई टूल विकसित और कस्टमाइज किए जा रहे हैं।
योजना के तहत मालवा और चंबल क्षेत्र के 26 जिलों में एआई और सेंसर आधारित स्मार्ट वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय के अनुसार, इनकी स्थापना अगले तीन महीनों में करने का लक्ष्य रखा गया है।
25 किमी के दायरे में मौसम का डेटा
प्रस्तावित वेदर स्टेशन करीब 7 से 8 फीट के होंगे और सेंसर के जरिए 25 किलोमीटर के दायरे में मौसम व मिट्टी से जुड़ा डेटा जुटाएंगे।

डेटा एयरटेल और बीएसएनएल नेटवर्क के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा। किसान मोबाइल ऐप और ANAM AI पोर्टल पर अपनी लॉगिन आईडी के जरिए यह जानकारी देख सकेंगे।
खेत की फोटो भेजने पर मिलेगा इंसेंटिव
योजना में किसानों को भी डेटा जुटाने की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। जिस किसान के खेत में वेदर स्टेशन लगेगा, उसे लॉगिन आईडी दी जाएगी। किसान अपने खेत की वास्तविक तस्वीरें ऐप पर अपलोड कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय के अनुसार, तस्वीरों की संख्या और गुणवत्ता के आधार पर किसानों को वित्तीय इंसेंटिव देने की व्यवस्था की जाएगी।
बीमारी आने से पहले अलर्ट देगा एआई
प्रोजेक्ट में मौसम और फसल से जुड़े आंकड़ों को एक साथ जोड़कर एआई मॉडल तैयार किया जाएगा। इसके जरिए मौसम में बदलाव के आधार पर फसलों में संभावित कीट और बीमारी का पहले से अनुमान लगाने का प्रयास होगा।
साथ ही सेंसर से मिट्टी में कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और नमी की स्थिति का पता लगाया जाएगा। इसके आधार पर एआई किसानों को फसल की जरूरत के मुताबिक खाद की मात्रा तय करने में मदद करेगा।

मजदूरों की कमी से भी मिलेगी राहत
विश्वविद्यालय के अनुसार, कृषि क्षेत्र में मजदूरों की कमी को देखते हुए ड्रोन, कृषि रोबोट और ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है। इससे बुआई से लेकर फसल की निगरानी और सिंचाई तक कई कामों में तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
विश्वविद्यालय के निदेशक शिक्षण डॉ. प्रदीप कुमार के मुताबिक, प्रोजेक्ट के तहत एआई, सेंसर और रोबोटिक्स को खेती से जोड़कर किसानों को स्थानीय स्तर पर उपयोगी और समय पर जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद परियोजना के विभिन्न चरणों में काम आगे बढ़ाया जाएगा।
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