देश के प्रमुख पंचांगों की गणना के अनुसार इस वर्ष हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पावन पर्व एक ही दिन पड़ रहा है।
तीज और गणेश चतुर्थी
- Published: 01 Sep 2026, 10:34 AM IST
- Last Updated: 01 Sep 2026, 11:05 AM IST
राजनांदगांव। देश के प्रमुख पंचांगों की गणना के अनुसार इस वर्ष हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पावन पर्व एक ही दिन पड़ रहा है। सामान्यतः हरतालिका तीज के अगले दिन गणेश जन्मोत्सव का शुभारंभ होता है, लेकिन तिथियों के इस दुर्लभ संयोग के कारण दोनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे। ऐसे में श्रद्धालुओं के घरों में सुबह प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का गाजे-बाजे के साथ गृह प्रवेश और स्थापना होगी, वहीं शाम को सुहागिन महिलायें अखंड सौभाग्य की कामना के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधिवत आराधना करेंगी।
तिथियों के इस फेर को लेकर पंडितो का कहना है कि, तृतीया तिथि का विस्तार और मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि का प्रवेश एक ही दिन होने से यह स्थिति निर्मित हुई है। भारतीय काल गणना के अनुसार, गणेश स्थापना मध्याह्न काल में शुभ मानी जाती है, जबकि हरतालिका तीज का व्रत सूर्योदय से आरंभ होकर प्रदोष काल यानी गोधूलि वेला में मुख्य रूप से पूजित होता है। इस कारण एक ही दिन शिव परिवार की आराधना का महासंयोग बन रहा है।
प्रमुख पंचांगों की गणना में एकरूपता
नीमच के निर्णय सागर पंचांग, जबलपुर के बाबूलाल भुवन विजय पंचांग, बनारस के प्रतिष्ठित ऋषिकेश पंचांग और रायपुर के देव पंचांग में इस बार तिथियों का यही तालमेल दर्ज है। सभी प्रमुख पंचांगों के अनुसार तृतीया और चतुर्थी तिथि के समय चक्र का मिलन होने से हरितालिका व्रत और गणेश स्थापना का अनुष्ठान एक ही दिवस पर संपादित करने का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। प्रदेश में हरतालिका तीज के पर्व को लेकर शासकीय अवकाश दिया जाता है। शासकीय कैलेंडर के अनुसार इस बार हरतालिका तीज का अवकाश 14 सितंबर को दिया गया है, वहीं गणेश चतुर्थी को लेकर वैकल्पिक अवकाश भी 14 सितंबर को ही दिया गया है।
पूजन और समय का सटीक समन्वय
पंडित कमलेश त्रिपाठी के अनुसार, दोपहर से पहले शुभचौघड़िया व मध्याहन काल में घर-घर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर मोदक का भोग लगाया जाए। इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रख रहीं महिलाएं शाम के समय प्रदोष काल में शिव-पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना, कथा श्रवण और आरती संपन्न करें। दोनों ही पूजा अपने निर्धारित काल में निर्विघ्न पूरी की जा सकती हैं। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि व्रती महिलाओं को तिथि को लेकर भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। दोनों पोंव् की प्रकृति और पूजा का समय अलग-अलग निर्धारित है, जिससे किसी भी अनुष्ठान में बाधा उत्पन्न नहीं होगी। इस अनूठे धार्मिक संयोग से इस बार घरों और मंदिरों में सुबह से देर रात तक भक्ति का दोहरा उल्लास देखने को मिलेगा। सुबह गजानन के जयकारों से वातावरण गूंजेगा, तो शाम को भोलेनाथ और मां पार्वती के भजनों से घर-आंगन भक्तिमय रहेगा।
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